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Indore News: बिना सीखे बनाई ऐसी शानदार पेंटिंग्स, इंदौर की कलाकार ने कई भारतीय शैलियों को एक मंच पर संजोया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Sat, 02 May 2026 09:02 PM IST
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सार
Indore News: कलाकार प्रीति पटेल और उनकी सुपुत्री आरल द्वारा तैयार प्रदर्शनी में 85 कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं, जिनमें वारली, मधुबनी और गोंड जैसी भारतीय शैलियों का समावेश है।
कलाकार प्रीति पटेल ने दर्शकों को विभिन्न आर्ट की जानकारी दी।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
इंदौर के कला प्रेमियों के लिए एक विशेष आयोजन के रूप में छत्रप्रीत कला प्रदर्शनी का शुभारंभ प्रीतमलाल दुआ सभागृह, रीगल चौराहा पर हुआ। 2 और 3 मई को आयोजित होने वाली इस प्रदर्शनी का समय सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक रखा गया है। इस आयोजन में विभिन्न श्रेणियों की कुल 85 पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई हैं जो दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। यह प्रदर्शनी रविवार 3 मई को संपन्न होगी।
विभिन्न भारतीय शैलियों का अनूठा संगम
इस प्रदर्शनी की सबसे बड़ी विशेषता एक ही मंच पर भारतीय कला की विविधता को समेटना है। यहां आने वाले दर्शकों को वारली, मधुबनी, गोंड, लिप्पन, मोजेक और मंडला जैसी पारंपरिक भारतीय कला शैलियों की शानदार झलक देखने को मिल रही है। कलाकार प्रीति पटेल द्वारा तैयार की गई ये कृतियां कला के प्रति उनके गहरे समर्पण को उजागर करती हैं। पिछले 10 वर्षों के अपने सफर में उन्होंने बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के ग्लास, ऐक्रेलिक, चारकोल, पेंसिल, सॉफ्ट पेस्टल, ऑयल पेस्टल, क्ले और रेजिन जैसे माध्यमों का कुशलतापूर्वक प्रयोग किया है।
भावनाओं और यादों का जीवंत प्रस्तुतीकरण
कलाकार प्रीति पटेल के अनुसार छत्रप्रीत केवल रंगों का मेल नहीं है बल्कि यह उनकी भावनाओं और यादों की एक जीवंत प्रस्तुति है। यहां प्रदर्शित हर पेंटिंग अपनी एक अलग कहानी कहती है। इन कृतियों में कहीं भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अटूट भक्ति नजर आती है, तो कहीं शेर की शक्ति का अहसास होता है। इसके अलावा गौधूली की शांति और राजसी महलों के वैभव को भी कैनवास पर बहुत खूबसूरती से उकेरा गया है।
नई पीढ़ी की रचनात्मकता और भावपूर्ण समर्पण ने प्रभावित किया
प्रदर्शनी में कलाकार की 10 वर्षीय बेटी आरल ने भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। आरल द्वारा तैयार की गई पेंटिंग्स और हस्तनिर्मित मोमबत्तियों का संग्रह नई पीढ़ी के कलात्मक झुकाव को प्रदर्शित करता है। प्रदर्शनी का नाम छत्रप्रीत भी काफी अर्थपूर्ण है जिसमें छत्र मार्गदर्शन और प्रीत प्रेम का प्रतीक है। प्रीति पटेल ने अपनी इस संपूर्ण कला यात्रा और प्रदर्शनी को अपने स्वर्गीय पिता की याद में एक श्रद्धांजलि के रूप में समर्पित किया है। सभी नागरिकों और विद्यार्थियों के लिए यह प्रदर्शनी पूरी तरह निशुल्क रखी गई है।
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विभिन्न भारतीय शैलियों का अनूठा संगम
इस प्रदर्शनी की सबसे बड़ी विशेषता एक ही मंच पर भारतीय कला की विविधता को समेटना है। यहां आने वाले दर्शकों को वारली, मधुबनी, गोंड, लिप्पन, मोजेक और मंडला जैसी पारंपरिक भारतीय कला शैलियों की शानदार झलक देखने को मिल रही है। कलाकार प्रीति पटेल द्वारा तैयार की गई ये कृतियां कला के प्रति उनके गहरे समर्पण को उजागर करती हैं। पिछले 10 वर्षों के अपने सफर में उन्होंने बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के ग्लास, ऐक्रेलिक, चारकोल, पेंसिल, सॉफ्ट पेस्टल, ऑयल पेस्टल, क्ले और रेजिन जैसे माध्यमों का कुशलतापूर्वक प्रयोग किया है।
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भावनाओं और यादों का जीवंत प्रस्तुतीकरण
कलाकार प्रीति पटेल के अनुसार छत्रप्रीत केवल रंगों का मेल नहीं है बल्कि यह उनकी भावनाओं और यादों की एक जीवंत प्रस्तुति है। यहां प्रदर्शित हर पेंटिंग अपनी एक अलग कहानी कहती है। इन कृतियों में कहीं भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अटूट भक्ति नजर आती है, तो कहीं शेर की शक्ति का अहसास होता है। इसके अलावा गौधूली की शांति और राजसी महलों के वैभव को भी कैनवास पर बहुत खूबसूरती से उकेरा गया है।
नई पीढ़ी की रचनात्मकता और भावपूर्ण समर्पण ने प्रभावित किया
प्रदर्शनी में कलाकार की 10 वर्षीय बेटी आरल ने भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। आरल द्वारा तैयार की गई पेंटिंग्स और हस्तनिर्मित मोमबत्तियों का संग्रह नई पीढ़ी के कलात्मक झुकाव को प्रदर्शित करता है। प्रदर्शनी का नाम छत्रप्रीत भी काफी अर्थपूर्ण है जिसमें छत्र मार्गदर्शन और प्रीत प्रेम का प्रतीक है। प्रीति पटेल ने अपनी इस संपूर्ण कला यात्रा और प्रदर्शनी को अपने स्वर्गीय पिता की याद में एक श्रद्धांजलि के रूप में समर्पित किया है। सभी नागरिकों और विद्यार्थियों के लिए यह प्रदर्शनी पूरी तरह निशुल्क रखी गई है।
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