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मणिकर्णिका घाट: देवी अहिल्याबाई प्रतिमा विवाद ने क्यों पकड़ा तूल? बनारस से लेकर मालवा तक लोगों में गुस्सा

अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर Published by: अर्जुन रिछारिया Updated Wed, 14 Jan 2026 06:54 PM IST
सार

बनारस के मणिकर्णिका घाट में विकास कार्य के दौरान मंगलवार को देवी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को तोड़ दिया गया था। इस बीच जेसीबी से करीब 300 साल पुराना घाट भी ध्वस्त कर दिया गया। जैसे ही यह जानकारी लोगों तक पहुंची। इसका विरोध शुरू हो गया। घाट पर लोगों ने विरोध किया। वहीं इंदौर में भी इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की गई। आइए जानते हैं पूरा विवाद है क्या ?

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Indore News Controversy erupts over damage to Devi Ahilyabai Holkar statue at Manikarnika Ghat in Varanasi
विकास के नाम पर मणिकर्णिका घाट में हुई तोड़फोड़ - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
बनारस के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट पर देवी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा और घाट के एक हिस्से को मंगलवार के दिन ध्वस्त किया गया।  इस घटना को लेकर इतिहासकारों और समाज के विभिन्न वर्गों में विरोध देखा जा रहा है। साथ ही सिस्टम पर कई गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं क्योंकि एक तरफ लोकमाता की त्रि-जन्म शताब्दी समारोह देशभर में मनाया जा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ बनारस से आई तस्वीरें लोकआस्था पर गहरी चोट कर रही है। 
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Indore News Controversy erupts over damage to Devi Ahilyabai Holkar statue at Manikarnika Ghat in Varanasi
मणिकर्णिका घाट पर ध्वस्तीकरण का वायरल हुआ था वीडियो - फोटो : वीडियो ग्रैब
सोशल मीडिया में वीडियो वायरल हुआ
काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वायरल वीडियो में घाट पर बुलडोजर चलता हुआ दिखाई देता है। इस वीडियो में बोला जाता है कि विकास के नाम पर विनाश हो रहा है। बताया जाता है कि कैसे मंदिर गिराए जा रहे हैं। वीडियो देखने के बाद बनारस के स्थानीय लोगों विरोध प्रदर्शन करने घाट पर पहुंच जाते हैं। 

घाट पर विरोध प्रदर्शन का देखें वीडियो: मणिकर्णिका घाट पर पाल समाज का विरोध, वायरल वीडियो से नाराजगी

कितना प्राचीन है घाट
देवी अहिल्याबाई एक न्यायप्रिय, धार्मिक और दानवीर होल्कर राजवंश की तीसरी शासिका थीं, जिनका कार्यकाल 28 वर्ष पांच माह (1767-1795) रहा। दो सौ तीस वर्ष बाद भी उनकी कार्यप्रणाली, उनके व्यक्तित्व और दानशीलता को स्मरण किया जाता है। मणिकर्णिका घाट का निर्माण देवी अहिल्याबाई होलकर द्वारा 1791 में करवाया गया था। अपनी पौराणिक मान्यता के कारण यह प्रसिद्ध 84 घाटों में शामिल है। धर्मशास्त्र का इतिहास, जिसके लेखक पांडुरंग वामन काणे हैं, के अनुसार शिव के कान की मणि इसी घाट पर किसी कुंड में गुम हुई थी, इसलिए इस घाट को मणिकर्णिका घाट के नाम से जाना जाता है। इस घाट पर शवों का दाह संस्कार होता है।
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Indore News Controversy erupts over damage to Devi Ahilyabai Holkar statue at Manikarnika Ghat in Varanasi
रिचर्ड होलकर ने घाट तोड़े जाने की निंदा की। - फोटो : अमर उजाला
खासगी ट्रस्ट ने लिखा पत्र 
मणिकर्णिका घाट को तोड़े जाने की घटना पर खासगी ट्रस्ट के अध्यक्ष  प्रिंस रिचर्ड होलकर ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए काशी प्रशासन को औपचारिक पत्र प्रेषित किया है। पत्र में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस ऐतिहासिक घाट का निर्माण लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर ने सन 1791 में कराया था, जो केवल स्थापत्य नहीं बल्कि सनातन आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। ऐसे प्राचीन और पवित्र घाट का संरक्षण किया जाना चाहिए था, किंतु इसके विपरीत उसे तोड़ दिया गया, जो अत्यंत निंदनीय है।

प्रिंस रिचर्ड होलकर ने प्रशासन से मलबे में दबी देवी अहिल्याबाई होलकर एवं शिव की प्रतिमाओं को तत्काल सुरक्षित रूप से निकालकर खासगी ट्रस्ट को सौंपने की ठोस मांग की है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट स्वयं इन प्रतिमाओं को पुनः विधिवत स्थापित कराएगा, ताकि देवी अहिल्याबाई की पवित्र गंगा की ओर नतमस्तक प्रतिमा के दर्शन पुनः तीर्थयात्रियों को हो सकें और ऐतिहासिक अन्याय का कुछ हद तक प्रायश्चित किया जा सके

पढ़ें पूरी खबर:  मणिकर्णिका घाट: होलकर राजपरिवार ने की आपत्ति, कहा- तोड़ी मूर्तियां खासगी ट्रस्ट को सौंपे
Indore News Controversy erupts over damage to Devi Ahilyabai Holkar statue at Manikarnika Ghat in Varanasi
मणिकर्णिका घाट से जुड़े मामले पर सुमित्रा महाजन की प्रतिक्रिया - फोटो : अमर उजाला
देवी अहिल्या की प्रतिमा विवाद पर सुमित्रा ताई ने क्या कहा? 
पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि उन्होंने पूरे मामले की जानकारी ली है। वाराणसी में रहने वाले लोगों से भी बातचीत की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मणिकर्णिका घाट पर विकास कार्य चल रहा था, जिसके दौरान ठेकेदार द्वारा जेसीबी मशीन का उपयोग किया गया। इसी दौरान दुर्घटनावश कुछ मूर्तियों को नुकसान पहुंचा है। सुमित्रा महाजन ने कहा कि उन्हें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पूरा विश्वास है। मणिकर्णिका घाट शवों के दाह संस्कार का प्रमुख स्थल है और वहां सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मूर्तियों को फिर से स्थापित किया जाएगा

पढ़ें पूरी खबर: णिकर्णिका घाट: देवी अहिल्या की प्रतिमा को नुकसान,सुमित्रा महाजन बोलीं- दुर्घटना है, सरकार करेगी पुनर्स्थापना

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Indore News Controversy erupts over damage to Devi Ahilyabai Holkar statue at Manikarnika Ghat in Varanasi
लोकहित की प्रतीक अहिल्याबाई की धरोहर को क्यों नहीं मिली सुरक्षा? प्रतिमा व घाट तोड़ी गई। - फोटो : अमर उजाला
बनारस के डीएम सत्येंद्र कुमार का बयान
डीएम सत्येंद्र कुमार ने बताया कि मणिकर्णिका घाट से मिलीं मूर्तियां और कलाकृतियां संरक्षित की जाएंगी। इनमें रानी अहिल्याबाई की मूर्ति भी शामिल है।  मणिकर्णिका घाट पर विकास कार्य कराया जा रहा है। इससे किसी मंदिर को नुकसान नहीं पहुंचा है। पहले चरण में सीढि़यां बनवाई जा रही हैं। खुदाई के दौरान कुछ मूर्तियां और कलाकृतियां मिली हैं। इन्हें संरक्षित कराया गया है। घाट पर निर्माण कार्य पूरा होने के बाद मूर्तियां लगवाई जाएंगी। वहीं अधिकारियों का कहना है कि दीवार पर चित्रकारी की गई थी, इनको संरक्षित किया गया है। 

पढें पूरी खबर: मणिकर्णिका से मिलीं मूर्तियां और कलाकृतियां संरक्षित, डीएम बोले- किसी मंदिर को नुकसान नहीं हुआ
बयान को सुने : मणिकर्णिका घाट पर पाल समाज का विरोध, वायरल वीडियो से नाराजगी

 


इस मुद्दे पर क्या कहते हैं इतिहासकार
प्रसिद्ध इतिहासकार और दशपुर प्राच्य शोध संस्थान के निदेशक डॉ. कैलाश चंद्र पांडेय का कहना है कि देवी अहिल्याबाई होलकर ने देशभर में लोक और जन-उपयोगी कार्य किए। देवी शिवभक्त थीं, इसलिए उन्होंने मणिकर्णिका घाट का कार्य करवाया था। जहां तक उनकी प्रतिमा का सवाल है, उसे कार्य से पहले ही संरक्षित कर लेना था ताकि कोई नुकसान न हो। यह बहुत दुःखद है। होल्कर इतिहासकार और पूर्व कुलपति डॉ. शिवनारायण यादव का कहना है कि इतिहास की धरोहर को संरक्षित किए जाने के बजाय उन्हें नष्ट किया जाना गलत है।

 
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