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Indore Water Crisis: पानी पर पहरा! आठ दिन में आते हैं टैंकर, पानी की सुरक्षा के लिए ड्रमों में लगते हैं ताले
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Dinesh Sharma
Updated Sun, 03 May 2026 06:45 AM IST
सार
इंदौर की अहिरखेड़ी कॉलोनी में जलसंकट गंभीर है। टैंकर 4–5 दिन में आते हैं, बोरिंग सूख चुके हैं। लोग पानी संग्रह कर ताले लगाने लगे हैं, क्योंकि चोरी के विवाद बढ़े। शहर की 100 से अधिक बस्तियां प्रभावित हैं, जहां नर्मदा लाइन न होने से समस्या और गहराई है।
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इंदौर में जलसंकट : अहिरखेड़ी में हालात बहुत खराब।
- फोटो : अमर उजाला
इंदौर में जलसंकट इतना गंभीर हो गया है कि लोग रोज सुबह काम पर जाने से पहले अपनी पानी की कोठियों पर ताला लगाना नहीं भूलते, ताकि शाम को घर लौटने पर उन्हें पानी मिल सके। यह स्थिति इंदौर की अहिरखेड़ी कॉलोनी की है। यहां नगर निगम ने 300 से अधिक गरीब परिवारों को फ्लैट बनाकर दिए हैं। सड़क चौड़ीकरण से विस्थापित हुए ये परिवार यहां रहने आ गए। उन्हें पक्की छत तो मिल गई, लेकिन अन्य सुविधाएं लगभग नहीं हैं।
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रहवासी यहां पानी की टंकियों में ताला लगाकर रखते हैं।
- फोटो : अमर उजाला
इस कॉलोनी में दो बोरिंग हैं, जिन्होंने पानी देना बंद कर दिया है। इसके अलावा एक कुआं है, जिसमें मोटर लगाकर लोग उपयोग के लिए पानी भरते हैं। अब यहां गंभीर जलसंकट है। नगर निगम के टैंकर पानी बांटने आते हैं। रहवासियों ने पानी संग्रह के लिए कोठियां और ड्रम खरीद लिए हैं। टैंकर इनमें पानी भरते हैं, जिससे लोग तीन-चार दिन तक काम चलाते हैं। लेकिन जिन परिवारों को अधिक पानी की जरूरत होती थी, वे दूसरों के ड्रम से पानी ले लेते थे, जिससे विवाद होने लगे। इसके बाद लोगों ने अपनी कोठियों और ड्रमों में ताले लगाना शुरू कर दिया।
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जलसंकट पर बोले रहवासी
- फोटो : अमर उजाला
चार-पांच दिन में आते हैं टैंकर
कॉलोनी के विशाल सेन बताते हैं कि नगर निगम ने उन्हें यहां बसाया तो, लेकिन नर्मदा लाइन की व्यवस्था नहीं की। बोरिंग इतने परिवारों के लिए पर्याप्त नहीं हैं। सालभर पानी की कमी रहती है, लेकिन गर्मियों में समस्या और बढ़ जाती है। टैंकर चार-पांच दिन में आते हैं, जिससे लोगों को पानी के लिए दिनभर भटकना पड़ता है।
ये भी पढ़ें- Indore Water Crisis: इंदौर में पानी के लिए खर्च हो रहा पेट्रोल, गाड़ियों से तीन-चार किमी दूर से ढोना मजबूरी
कॉलोनी के विशाल सेन बताते हैं कि नगर निगम ने उन्हें यहां बसाया तो, लेकिन नर्मदा लाइन की व्यवस्था नहीं की। बोरिंग इतने परिवारों के लिए पर्याप्त नहीं हैं। सालभर पानी की कमी रहती है, लेकिन गर्मियों में समस्या और बढ़ जाती है। टैंकर चार-पांच दिन में आते हैं, जिससे लोगों को पानी के लिए दिनभर भटकना पड़ता है।
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पानी की किल्लत से महिलाएं भी परेशान
- फोटो : अमर उजाला
पानी चोरी की समस्या
कॉलोनी की रेखा बाई कहती हैं कि वे टैंकर से ड्रम और कोठियां भरकर रखती थीं, लेकिन शाम को मजदूरी से लौटने पर ड्रम खाली मिलते थे। जिनके पास पानी कम होता था, वे दूसरों के ड्रम से पानी ले लेते थे। मजबूरी में अब पानी से भरी कोठियों पर ताले लगाने पड़ते हैं। इससे चोरी तो रुकी है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ है। उनका कहना है कि नगर निगम को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि लोगों को पानी चुराने की जरूरत ही न पड़े।
ये भी पढ़ें- Indore Water Crisis: दुकानें बंद कर टंकियों पर उमड़ी भीड़, तीन किमी दूर से ला रहे पानी; आधे शहर में त्राहिमाम
कॉलोनी की रेखा बाई कहती हैं कि वे टैंकर से ड्रम और कोठियां भरकर रखती थीं, लेकिन शाम को मजदूरी से लौटने पर ड्रम खाली मिलते थे। जिनके पास पानी कम होता था, वे दूसरों के ड्रम से पानी ले लेते थे। मजबूरी में अब पानी से भरी कोठियों पर ताले लगाने पड़ते हैं। इससे चोरी तो रुकी है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ है। उनका कहना है कि नगर निगम को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि लोगों को पानी चुराने की जरूरत ही न पड़े।
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इंदौर में जलसंकट
- फोटो : अमर उजाला
100 से अधिक बस्तियों में जलसंकट
शहर की 100 से अधिक बस्तियों में गंभीर जलसंकट है। सार्वजनिक नलों पर दिनभर भीड़ लगी रहती है। कई जगह गलियां इतनी संकरी हैं कि निजी बोरिंग संभव नहीं है। कुछ बस्तियों में नगर निगम ने छोटी पानी टंकियां रखी हैं। सबसे ज्यादा परेशानी उन इलाकों में है, जहां नर्मदा लाइन नहीं पहुंची है और लोग केवल बोरिंग पर निर्भर हैं।
शहर की 100 से अधिक बस्तियों में गंभीर जलसंकट है। सार्वजनिक नलों पर दिनभर भीड़ लगी रहती है। कई जगह गलियां इतनी संकरी हैं कि निजी बोरिंग संभव नहीं है। कुछ बस्तियों में नगर निगम ने छोटी पानी टंकियां रखी हैं। सबसे ज्यादा परेशानी उन इलाकों में है, जहां नर्मदा लाइन नहीं पहुंची है और लोग केवल बोरिंग पर निर्भर हैं।

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