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Indore : विद्यागुरु धाम- 40 साल पहले 2 विद्यार्थियों से शुरू हुई थी गुरु-शिष्य परंपरा,अब 150 नए विद्यार्थी

Indore bureau इंदौर ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jul 2024 01:15 PM IST
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indorai : vidyaadhaam- 40 saal pahale 2 vidyaarthiyon se shuroo huee thee guru-shishy parampara,har saal 150 nae vidyaarthee
श्री श्री विद्याधाम में बटुक
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एरोड्रम रोड स्थित श्रीश्री विद्याधाम। यहां गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वाह आज भी वैसे ही किया जा रहा है, जैसा ऋषि-मुनियों के आश्रम, गुरुकुल में होता था। मस्तक पर तिलक लगाए बटुक धोती-कुर्ते, दुपट्टा डाले, मंत्रोच्चार करते नजर आएंगे। काशी या दक्षिण भारत के विद्वानों की तरह इनकी अलग ही पहचान दिखाई देगी। 80 के दशक में महामंडलेश्वर गिरिजानंद सरस्वती (भगवन्) जब एयरपोर्ट रोड स्थित वर्तमान आश्रम में आए थे, तब यहां दो बटुक पं. राजेश शर्मा और पं. चिंतामण को गुरु परंपरा से अध्यापन शुरू करवाया था।


तब यह आश्रम नहीं था, वर्तमान मंदिर के आगे की गुरुकुल की शुरुआत की गई थी। 



वर्ष 1995 में श्रीश्री विद्याधाम मंदिर में राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी भगवती मां पराम्बा की स्थापना की गई। धीरे-धीरे विद्याधाम में बटुकों की संख्या बढ़ती गई। अब आश्रम के वर्तमान महामंडलेश्वर चिन्मयानंद सरस्वती महाराज के सान्निध्य में बटुक गुरु परंपरा से अध्ययन कर रहे हैं। हर साल 150 बटुक प्रवेश लेते हैं। 9 से 12 साल तक यहां रहकर गुरु परंपरा के अनुसार अध्ययन करते हैं। अब तक करीब पांच हजार से ज्यादा विद्यार्थी पढ़कर निकल चुके हैं। यहां के विद्यार्थी अलग-अलग शहरों में मंदिर, मठ पर पूजन-पाठ, हवन, यज्ञ कर रहे हैं। कई छात्र अमेरिका, लंदन में भी हैं।
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सुबह 4.30 बजे से शुरू होती है दिनचर्या, रात 8.30 बजे विश्राम


बटुकों की दिनचर्या सुबह 4.30 बजे से शुरू होती है। स्नान आदि के बाद बटुक सुबह 5.30 बजे से गायत्री साधना, फिर सूर्य साधना करते हैं। चाय-नाश्ता के बाद अध्ययन शुरू होता है, जो दोपहर तक चलता है। भोजन के बाद दोपहर में विश्राम। शाम को फिर अध्ययन, पूजन के बाद रात्रि में भोजन और 8.30 बजे विश्राम होता है। 
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भोजन, आवास आदि सभी कुछ बटुकों के लिए नि:शुल्क है। बटुकों को नए वस्त्र भी आश्रम से ही दिए जाते हैं। सभी बटुकों के रहने के लिए अलग से आवास की व्यवस्था की गई है। हर काम का समय तय है। एक मिनट भी बटुक लेट नहीं होते हैं।


पहली बैच से ली शिक्षा, अब करवा रहे अध्ययन


पहली बैच में शिक्षा लेने वाले पं. राजेश शर्मा अब आश्रम में रहकर बटुकों को कर्मकांड आदि की शिक्षा दे रहे हैं। आश्रम के सारे अनुष्ठान चिन्मयानंद सरस्वती के सान्निध्य और पं. शर्मा के आचार्यत्व में होते हैं। गुरु पूर्णिमा के लिए भी आश्रम में खास तैयारी की गई है। सुबह से अनुष्ठान होगा। सैकड़ों भक्त शामिल होंगे। इधर, आश्रम में सालभर के सारे तीज-त्योहार शास्त्रोक्त पद्धति से मनाए जाते हैं। यहां नक्षत्रों के हिसाब से पौधे भी लगाए गए हैं।

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