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MP की सबसे बड़ी होलिका: गाय के 25 हजार गोबर के कंडों से तैयार, 70 साल से चंदा इकट्ठा करके होती है तैयार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
Published by: ग्वालियर ब्यूरो
Updated Mon, 02 Mar 2026 08:42 PM IST
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सार
ग्वालियर के सर्राफा बाजार में 70 वर्षों से 25 हजार गोबर कंडों से अंचल की सबसे बड़ी होलिका सजाई जाती है। पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ लकड़ी की जगह कंडों का उपयोग किया जाता है। रात 10 बजे पूजा के बाद होलिका दहन होगा।
ग्वालियर की होली
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विस्तार
सबसे बड़े त्योहारों में से एक होली की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। रात को होलिका का दहन होगा। इसके लिए ग्वालियर शहर के प्रमुख चौराहों और घरों में होलिका दहन की तैयारियां हो चुकी है...वही ग्वालियर चंबल अंचल की सबसे बड़ी होलिका दहन की तैयारी ग्वालियर के सर्राफा बाजार में है। करीब 25 हजार कंडों पर होलिका को बैठाया गया है जहां, इस होलिका को देखने के लिए शहर भर से लोग सराफा बाजार पहुंचते हैं।
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आपको बता दें पिछले 70 साल से सर्राफा बाजार में कारोबारियों द्वारा इस होलिका दहन का आयोजन किया जा रहा है। व्यापारियों ने बताया कि बड़ी संख्या में महिला पुरुष और बच्चे रात 10 बजे पूजा करेगे और उसके बाद होलिका दहन किया जाएगा।
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इस तरह सिर्फ गोबर के कंडों से होली तैयार कराने की वजह पूछने पर बताया गया कि जिस तरह लोग होलिका दहन के लिए लकड़ी का इस्तेमाल करते हैं जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है, क्योंकि इतनी बड़ी होली के लिए बड़ी मात्रा में लकड़ी का उपयोग करना पड़ता है। ऐसे में पेड़ काटने की बजाय विकल्प के रूप में सर्राफ़ा की होली गोबर के कंडों से तैयार की जाती है। इस तरह वे दूसरे लोगों को भी ये संदेश देना चाहते हैं। यहां पर्यावरण बचाने के लिए पेड़ों को भी बचाना है और होलिका दहन के लिए लकड़ी की जगह दूसरे विकल्पों का उपयोग करना है। इससे हमारा त्योहार भी पारंपरिक रूप से मनाया जा सके और पर्यावरण को भी कोई नुकसान ना पहुंचे।

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