Dhar: भोजशाला फैसले से पहले धार में सख्त सुरक्षा, 1200 पुलिसकर्मी तैनात; ढाई मिनट में पहुंचेगी फोर्स
धार की विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद मामले में आज इंदौर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आ सकता है। फैसले से पहले पूरे धार शहर को पुलिस छावनी में बदल दिया गया है और करीब 1200 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
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विस्तार
केंद्रीय पुरातत्व विभाग के अधीन धार स्थित भोजशाला मंदिर है या मस्जिद, इस बहुचर्चित विवाद पर आज इंदौर हाईकोर्ट से बड़ा फैसला आने की उम्मीद है। मामले की सुनवाई एक सप्ताह पहले पूरी हो चुकी थी और तभी से निर्णय आने की संभावना जताई जा रही थी। कल 16 मई से न्यायालय का ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू होने वाला है, ऐसे में संभावना है कि भोजशाला मामले पर दोपहर तक फैसला सुनाया जा सकता है।
इधर फैसले की संभावना के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। धार शहर को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। शहर में एसटीएफ समेत करीब 1200 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं और चप्पे-चप्पे पर पुलिस की नजर बनी हुई है। यह मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। कोर्ट का फैसला यह तय करेगा कि सदियों पुराने इस परिसर की वास्तविक पहचान क्या है और भविष्य में यहां पूजा या इबादत किस स्वरूप में होगी।
आज जुम्मे की नमाज, प्रशासन पूरी तरह सतर्क
एएसआई संरक्षित इस स्मारक में हर शुक्रवार मुस्लिम समाज के लोग जुम्मे की नमाज अदा करने पहुंचते हैं। आज शुक्रवार होने के कारण बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में दोनों पक्षों की नजर कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है। धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने जिलेवासियों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भोजशाला मामला संवेदनशील है, इसलिए सभी नागरिक जिम्मेदारी से व्यवहार करें और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें। कलेक्टर ने सोशल मीडिया को लेकर भी सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की भ्रामक, भड़काऊ या अफवाह फैलाने वाली पोस्ट साझा न करें। प्रशासन सोशल मीडिया की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है। माहौल खराब करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ढाई मिनट में पहुंचेगी पुलिस
धार, झाबुआ, बड़वानी और इंदौर से अतिरिक्त पुलिस बल धार पहुंच चुका है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत करीब 1200 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। पूरे सुरक्षा प्रबंधन की जिम्मेदारी दो एएसपी, 15 एसडीओपी, पांच डीएसपी और दो दर्जन थाना प्रभारियों को सौंपी गई है। प्रशासन ने धार में पहले पदस्थ रह चुके अधिकारियों को भी बुलाया है, क्योंकि वे शहर की गलियों और कॉलोनियों से अच्छी तरह परिचित हैं। शहर की ऊंची इमारतों पर हाईराइज बिल्डिंग सुरक्षा व्यवस्था के तहत जवान तैनात किए गए हैं। पुलिस मोबाइल वाहन लगातार शहर में गश्त कर रहे हैं। पुलिस कंट्रोल रूम में रिजर्व पुलिस बल भी रखा गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार किसी भी सूचना पर क्विक रिस्पांस टीम मात्र ढाई मिनट में मौके पर पहुंच जाएगी। पूरे शहर को पांच जोन और कई सुरक्षा लेयर में बांटा गया है, ताकि हर गतिविधि पर प्रशासन की नजर बनी रहे।
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धारा 163 लागू, होटल संचालकों को निर्देश
कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने जिलेभर में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। प्रशासन ने होटल और लॉज संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे आने वाले लोगों का रिकॉर्ड रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। यह आदेश 5 जून 2026 तक प्रभावशील रहेगा।
सभी पक्षों ने की शांति बनाए रखने की अपील
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने वीडियो जारी कर सभी समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी को न्यायपालिका पर भरोसा रखना चाहिए और जो भी फैसला आए उसे स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने धार एसपी से कानून व्यवस्था बनाए रखने का अनुरोध भी किया है। मामले में पैरवी कर रहे अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और अधिवक्ता विनय जोशी ने भी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
हिंदू पक्ष ने रखे ये तर्क
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट में कहा कि भोजशाला पर प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट लागू नहीं होता। उन्होंने 7 अप्रैल 2003 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा जारी आदेश को निरस्त करने की मांग की। हिंदू पक्ष का कहना है कि भोजशाला का नाम प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम 1951 की सूची में दर्ज है। सुनवाई के दौरान कोर्ट से आग्रह किया गया कि भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय कर इसे पूरी तरह हिंदू समाज को सौंपा जाए, ताकि यहां वर्षभर मां सरस्वती की पूजा और हवन हो सके। हिंदू पक्ष ने दावा किया कि परिसर की दीवारों पर संस्कृत के श्लोक अंकित हैं। खंभों और नक्काशी में कमल, शंख और चक्र जैसे हिंदू वास्तुकला के स्पष्ट चिन्ह दिखाई देते हैं। उनका यह भी कहना है कि यहां देवी सरस्वती की प्रतिमा थी, जो वर्तमान में लंदन के संग्रहालय में रखी हुई है।
मुस्लिम पक्ष ने एएसआई सर्वे पर उठाए सवाल
कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने एएसआई सर्वे रिपोर्ट पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सर्वे की वीडियोग्राफी स्पष्ट नहीं थी और रंगीन तस्वीरें भी उपलब्ध नहीं कराई गईं। उन्होंने अयोध्या फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां रामलला की स्थापित मूर्ति मौजूद थी, जबकि भोजशाला में कोई स्थापित मूर्ति नहीं है। मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि विवादित स्थल का धार्मिक स्वरूप तय करने का अधिकार सिविल कोर्ट को है, जबकि हाईकोर्ट अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका पर सुनवाई कर रहा है। मुस्लिम पक्ष ने यह भी कहा कि यह स्थल सदियों से मस्जिद रहा है, जहां लगातार नमाज अदा की जाती रही है। उनका दावा है कि यह परिसर कमाल मौला की दरगाह से जुड़ा हुआ है और वर्ष 2003 से पहले की यथास्थिति बनाए रखी जानी चाहिए।
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