Dhar Bhojshala: भोजशाला को मंदिर घोषित करने के बाद धार में बढ़ा पर्यटन, सरस्वती लोक की कवायद भी होगी शुरू
धार भोजशाला को मंदिर घोषित किए जाने के बाद यहां धार्मिक पर्यटन में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। मालवा-निमाड़ क्षेत्र से बड़ी संख्या में पर्यटक भोजशाला पहुंच रहे हैं। आने वाले समय में धार धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
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धार भोजशाला को मंदिर घोषित किए जाने के बाद वहां धार्मिक पर्यटन बढ़ गया है। आसपास के जिलों से लोग मंदिर को देखने आने लगे हैं। आम दिनों के अलावा रविवार और शनिवार को भोजशाला में ज्यादा भीड़ रहती है।
फैसला आने के बाद मंगलवार और शुक्रवार को भी बड़ी संख्या में दूसरे जिलों से लोग आने लगे हैं। जो पर्यटक मांडू देखने आ रहे हैं, उनमें से कई अपने प्लान में धार भोजशाला को भी शामिल कर रहे हैं, क्योंकि धार भोजशाला का पुरातत्व महत्व भी है।
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उधर, मोहन सरकार की कैबिनेट बैठक में धार में सरस्वती लोक बनाने की मंजूरी मिल चुकी है और जल्दी ही इसके निर्माण की कवायद शुरू होगी। महाकाल लोक की तर्ज पर इसे बनाया जाएगा। लोक में सरस्वती माता की प्रतिमा, उनकी महिमा के भित्ति चित्र के अलावा राजा भोज शोध संस्थान भी बनाया जाना है। विद्युत सज्जा के अलावा भव्य गेट भी भोजशाला परिसर में बनाया जाएगा। जो मूर्तियां संग्रहालय में रखी गई है। उन्हें भी वापस भोजशाला में स्थापित करने की तैयारी की जा रही है।
मालवा–निमाड़ के पर्यटक ज्यादा
मंदिर जैसी गतिविधियां शुरू होने के बाद भोजशाला में मालवा–निमाड़ के पर्यटकों की संख्या में इजाफा हुआ है। भोजशाला मामले का केस जीतने वाले याचिकाकर्ता आशिष गोयल बताते हैं कि पहले की तुलना में लोगों की भोजशाला में आने की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। जब यह लोक के रूप में विकसित होगा तो धार्मिक पर्यटन की गतिविधियां और बढ़ेंगी भोजशाला के अलावा धार में प्राचीन कालका माता मंदिर भी काफी लोगों को आकर्षित करता है। सरकार पर्यटकों की सुविधा के इंतजाम भी भोजशाला में करेगी।

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