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हाईकोर्ट में आया अनोखा मामला: सगी बहनों ने जताई पतियों को बदलने की इच्छा, पूरा मामला जानकर रह जाएंगे हैरान
Fri, 01 May 2026 09:39 PM IST
ग्वालियर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
Published by: ग्वालियर ब्यूरो
Updated Fri, 01 May 2026 09:39 PM IST
सार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में हैरान करने वाला मामला सामने आया है। दो सगी बहनों ने अपने पति अदला-बदली करने की इच्छा जाहिर की है। कोर्ट ने मामले में क्या फैसला दिया, पढ़िए इस खबर में-
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हाईकोर्ट में आया अनोखा मामला
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में एक अनोखा मामला सामने आया, जिसने कोर्ट रूम से लेकर आम लोगों तक को चौंका दिया। अपहरण के आरोप से शुरू हुआ मामला सुनवाई के दौरान एक पारिवारिक विवाद में बदल गया, जिसमें दो सगी बहनों ने अपने पतियों की अदला-बदली की इच्छा जाहिर कर दी।
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मामले की शुरुआत दतिया निवासी गिरिजा शंकर द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से हुई। इसमें आरोप लगाया गया कि मायाराम नामक व्यक्ति ने उसकी पत्नी और बेटी को बंधक बना रखा है। इस पर हाईकोर्ट ने पुलिस को महिला को पेश करने के निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान महिला को कोर्ट में पेश किया गया तो पूरे मामले ने मोड़ ले लिया। महिला ने कहा कि उसका अपहरण नहीं हुआ है, बल्कि वह अपनी मर्जी से मायाराम के साथ रह रही है, जो उसका सगा दामाद है। वह अपने पति से अलग होने के लिए पहले ही तलाक की अर्जी दाखिल कर चुकी है।
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मामले में तब और चौंकाने वाला मोड़ आया जब मायाराम की पत्नी ने आपत्ति नहीं जताई। उल्टा उसने कोर्ट में कहा कि अगर बड़ी बहन उसके पति के साथ रहना चाहती है, तो उसे कोई आपत्ति नहीं है। उसने भी अपने जीजा के साथ रहने की इच्छा जाहिर कर दी। दोनों बहनों ने अदालत के सामने कहा कि वे अपने वर्तमान वैवाहिक जीवन से संतुष्ट नहीं हैं। आपसी सहमति से एक-दूसरे के पति के साथ नया जीवन शुरू करना चाहती हैं। खास बात यह है कि दोनों महिलाओं के बच्चे भी हैं।
पूरे घटनाक्रम को देखते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि दोनों महिलाएं बालिग हैं और अपनी इच्छा से निर्णय ले रही हैं, इसलिए इसे अपहरण का मामला नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि यह परिवार के भीतर का आपसी विवाद है, न कि आपराधिक मामला। इसी आधार पर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज कर दिया गया। सरकारी पक्ष की ओर से एडिशनल गवर्नमेंट एडवोकेट डीके शर्मा ने बताया कि महिला ने कोर्ट में साफ कहा कि वह स्वेच्छा से अपने बहनोई के साथ रह रही है और आगे भी वहीं रहना चाहती है।
