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गोदाम बना कबाड़खाना: 5800 मीट्रिक टन अमानक चावल गोदामों में डंप, सात नोटिस भी बेअसर; डिंडोरी में अनदेखी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डिंडोरी
Published by: डिंडोरी ब्यूरो
Updated Thu, 29 Jan 2026 05:27 PM IST
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सार
Dindori: डिंडौरी जिले के सरकारी गोदामों में 5800 मीट्रिक टन अमानक चावल जमा होने का मामला सामने आया है। सात नोटिस के बावजूद अधिकांश राइस मिलर्स ने सुधार नहीं किया। कलेक्टर ने सख्त कार्रवाई की अनुशंसा की है। पढ़ें पूरी खबर
राशन को लेकर बड़ी लापरवाही
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
डिंडौरी जिले में सरकारी और निजी गोदामों में रखे राशन को लेकर बड़ी लापरवाही और मनमानी सामने आई है। वर्ष 2023-24 के दौरान राइस मिलर्स द्वारा करीब 5800 मीट्रिक टन अमानक चावल सरकारी गोदामों में जमा करा दिया गया, जिसे जांच में फेल घोषित किया गया। हैरानी की बात यह है कि विभाग द्वारा सात बार नोटिस जारी करने के बावजूद अधिकांश मिलर्स ने न तो चावल बदला और न ही उसकी गुणवत्ता सुधारने की कोई पहल की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने मध्य प्रदेश सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन के भोपाल स्थित महाप्रबंधक को पत्र लिखकर दोषी मिलर्स पर सख्त कार्रवाई की अनुशंसा की है। जानकारी के मुताबिक खनूजा, लक्ष्मी अग्रवाल, मां नर्मदा और मेकल सुता जैसे बड़े गोदामों में रखा चावल गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। विभाग ने 21 नवंबर 2025 को बैठक आयोजित कर मिलर्स को अपने खर्च पर चावल बदलने के स्पष्ट निर्देश दिए थे।
इसके बावजूद भारत राइस मिल, बजरंग राइस मिल, वाहे गुरु और मां नर्मदा राइस मिल सहित कई मिलर्स ने विभागीय आदेशों की अनदेखी की। मिलिंग नीति के तहत यदि चावल अमानक पाया जाता है तो संबंधित मिल पर मिलिंग राशि का चार गुना जुर्माना और तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान है, लेकिन अब तक इस नियम का सख्ती से पालन नहीं हो सका है।
पढे़ं: काल बन गई पानी की बाल्टी: भोपाल में 10 महीने की बच्ची खेलते-खेलते गिरी, मां किचन में थी; थम गई मासूम की सांस
इधर जिले के गोदामों में रखा अन्य राशन भी बर्बादी का शिकार हो रहा है। निगावानी गोदाम में जांच के दौरान लगभग 1600 क्विंटल गेहूं खराब पाया गया। इसके अलावा वर्ष 2018-19 की मसूर दाल और कोरोना काल में गरीबों के लिए आया चना व अन्य दालें भी सड़ चुकी हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस बर्बादी की जानकारी कई बार भोपाल के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जा चुकी है।
इस पूरे मामले पर भाजपा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि जब घटिया चावल जमा किया गया, तब गुणवत्ता जांच करने वाले अधिकारी अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं निभा रहे थे। मामले के प्रभारी अधिकारी और डिप्टी कलेक्टर वैद्यनाथ वासनिक ने बताया कि भोपाल की निरीक्षण टीम ने गड़बड़ी उजागर की है। सात नोटिस के बाद केवल दो मिलर्स ही चावल सुधारने को तैयार हुए हैं, शेष के खिलाफ कार्रवाई के लिए रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी गई है।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने मध्य प्रदेश सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन के भोपाल स्थित महाप्रबंधक को पत्र लिखकर दोषी मिलर्स पर सख्त कार्रवाई की अनुशंसा की है। जानकारी के मुताबिक खनूजा, लक्ष्मी अग्रवाल, मां नर्मदा और मेकल सुता जैसे बड़े गोदामों में रखा चावल गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। विभाग ने 21 नवंबर 2025 को बैठक आयोजित कर मिलर्स को अपने खर्च पर चावल बदलने के स्पष्ट निर्देश दिए थे।
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इसके बावजूद भारत राइस मिल, बजरंग राइस मिल, वाहे गुरु और मां नर्मदा राइस मिल सहित कई मिलर्स ने विभागीय आदेशों की अनदेखी की। मिलिंग नीति के तहत यदि चावल अमानक पाया जाता है तो संबंधित मिल पर मिलिंग राशि का चार गुना जुर्माना और तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान है, लेकिन अब तक इस नियम का सख्ती से पालन नहीं हो सका है।
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इधर जिले के गोदामों में रखा अन्य राशन भी बर्बादी का शिकार हो रहा है। निगावानी गोदाम में जांच के दौरान लगभग 1600 क्विंटल गेहूं खराब पाया गया। इसके अलावा वर्ष 2018-19 की मसूर दाल और कोरोना काल में गरीबों के लिए आया चना व अन्य दालें भी सड़ चुकी हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस बर्बादी की जानकारी कई बार भोपाल के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जा चुकी है।
इस पूरे मामले पर भाजपा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि जब घटिया चावल जमा किया गया, तब गुणवत्ता जांच करने वाले अधिकारी अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं निभा रहे थे। मामले के प्रभारी अधिकारी और डिप्टी कलेक्टर वैद्यनाथ वासनिक ने बताया कि भोपाल की निरीक्षण टीम ने गड़बड़ी उजागर की है। सात नोटिस के बाद केवल दो मिलर्स ही चावल सुधारने को तैयार हुए हैं, शेष के खिलाफ कार्रवाई के लिए रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी गई है।
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