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Indore News: अब परिंदा भी नहीं मार पाएगा पर, जेल की दीवारों पर दौड़ेगा करंट, 18 करोड़ होंगे खर्च
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Mon, 04 May 2026 06:57 AM IST
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सार
Indore News: प्रदेश की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था को हाईटेक करते हुए 18 करोड़ की लागत से इलेक्ट्रिक फेंसिंग लगाई जा रही है। इंदौर सहित 14 जेलों में यह सिस्टम शुरू हो चुका है, जिससे दीवार फांदने पर कैदियों को झटका लगेगा और अलार्म बज जाएगा।
जेल डीजी वरुण कपूर
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
इंदौर में जेल ब्रेक की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब जेलों की बाउंड्रीवॉल पर इलेक्ट्रिक फेंसिंग लगाई जा रही है। जेल विभाग इस पूरी परियोजना पर 18 करोड़ रुपए की राशि खर्च कर रहा है। इस तकनीक का उद्देश्य जेल की दीवार फांदकर भागने की कोशिश करने वाले कैदियों को रोकना है। वर्तमान में इंदौर सहित 14 जेलों में इसका इस्तेमाल शुरू किया जा चुका है। कई साल पहले भोपाल सेंट्रल जेल से सिमी के आठ कैदियों के फरार होने और हेड कॉन्स्टेबल की हत्या जैसी वारदातों के बाद सुरक्षा को लेकर प्रदेश की जेलों में यह उपाय किए जा रहे हैं।
अलार्म सिस्टम से होगी निगरानी
जेल डीजी वरुण कपूर ने कहा कि इंदौर सहित अन्य जेलों में यह काम किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, जिन 14 स्थानों पर यह प्रयोग हुआ है, वहां इसके परिणाम सकारात्मक रहे हैं। यह फेंसिंग इस तरह डिजाइन की गई है कि दीवार को नुकसान पहुंचाने या फांदने पर झटका लगने के साथ-साथ कंट्रोल रूम में अलार्म बज उठेगा। हालांकि, एक तरफ जहां जेलों को हाईटेक बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जेलों के भीतर रसूखदार कैदियों को मिलने वाली सुविधाओं जैसी अनियमितताओं की चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।
बिजली का झटका लगेगा
यदि कोई कैदी दीवार फांदने का प्रयास करता है, तो उसे बिजली का हल्का झटका लगेगा और तत्काल अलार्म सिस्टम सक्रिय हो जाएगा। इससे जेल प्रहरी तुरंत सतर्क हो जाएंगे। वर्तमान में प्रदेश की 133 जेलों (जिसमें 11 सेंट्रल जेल, जिला जेल और सब-जेल शामिल हैं) में क्षमता से अधिक, लगभग 42 हजार कैदी बंद हैं। इंदौर सहित 14 जेलों में इसका प्रायोगिक इस्तेमाल शुरू किया जा चुका है।
हाईटेक हो रही हैं जेलें
सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए न केवल फेंसिंग बल्कि अन्य तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है। कैदियों की अदालतों में पेशी अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराई जा रही है ताकि उन्हें लाने-ले जाने का जोखिम खत्म हो सके। इंदौर की सेंट्रल जेल में क्षमता से अधिक कैदी होने के कारण सांवेर रोड पर नई जेल का निर्माण भी जारी है। वित्त विभाग से मंजूर 18 करोड़ रुपए की राशि के उपयोग की निगरानी के लिए एक समिति भी गठित की गई है।
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अलार्म सिस्टम से होगी निगरानी
जेल डीजी वरुण कपूर ने कहा कि इंदौर सहित अन्य जेलों में यह काम किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, जिन 14 स्थानों पर यह प्रयोग हुआ है, वहां इसके परिणाम सकारात्मक रहे हैं। यह फेंसिंग इस तरह डिजाइन की गई है कि दीवार को नुकसान पहुंचाने या फांदने पर झटका लगने के साथ-साथ कंट्रोल रूम में अलार्म बज उठेगा। हालांकि, एक तरफ जहां जेलों को हाईटेक बनाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जेलों के भीतर रसूखदार कैदियों को मिलने वाली सुविधाओं जैसी अनियमितताओं की चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।
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बिजली का झटका लगेगा
यदि कोई कैदी दीवार फांदने का प्रयास करता है, तो उसे बिजली का हल्का झटका लगेगा और तत्काल अलार्म सिस्टम सक्रिय हो जाएगा। इससे जेल प्रहरी तुरंत सतर्क हो जाएंगे। वर्तमान में प्रदेश की 133 जेलों (जिसमें 11 सेंट्रल जेल, जिला जेल और सब-जेल शामिल हैं) में क्षमता से अधिक, लगभग 42 हजार कैदी बंद हैं। इंदौर सहित 14 जेलों में इसका प्रायोगिक इस्तेमाल शुरू किया जा चुका है।
हाईटेक हो रही हैं जेलें
सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए न केवल फेंसिंग बल्कि अन्य तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है। कैदियों की अदालतों में पेशी अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कराई जा रही है ताकि उन्हें लाने-ले जाने का जोखिम खत्म हो सके। इंदौर की सेंट्रल जेल में क्षमता से अधिक कैदी होने के कारण सांवेर रोड पर नई जेल का निर्माण भी जारी है। वित्त विभाग से मंजूर 18 करोड़ रुपए की राशि के उपयोग की निगरानी के लिए एक समिति भी गठित की गई है।

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