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Gwalior News: अवैध खनन पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- 'कुंभकर्णी नींद' में रहे अधिकारी, एसडीएम पर अवमानना कार्रवाई
Fri, 17 Jul 2026 08:44 PM IST
ग्वालियर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
Published by: ग्वालियर ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jul 2026 08:44 PM IST
सार
ग्वालियर में अवैध खनन के मामले की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रशासनिक लापरवाही पर तीखी टिप्पणी की। अदालत ने 16 खदानों में खनन पर रोक लगाते हुए कहा कि सरकारी अधिकारी जनता के टैक्स से वेतन लेते हैं, लेकिन काम माफिया के हित में कर रहे हैं।
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ग्वालियर हाईकोर्ट
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विस्तार
जिले के बिलौआ-रफादपुर क्षेत्र में अवैध खनन और करोड़ों रुपये की रॉयल्टी एवं पेनल्टी वसूली से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की डबल बेंच ने 16 खदानों में तत्काल प्रभाव से खनन पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं। साथ ही अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए टिप्पणी की कि सरकारी अधिकारी जनता के टैक्स से वेतन लेते हैं लेकिन काम माफिया के हित में कर रहे हैं।
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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि डबरा के एसडीएम रुपेश रतन सिंघई ने बिना जमीनी जांच किए न्यायालय में भ्रामक रिपोर्ट पेश की। इसे गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए। वहीं जिले में अवैध खनन रोकने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान को सौंपी गई है। सुनवाई में यह भी सामने आया कि वर्ष 2017 में जारी करोड़ों रुपये की रॉयल्टी और पेनल्टी वसूली के नोटिस पर करीब नौ साल बाद भी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। इस पर अदालत ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि संबंधित अधिकारी 'कुंभकर्णी नींद' में रहे और कार्रवाई में अनावश्यक देरी की गई।
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सुनवाई के दौरान कलेक्टर रुचिका चौहान ने अदालत को बताया कि जिले के सभी ई-चेक पोस्ट पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। हालांकि जब अदालत ने इन कैमरों की नियमित निगरानी के बारे में पूछा तो माइनिंग अधिकारी ने स्वीकार किया कि फुटेज की नियमित मॉनिटरिंग नहीं की जाती। इस पर हाईकोर्ट ने सभी ई-चेक पोस्ट के डीवीआर और सीसीटीवी फुटेज जब्त कर सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी सीसीटीवी फुटेज के गायब होने या उसमें छेड़छाड़ की पुष्टि हुई तो इसे साक्ष्य मिटाने की साजिश माना जाएगा और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हाईकोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि करोड़ों रुपये की बकाया रॉयल्टी और पेनल्टी होने के बावजूद नो-ड्यूज प्रमाण पत्र के बिना कई खदानों की लीज का नवीनीकरण कैसे कर दिया गया। मामले की अगली सुनवाई में प्रशासन को कार्रवाई रिपोर्ट के साथ सीसीटीवी फुटेज भी अदालत के समक्ष पेश करनी होगी। हाईकोर्ट का यह आदेश प्रदेश में अवैध खनन के खिलाफ न्यायिक सख्ती का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
