फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Gwalior News ›   Diwali 2025: Gwalior's Painting Art is Splendid, Diwali Festival Incomplete Without Lakshmi's Hand Panne

Diwali 2025: ग्वालियर की चितेरा कला की शोभा, दीपावली त्योहार लक्ष्मी हाथ पन्ने के बिना अधूरा; देशभर में मांग

Mon, 20 Oct 2025 06:14 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Mon, 20 Oct 2025 06:14 PM IST
सार

Diwali 2025 Gwalior: ग्वालियर के चितेरा समाज द्वारा बनाए गए हाथ के पूजा पन्ने दीपावली की खास पहचान हैं। प्राकृतिक रंग और गंगाजल से बने ये पन्ने लक्ष्मी नारायण सहित 11 देवताओं को दर्शाते हैं और पूरे देश में मांग में रहते हैं।
 

विज्ञापन
Diwali 2025: Gwalior's Painting Art is Splendid, Diwali Festival Incomplete Without Lakshmi's Hand Panne
अधूरा है लक्ष्मी जी के हाथ के पन्ने के बिना दिवाली त्योहार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दीपावली का त्योहार ग्वालियर में बने विशेष पूजा पन्ने के बिना अधूरा माना जाता है। यह पन्ना प्राकृतिक रंगों और गंगाजल से तैयार किया जाता है, जिसमें लक्ष्मी नारायण समेत कुल 11 देवताओं का चित्रण होता है। ग्वालियर के चितेरा समाज द्वारा हाथ से बनाए जाने वाले इस पन्ने में शुद्धता और कलात्मकता का विशेष ध्यान रखा जाता है।

विज्ञापन

 
चितेरा समाज की कला और परंपरा
चितेरा समाज की यह परंपरा पांचवीं पीढ़ी तक चली आ रही है। परिवारों का कहना है कि उनके पूर्वजों को चित्रकला के लिए सिंधिया स्टेट के महाराज महाराष्ट्र से लाकर ग्वालियर में बसाया था। तब से लेकर अब तक यह कला समाज में जिंदा है और दीपावली के अवसर पर पूजा पन्ने का उत्पादन पूरे देश में होता है।
विज्ञापन

 
देशभर में बढ़ती मांग
दीपावली से पहले ही महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली सहित अन्य राज्यों से पूजा पन्ने की भारी मांग होती है। इसकी कीमत 100 से 5000 रुपये तक होती है। मांग को पूरा करने के लिए चितेरा समाज पूरे साल तैयारियों में जुटा रहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढ़ें- दीपावली पर विशेष: सागर का 300 साल पुराना महालक्ष्मी मंदिर, जो सिर्फ दशहरे और दीपावली पर ही खुलता है

 
समय और मेहनत की कहानी
पूजा पन्ने बनाने की तैयारी आठ महीने पहले से शुरू कर दी जाती है। हाथ से बने पन्नों में कलाकारी और शुद्धता बनाए रखने में समय लगता है। एक परिवार साल भर में लगभग 1500 से 2000 पन्ने ही बना पाता है। छोटे पन्नों को बनाने में अधिक मेहनत और समय लगता है, इसलिए उनकी संख्या कम होती है।
 
ग्वालियर की पहचान और विरासत
ग्वालियर के चितेरा समाज की यह कला केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखती, बल्कि यह शहर और समाज की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा भी है। हर साल यह पन्ना दीपावली के समय पूजा का अनिवार्य हिस्सा बनता है और इसे प्राप्त करना पूरे देश में शुभ और मांगलिक माना जाता है।


यह भी पढ़ें- होलकर रियासत की दिवाली: राजवाड़े के सामने मैदान में शक्ति प्रदर्शन करती थी सेना, राजा करते थे इत्रपान का आयोजन

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed