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Indore News: होली पर ग्रहण और सूतक का साया, पंडितों ने बताए शुभ मुहूर्त

Arjun Richhariya अर्जुन रिछारिया
Updated Mon, 23 Feb 2026 10:35 PM IST
सार

Indore News: इस वर्ष होलिका दहन और धुलेंडी की तारीखों को लेकर बने संशय को इंदौर के प्रमुख ज्योतिषाचार्यों ने स्पष्ट कर दिया है। 3 मार्च को होने वाले चंद्रग्रहण के कारण इस बार धर्मशास्त्रों के अनुसार 2 मार्च को प्रदोष काल में होलिका दहन किया जाएगा।

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Indore News Holika Dahan Dhulendi 2026 dates Lunar Eclipse holi chandra grahan
होली कब है? पंडितो ने दी जानकारी... - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
इस वर्ष होलिका दहन और धुलेंडी की तारीखों पर असमंजस बना हुआ है। दोनों ही तारीखों को लेकर ज्योतिषाचार्यों के अलग-अलग मत हैं। इस असमंजस का मुख्य कारण है 3 मार्च को लगने वाले चंद्रग्रहण और सूतक काल। इस विषय पर हमने प्रमुख पंडितों और ज्योतिषाचार्यों से बात की और जाना कि किस समय होलिका दहन करना और धुलेंडी खेलना उचित रहेगा। 
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डॉक्टर विनायक पांडे - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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पूर्णिमा प्रदोषकाल में होती है तभी होलिका दहन होना चाहिए
शासकीय संस्कृत महाविद्यालय के विभागाध्यक्ष डॉक्टर विनायक पांडे ने बताया कि होलिका दहन दो मार्च को ही होगा। क्योंकि धर्मशास्त्रों का अभिमत है। पूर्णिमा प्रदोषकाल में होती है तभी होलिका दहन होना चाहिए। अगले दिन पूर्णमा है पर प्रदोषकाल में नहीं है। इसलिए दो को होगा। हालांकि दो को भद्रा भी है और भद्रा पूरी रात और सुबह 5.30 बजे तक रहेगी। निर्णय सिंधु और धर्मसिंधु के अनुसार भद्रा में राखी और होली नहीं मनाते हैं। इस पर शास्त्रों में बताया गया है कि भद्रा के मुख को छोड़कर होलिका दहन कर सकते हैं। प्रदोषकाल में भद्रा का मुख छोड़कर दो मार्च को शाम 6.28 से रात 8.52 तक होली जलाई जा सकती है। 

चंद्रोदय के 17 मिनट बाद चंद्रग्रहण खत्म हो जाएगा
अगले दिन तीन मार्च को पूरे भारत में है चंद्रग्रहण है। ग्रहण दोपहर 3 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। वहीं चंद्रोदय शाम 6.30 बजे होगा और फिर शाम 6.47 पर ग्रहण खत्म हो जाएगा। इस दिन सूतक भी रहेंगे। सुबह 6.30 से शाम को 6.47 तक सूतक रहेगा। इस समय में धुलेंडी मनाई जा सकती है और रंग खेल सकते हैं। 

क्यों हो रहा संशय
डॉक्टर विनायक पांडे ने बताया कि पर्वकाल का महत्व है और प्रदोषकाल की तिथि व्याप्त होनी चाहिए। दो दिन पूर्णमा है लेकिन जिस दिन प्रदोषकाल होता है तभी होलिका दहन होता है। यदि ग्रहण नहीं होता तो तीन मार्च को ही होलिका दहन होता और चार मार्च को धुलेंडी होती। 
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आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
दो मार्च को शाम 6 से 8 का शुभ मुहूर्त
मप्र ज्योतिष एवं विद्वत परिषद के अध्यक्ष आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक ने बताया कि इस वर्ष तीन मार्च को होलिका दहन का मुहूर्त था लेकिन इसी दिन चंद्रग्रहण आ रहा है। वहीं पूर्णिमा ग्रहणकाल और प्रदोष के पूर्व में ही समाप्त हो रही है। इस तरह की स्थिति में धर्मसिंधु के अनुसार दो मार्च को ही होलिका दहन प्रदोषकाल में करना होगा और तीन मार्च को धुलेंडी होगी। दो मार्च को शाम 6 से रात्रि 8 बीच प्रदोष काल का समागम होगा। यह सबसे अच्छा समय होगा होलिका दहन का। यदि ग्रहण नहीं होता तो तीन मार्च को ही दहन होता और चार मार्च को होली खेली जाती। 

सूतक में रंग खेलना कितना शुभ
वहीं कुछ लोग कह रहे हैं कि इस स्थिति में भी जब दो मार्च को दहन है और तीन को धुलेंडी है तब इस दिन सूतक और ग्रहण के प्रभाव में रंग-गुलाल खेलना शुभ नहीं माना जाता। इस पर आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक ने कहा कि होलिका दहन शुभ मुहूर्त में करना जरूरी है। तीन मार्च को रंग खेला जा सकता है। इसमें कोई परेशानी नहीं है। 
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पंडित संजय शर्मा - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
दो को होलिका दहन और तीन को धुलेंडी होगी
पंडित संजय शर्मा ने कहा कि होली दो मार्च हो जलेगी और तीन को धुलेंडी खेली जाएगी। अधिकांश पंडितों का यही मत है। कुछ जगह इस तरह की बात चल रही है कि होली तीन मार्च को जलेगी और चार मार्च को धुलेंडी होगी लेकिन यह कहीं पर भी शास्त्र सम्मत नहीं है। शास्त्रों के अनुसार कई बार अलग अलग मत दिए जाते हैं लेकिन इस बार ग्रहण और प्रदोषकाल को देखते हुए यह स्पष्ट है कि होलिका दहन दो मार्च को होगा और तीन मार्च को धुलेंडी होगी। 

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