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Indore News: हनीट्रैप में एटीएस की एंट्री, रेशू के प्रेमी से भी पूछताछ, आरोपियों की आज कोर्ट में पेशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Mon, 25 May 2026 12:22 PM IST
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सार
इंदौर के बहुचर्चित हनीट्रैप मामले में एटीएस ने मुख्य आरोपित रेशू चौधरी का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। साइबर विशेषज्ञ अब इस फोन से फॉरवर्ड किए गए आपत्तिजनक डेटा को रिकवर करने में जुटे हैं, जबकि रेशू का ब्वॉयफ्रेंड शुभम भी जांच के दायरे में आ गया है।
रेशू और श्वेता जैन।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
इंदौर में बहुचर्चित हनीट्रैप मामले की जांच में अब एक बड़ा मोड़ सामने आया है, जहां आतंकवाद विरोधी दस्ते यानी एटीएस की इस पूरे प्रकरण में एंट्री हो चुकी है। विशेष जांच दल के पहुंचने से पहले ही एटीएस की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपित रेशू चौधरी के घर पर दबिश दी और उस मोबाइल फोन को अपने कब्जे में ले लिया, जिसका उपयोग आपत्तिजनक फोटो और डेटा को अलग-अलग जगहों पर भेजने के लिए किया गया था।
वर्तमान में साइबर विशेषज्ञों की एक विशेष टीम इस मोबाइल से फॉरवर्ड किए गए तमाम संवेदनशील डेटा और तस्वीरों को रिकवर करने के प्रयास में जुटी हुई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह डेटा किन-किन लोगों तक पहुंचाया गया था। इस पूरी कार्रवाई के बीच रेशू का ब्वॉयफ्रेंड शुभम भी अब पुलिस और जांच एजेंसियों के रडार पर आ चुका है, जिससे इस मामले में उसकी संलिप्तता की गहराई से जांच की जा रही है। इस बीच, गिरफ्तार किए गए सभी आरोपितों की पुलिस रिमांड की अवधि सोमवार को समाप्त हो रही है, जिसके चलते पुलिस अपनी जांच को अंतिम रूप देने में लगी है।
मकरोनिया में दबिश
अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त राजेश त्रिपाठी द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल को सागर जिले के मकरोनिया स्थित रेशू चौधरी के पैतृक निवास पर भेजा गया था। वहां पहुंची पुलिस टीम ने उसके परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों से रेशू की गतिविधियों तथा उसके संपर्कों के बारे में काफी बारीकी से पूछताछ की है। जांच में यह बात भी सामने आई है कि रेशू का भाई अभिलाष मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में ही कार्यरत है, जिसे उसके पिता के आकस्मिक निधन के बाद अनुकंपा के आधार पर यह शासकीय नियुक्ति मिली थी। इसके अलावा रेशू की पृष्ठभूमि खंगालने पर पता चला है कि उसकी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा मस्कट यानी ओमान में संपन्न हुई थी। विदेश से लौटने के बाद साल 2018 में उसका विवाह रायपुर के शिवाजी पार्क निवासी महेंद्र नामक युवक के साथ हुआ था, लेकिन वैचारिक मतभेदों के कारण शादी के महज तीन महीने के भीतर ही दोनों एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हो गए थे।
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ब्वॉयफ्रेंड शुभम की भूमिका
ससुराल से अलग होने के बाद रेशू ने अपने पति महेंद्र, ससुर प्यारेलाल और सास गीता के खिलाफ प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाते हुए न्यायालय में एक मुकदमा दर्ज करा दिया था। पुलिस की टीम ने जब उसके पैतृक गांव और आसपास के लोगों से पूछताछ की, तो यह तथ्य उजागर हुआ कि रेशू अक्सर अपने ब्वॉयफ्रेंड शुभम के साथ ही इंदौर और भोपाल जैसे बड़े शहरों में आया-जाया करती थी। शुभम मुख्य रूप से खेती-किसानी का काम संभालता है और जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि उसे रेशू की संदिग्ध गतिविधियों और उसके कारनामों की पूरी जानकारी पहले से थी। रेशू इस मामले की अन्य आरोपित श्वेता के पास भी शुभम के साथ ही मिलने पहुंचती थी, जिसके कारण पुलिस ने शुभम को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। दूसरी तरफ, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इंटेलिजेंस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ए. साईं मनोहर ने आतंकवाद विरोधी दस्ते को भी इस जांच का हिस्सा बनाया है, जिसके बाद एटीएस की साइबर विंग डेटा की कड़ियों को जोड़ने में व्यस्त है।
न्यायालय में आरोपितों की पेशी की तैयारी
पुलिस उपायुक्त ने स्पष्ट किया है कि रिमांड अवधि के दौरान सभी गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ का दौर पूरा किया जा चुका है और उनके पास से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन तथा कार जैसी महत्वपूर्ण सामग्रियां जब्त कर ली गई हैं। इस मामले से जुड़े कुछ अन्य संदेही लोग भी पुलिस की निगरानी में हैं, जिनकी इस पूरे रैकेट में भूमिका को स्पष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मुख्य आरोपित श्वेता जैन, अलका दीक्षित, जयदीप दीक्षित, लाखन चौधरी, रेशू चौधरी, जितेंद्र पुरोहित और मामले में संलिप्त प्रधान आरक्षक विनोद शर्मा सहित कुल सात आरोपितों को सोमवार को रिमांड अवधि खत्म होने पर न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा।
वर्तमान में साइबर विशेषज्ञों की एक विशेष टीम इस मोबाइल से फॉरवर्ड किए गए तमाम संवेदनशील डेटा और तस्वीरों को रिकवर करने के प्रयास में जुटी हुई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह डेटा किन-किन लोगों तक पहुंचाया गया था। इस पूरी कार्रवाई के बीच रेशू का ब्वॉयफ्रेंड शुभम भी अब पुलिस और जांच एजेंसियों के रडार पर आ चुका है, जिससे इस मामले में उसकी संलिप्तता की गहराई से जांच की जा रही है। इस बीच, गिरफ्तार किए गए सभी आरोपितों की पुलिस रिमांड की अवधि सोमवार को समाप्त हो रही है, जिसके चलते पुलिस अपनी जांच को अंतिम रूप देने में लगी है।
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मकरोनिया में दबिश
अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त राजेश त्रिपाठी द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल को सागर जिले के मकरोनिया स्थित रेशू चौधरी के पैतृक निवास पर भेजा गया था। वहां पहुंची पुलिस टीम ने उसके परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों से रेशू की गतिविधियों तथा उसके संपर्कों के बारे में काफी बारीकी से पूछताछ की है। जांच में यह बात भी सामने आई है कि रेशू का भाई अभिलाष मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में ही कार्यरत है, जिसे उसके पिता के आकस्मिक निधन के बाद अनुकंपा के आधार पर यह शासकीय नियुक्ति मिली थी। इसके अलावा रेशू की पृष्ठभूमि खंगालने पर पता चला है कि उसकी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा मस्कट यानी ओमान में संपन्न हुई थी। विदेश से लौटने के बाद साल 2018 में उसका विवाह रायपुर के शिवाजी पार्क निवासी महेंद्र नामक युवक के साथ हुआ था, लेकिन वैचारिक मतभेदों के कारण शादी के महज तीन महीने के भीतर ही दोनों एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हो गए थे।
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ससुराल से अलग होने के बाद रेशू ने अपने पति महेंद्र, ससुर प्यारेलाल और सास गीता के खिलाफ प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाते हुए न्यायालय में एक मुकदमा दर्ज करा दिया था। पुलिस की टीम ने जब उसके पैतृक गांव और आसपास के लोगों से पूछताछ की, तो यह तथ्य उजागर हुआ कि रेशू अक्सर अपने ब्वॉयफ्रेंड शुभम के साथ ही इंदौर और भोपाल जैसे बड़े शहरों में आया-जाया करती थी। शुभम मुख्य रूप से खेती-किसानी का काम संभालता है और जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि उसे रेशू की संदिग्ध गतिविधियों और उसके कारनामों की पूरी जानकारी पहले से थी। रेशू इस मामले की अन्य आरोपित श्वेता के पास भी शुभम के साथ ही मिलने पहुंचती थी, जिसके कारण पुलिस ने शुभम को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। दूसरी तरफ, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इंटेलिजेंस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ए. साईं मनोहर ने आतंकवाद विरोधी दस्ते को भी इस जांच का हिस्सा बनाया है, जिसके बाद एटीएस की साइबर विंग डेटा की कड़ियों को जोड़ने में व्यस्त है।
न्यायालय में आरोपितों की पेशी की तैयारी
पुलिस उपायुक्त ने स्पष्ट किया है कि रिमांड अवधि के दौरान सभी गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ का दौर पूरा किया जा चुका है और उनके पास से घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन तथा कार जैसी महत्वपूर्ण सामग्रियां जब्त कर ली गई हैं। इस मामले से जुड़े कुछ अन्य संदेही लोग भी पुलिस की निगरानी में हैं, जिनकी इस पूरे रैकेट में भूमिका को स्पष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मुख्य आरोपित श्वेता जैन, अलका दीक्षित, जयदीप दीक्षित, लाखन चौधरी, रेशू चौधरी, जितेंद्र पुरोहित और मामले में संलिप्त प्रधान आरक्षक विनोद शर्मा सहित कुल सात आरोपितों को सोमवार को रिमांड अवधि खत्म होने पर न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा।

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