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Indore News: इंदौर में बिना रिकॉर्ड चल रहे हजारों होटल-रेस्टोरेंट, घनी आबादी के बीच अग्नि हादसों का खतरा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Arjun Richhariya Updated Thu, 04 Jun 2026 07:21 AM IST
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सार

नगर निगम ने फायर सेफ्टी के लिए शहर की 10 हजार से अधिक बहुमंजिला इमारतों की जांच का अभियान शुरू किया था, लेकिन दो महीनों में केवल 452 भवनों की जांच हो सकी है। 

Indore News Fire Safety Violations in Hotels and Restaurants After Delhi Tragedy
इंदौर शहर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

दिल्ली के एक होटल में भीषण आग लगने से 21 लोगों की जान चली गई, जिसके बाद पूरे देश में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर बहस छिड़ गई है। इस हादसे ने इंदौर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान में इंदौर शहर के भीतर सैकड़ों छोटे होटल और 1500 से ज्यादा रेस्टोरेंट का संचालन किया जा रहा है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि स्थानीय प्रशासन के पास इनका न तो कोई पुख्ता रिकॉर्ड उपलब्ध है और न ही यहां नियमित रूप से कोई निगरानी रखी जाती है। इस लापरवाही के पीछे सबसे बड़ी विडंबना यह है कि मध्य प्रदेश में अभी तक फायर एक्ट लागू नहीं हो सका है। इस कानून के अभाव में 50 बेड से कम क्षमता वाले होटलों के लिए फायर एनओसी प्राप्त करने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है, जिसके कारण ये छोटे होटल और रेस्टोरेंट पूरी तरह से अपनी मनमर्जी से संचालित हो रहे हैं।


जांच अभियान की धीमी रफ्तार 
शहर में हाल ही के दिनों में आगजनी की कई घटनाएं सामने आई थीं, जिसके बाद नगर निगम प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए बहुमंजिला इमारतों की जांच के लिए एक विशेष अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान के तहत तीन मंजिल से ज्यादा ऊंचाई वाली लगभग 10 हजार इमारतों की जांच की जानी तय की गई थी। हालांकि, प्रशासनिक सुस्ती के कारण अब तक केवल 452 भवनों की ही जमीनी जांच पूरी हो सकी है। इस सीमित जांच के दौरान ही निगम ने कड़ा रुख अपनाते हुए 7 होटलों समेत कुल 32 व्यावसायिक भवनों को सील करने की कार्रवाई की, क्योंकि इन जगहों पर अग्नि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं पाए गए थे। वास्तविकता यह है कि शहर में कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान और होटल आज भी बिना किसी पुख्ता सुरक्षा इंतजामों के धड़ल्ले से चल रहे हैं। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि प्रशासन ऐसी कार्रवाई केवल तभी करता है जब कोई बड़ा हादसा हो जाता है या फिर कोई गंभीर शिकायत सामने आती है। इस मामले में फायर सेफ्टी अधिकारी विनोद मिश्रा का स्पष्ट कहना है कि चूंकि 50 बेड से कम क्षमता वाले होटल्स हमसे एनओसी नहीं लेते हैं, इसलिए विभाग के पास उनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
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होटलों के सीलिंग से उजागर हुई जमीनी हकीकत
नगर निगम द्वारा चलाए गए सर्वे के दौरान जिन सात होटलों को सील किया गया, वहां की स्थिति बेहद दयनीय थी और सुरक्षा की बुनियादी व्यवस्थाएं तक नदारद मिलीं। इससे भी ज्यादा गंभीर बात यह सामने आई कि इन होटलों से संबंधित आवश्यक जानकारियां भी निगम के रिकॉर्ड में व्यवस्थित तरीके से दर्ज नहीं थीं। इसका सीधा मतलब यह है कि जब तक यह सर्वे शुरू नहीं हुआ था, तब तक संबंधित प्रशासन को इस बात का भान तक नहीं था कि ये होटल किस हाल में और किन शर्तों पर चलाए जा रहे हैं। इस अव्यवस्था को लेकर अधिकारियों का तर्क है कि भले ही छोटे होटलों के लिए अभी एनओसी लेने की अनिवार्यता लागू नहीं है, लेकिन इसके बावजूद फायर सेफ्टी उपकरण रखना और समय-समय पर फायर ऑडिट करवाना सभी छोटे-बड़े प्रतिष्ठानों के लिए बेहद जरूरी है।
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बिना रिकॉर्ड के चल रहे सैकड़ों होटल और रेस्टोरेंट
आंकड़ों पर नजर डालें तो इंदौर शहर में इस समय लगभग 250 से 300 छोटे-बड़े होटल और 1500 से अधिक रेस्टोरेंट सक्रिय रूप से संचालित हो रहे हैं। इनमें से जो बड़े होटल हैं, वे नियमानुसार फायर एनओसी के लिए नगर निगम में विधिवत आवेदन करते हैं, जिसकी वजह से उनकी निगरानी करना प्रशासन के लिए काफी आसान होता है। इसके विपरीत, शहर के छोटे होटलों और लॉजिंग प्रतिष्ठानों की कुल संख्या, उनकी वास्तविक क्षमता और वहां मौजूद आपातकालीन सुरक्षा इंतजामों का कोई भी संयुक्त डेटा या समग्र रिकॉर्ड स्थानीय प्रशासन के पास उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि किसी भी क्षेत्र में अचानक आग लगने की स्थिति में राहत कार्य शुरू करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

घनी आबादी वाले क्षेत्रों में स्थित हजार से अधिक इमारतें
औद्योगिक राजधानी इंदौर में तीन मंजिल से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों की कुल संख्या 10 हजार से भी ज्यादा है। इन इमारतों में से करीब एक हजार भवन शहर के सबसे व्यस्त, संकरे और घनी आबादी वाले रिहायशी व व्यावसायिक इलाकों में स्थित हैं। इन घने क्षेत्रों में किसी भी आपातकालीन स्थिति या आगजनी के दौरान राहत और बचाव कार्य का संचालन करना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। नियम के मुताबिक इन सभी संवेदनशील भवनों की सघन जांच की जानी थी, परंतु पिछले दो महीनों के भीतर निगम के भवन अधिकारियों की टीम ने केवल 452 भवनों का ही निरीक्षण पूरा किया है। इसका मतलब यह है कि अभी भी शहर के आधे से ज्यादा चिन्हित भवनों की जांच किया जाना बाकी है।

कमियां मिलने वाले भवनों पर सीलिंग की कार्रवाई जारी
नगर निगम के अपर आयुक्त आशीष पाठक ने कहा कि तीन मंजिला या उससे अधिक ऊंची सभी बिल्डिंगों की नियमित अंतराल पर जांच की जा रही है। इस विशेष अभियान के तहत मुख्य रूप से शहर के होटलों और अस्पतालों में जाकर फायर सेफ्टी से संबंधित तमाम व्यवस्थाओं को बारीकी से परखा जा रहा है। जांच के दौरान जिन भी स्थानों पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी या कमियां पाई जा रही हैं, उन्हें तुरंत प्रभाव से सील करने की सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

 
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