Diwali 2025: ग्वालियर की चितेरा कला की शोभा, दीपावली त्योहार लक्ष्मी हाथ पन्ने के बिना अधूरा; देशभर में मांग
Diwali 2025 Gwalior: ग्वालियर के चितेरा समाज द्वारा बनाए गए हाथ के पूजा पन्ने दीपावली की खास पहचान हैं। प्राकृतिक रंग और गंगाजल से बने ये पन्ने लक्ष्मी नारायण सहित 11 देवताओं को दर्शाते हैं और पूरे देश में मांग में रहते हैं।
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विस्तार
दीपावली का त्योहार ग्वालियर में बने विशेष पूजा पन्ने के बिना अधूरा माना जाता है। यह पन्ना प्राकृतिक रंगों और गंगाजल से तैयार किया जाता है, जिसमें लक्ष्मी नारायण समेत कुल 11 देवताओं का चित्रण होता है। ग्वालियर के चितेरा समाज द्वारा हाथ से बनाए जाने वाले इस पन्ने में शुद्धता और कलात्मकता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
चितेरा समाज की कला और परंपरा
चितेरा समाज की यह परंपरा पांचवीं पीढ़ी तक चली आ रही है। परिवारों का कहना है कि उनके पूर्वजों को चित्रकला के लिए सिंधिया स्टेट के महाराज महाराष्ट्र से लाकर ग्वालियर में बसाया था। तब से लेकर अब तक यह कला समाज में जिंदा है और दीपावली के अवसर पर पूजा पन्ने का उत्पादन पूरे देश में होता है।
देशभर में बढ़ती मांग
दीपावली से पहले ही महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली सहित अन्य राज्यों से पूजा पन्ने की भारी मांग होती है। इसकी कीमत 100 से 5000 रुपये तक होती है। मांग को पूरा करने के लिए चितेरा समाज पूरे साल तैयारियों में जुटा रहता है।
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समय और मेहनत की कहानी
पूजा पन्ने बनाने की तैयारी आठ महीने पहले से शुरू कर दी जाती है। हाथ से बने पन्नों में कलाकारी और शुद्धता बनाए रखने में समय लगता है। एक परिवार साल भर में लगभग 1500 से 2000 पन्ने ही बना पाता है। छोटे पन्नों को बनाने में अधिक मेहनत और समय लगता है, इसलिए उनकी संख्या कम होती है।
ग्वालियर की पहचान और विरासत
ग्वालियर के चितेरा समाज की यह कला केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखती, बल्कि यह शहर और समाज की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा भी है। हर साल यह पन्ना दीपावली के समय पूजा का अनिवार्य हिस्सा बनता है और इसे प्राप्त करना पूरे देश में शुभ और मांगलिक माना जाता है।
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