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Dhar Bhojshala: भोजशाला मामले में रखा पक्ष- एक बार मंदिर रहा स्थल हमेशा मंदिर ही माना जाता है

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Abhishek Chendke Updated Tue, 07 Apr 2026 07:39 PM IST
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सार

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां इसे लेकर हाईकोर्ट में लगातार सुनवाई जारी है। हिंदू पक्ष की ओर से ऐतिहासिक दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर भोजशाला को मंदिर बताते हुए इसे वक्फ संपत्ति मानने से इनकार किया गया है।

Dhar Bhojs: Stand taken in Bhojshala case - A place that was once a temple will always be considered a temple.
धार भोजशाला। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्य प्रदेश के धार की चर्चित भोजशाला को लेकर मंगलवार को भी हाईकोर्ट में सुनवाई हुई और हिंदू पक्षकार के वकील विष्णु शंकर जैन ने अपने तर्क रखे। उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों और पुराने दस्तावेजों के आधार पर यह साबित करने का प्रयास किया कि भोजशाला वक्फ संपत्ति नहीं है। उन्होंने राम मंदिर मामले में हुए फैसले के तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि एक बार मंदिर रहा स्थल हमेशा मंदिर ही माना जाएगा।

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यदि मंदिर को ध्वस्त करने के प्रयास भी हुए हैं, तो भी मंदिर का चरित्र नहीं बदला जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भोजशाला में मां सरस्वती की मूर्ति भी थी, जो लंदन के संग्रहालय में है। उसे भी वापस भारत लाना चाहिए। वह मूर्ति भोजशाला के होने का अहम सबूत है।

जैन ने कहा कि भोजशाला परिसर वक्फ की संपत्ति नहीं है। इसके लिए उन्होंने 2025 के वक्फ कानून का भी हवाला दिया। ऐतिहासिक दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए यह तर्क दिए गए कि भोजशाला में संस्कृति पढ़ाई जाती थी। वहां के शिलालेखों में संस्कृत श्लोक और वेद की ऋचाएं अंकित हैं। भोजशाला में वर्ष 1939 के बाद अवैध कब्जे होने लगे और वहां नमाज पढ़ी जाने लगी। याचिकाकर्ता ने हिंदू समाज को बिना प्रतिबंध 24 घंटे भोजशाला में पूजा-अर्चना करने का अधिकार देने की बात कही। अब इस मामले में बुधवार को फिर दोपहर ढाई बजे से सुनवाई होगी।

भोजशाला मिस्ट्री नहीं, हिस्ट्री है
याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने कहा कि मुस्लिम समाज द्वारा अक्सर कहा जाता है कि धार में भोजशाला मिस्ट्री है, लेकिन हमारा कहना है कि वह राजा भोज की हिस्ट्री है और यह साबित हो रहा है। भोजशाला में अवैध कब्जे किए गए और बेवजह हक जताया गया।

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