सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त

Indore Water Crisis: इंदौर में गहराया जलसंकट, कॉलोनियों से लेकर बस्तियों तक होता है पानी के टैंकरों का इंतजार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Dinesh Sharma Updated Mon, 04 May 2026 06:31 AM IST
सार

इंदौर में भीषण जलसंकट से लोग सुबह 4 बजे से कतारों में लगकर पानी भर रहे हैं। टैंकरों पर खर्च बढ़ा, बोरिंग सूख गए। कारणों में गिरता भूजल, लीकेज, तालाबों का सिमटना शामिल हैं। महापौर ने टैंकर बढ़ाने और विशेषज्ञों ने वर्षा जल संचयन को समाधान बताया।

विज्ञापन
Indore faces a severe water crisis, with residents from colonies to slums awaiting water tankers.
इंदौर में जलसंकट गहराने लगा है। टैंकर आते ही भीड़ लग जाती है। - फोटो : अमर उजाला
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में जलसंकट बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। शहर के कई क्षेत्रों में लगी पानी के लिए लंबी कतारें यही दृश्य बता रही हैं। इस साल की गर्मी में हालत यह हो चुके हैं कि स्वच्छता में सात बार आसमान छूने वाले इस शहर के कई इलाकों में आज बूंद-बूंद पानी के लिए जंग छिड़ी हुई है। पॉश कॉलोनियों से लेकर निचली बस्तियों तक, दृश्य एक जैसा है... खाली डिब्बे, सूखते कंठ और पानी के टैंकर का इंतजार। लोग किराए से गाड़ियां कर रहे हैं ताकि एक बार में अधिक से अधिक पानी के बर्तन भर लें और बार—बार पानी के लिए लाइनों में न लगना पड़े। 


सुबह चार बजे से लाइन में लगते हैं
लहैया कॉलोनी में रहने वाले आनंद भमोरिया ने कहा कि सुबह 4 बजे से हमें निगम की टंकी पर पानी की लाइन में लगने आना पड़ता है। पानी भरने के बाद ही काम पर जा पाते हैं। क्षेत्र के सरकारी बोरिंग भी सूख चुके हैं। पानी भरने में हमें रोज दो घंटे लगते हैं। नर्मदा लाइन में भी पानी बहुत कम आ रहा है और सरकारी टैंकर भी नहीं आ रहे हैं। क्षेत्र के अधिकांश निजी और सार्वजनिक बोरिंग जवाब दे चुके हैं। भूजल स्तर इतनी तेजी से गिरा है कि 500-700 फीट की खुदाई के बाद भी केवल धूल निकल रही है। कई बार पानी भरने को लेकर हिंसक झड़पें भी हो जाती हैं। 

ये भी पढ़ें- Indore Water Crisis: पानी पर पहरा! आठ दिन में आते हैं टैंकर, पानी की सुरक्षा के लिए ड्रमों में लगते हैं ताले

 
Trending Videos
Indore faces a severe water crisis, with residents from colonies to slums awaiting water tankers.
इंदौर में जलसंकट पर बोले रहवासी - फोटो : अमर उजाला
दो से तीन हजार रुपये का खर्च बढ़ गया
रघुनंदन बाग में रहने वाले नानकराम ने कहा कि पानी के सरकारी टैंकर नहीं आ रहे हैं। हमारे क्षेत्र में कई जगह अभी तक नर्मदा लाइन पहुंची ही नहीं है। यहां के लोग पूरी तरह निजी टैंकरों पर या फिर नगर निगम की टंकियों पर निर्भर हैं। निगम की टंकियों पर सुबह 4 बजे से ही लोग कतारों में लग जाते हैं। मध्यम वर्गीय परिवार जो पहले बोरिंग पर निर्भर थे, अब महीने में दो से तीन हजार रुपए तक केवल टैंकरों पर खर्च करने को मजबूर हैं।

इसलिए प्यासा है इंदौर
इंदौर में योजनाबद्ध तरीके से काम की कमी भी इस जलसंकट का बड़ा कारण है। 
शहर में वाटर रिचार्जिंग के नियम तो हैं, लेकिन धरातल पर उनका पालन नहीं के बराबर है। 
बारिश का पानी जमीन में जाने के बजाय नालों में बह जाता है। 
इंदौर के ऐतिहासिक तालाब (जैसे बिलावली, सिरपुर) सिमटते जा रहे हैं, जो कभी शहर के जल स्तर को बनाए रखते थे।
नर्मदा लाइन से आने वाले पानी का एक बड़ा हिस्सा (करीब 30-40%) लीकेज और अवैध कनेक्शनों के कारण बर्बाद हो जाता है।

ये भी पढ़ें- Indore Water Crisis: दोपहर की भीषण गर्मी में पानी का संघर्ष, रिंग रोड से सटे इलाकों में रहवासियों की फजीहत

 
विज्ञापन
विज्ञापन
Indore faces a severe water crisis, with residents from colonies to slums awaiting water tankers.
इंदौर में जलसंकट पर बोले रहवासी - फोटो : अमर उजाला
महापौर बोले- टैंकरों की संख्या बढ़ाई जाएगी
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि हमने रिकॉर्ड समय में नई पेयजल टंकियां बनवाई हैं। हम अमृत योजना के तहत हर घर तक पानी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जहां पर भी परेशानी आ रही है, तुरंत पानी के टैंकर पहुंचाए जा रहे हैं। जिस तेजी से इंदौर बढ़ रहा है उसी तेजी से शहर के लिए प्लानिंग भी की जा रही है। निगम अधिकारियों को टैंकरों की संख्या भी बढ़ाने के लिए कहा है।

ये भी पढ़ें- Indore Water Crisis: इंदौर में पानी के लिए खर्च हो रहा पेट्रोल, गाड़ियों से तीन-चार किमी दूर से ढोना मजबूरी

विशेषज्ञ बोले- कैच द रैन अभियान से होगी पूर्ति 
जल प्रबंधन विशेषज्ञ सुधींद्र मोहन शर्मा ने कहा कि इंदौर को अगर भविष्य में इस संकट से बचाना है, तो केवल नर्मदा के भरोसे रहना पर्याप्त नहीं होगा। हमें कैच द रेन अभियान को गंभीरता से लेना होगा। बारिश के पानी को जितना अधिक संभालकर रखेंगे उतना ही शहर में पानी की पूर्ति करने में लाभ होगा। हर घर में वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य करने के साथ-साथ पुराने कुओं और बावड़ियों का पुनरुद्धार करना ही स्थायी समाधान है। जब प्रशासन और जनता मिलकर जल संरक्षण को अपनी प्राथमिकता बनाएंगे, तभी स्वच्छता में नंबर वन इंदौर जल आपूर्ति में भी नंबर वन बनेगा।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed