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Indore News: हाईकोर्ट ने पलटा फैसला, पूर्व IAS मोहम्मद सुलेमान की जेल की सजा पर लगी रोक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Arjun Richhariya Updated Wed, 08 Apr 2026 11:05 PM IST
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सार

Indore News: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने स्वास्थ्य विभाग के पूर्व प्रमुख सचिव मोहम्मद सुलेमान को राहत देते हुए उनकी दो महीने की जेल की सजा पर रोक लगा दी है। यह मामला कर्मचारियों के नियमितीकरण के आदेश का पालन न करने से जुड़ा है।

Indore News MP High Court stays 2-month jail sentence of former IAS officer Mohammed Suleman
इंदौर हाईकोर्ट मे लगी याचिका
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विस्तार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के पूर्व प्रमुख सचिव मोहम्मद सुलेमान के हक में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने अवमानना के एक मामले में सुलेमान को सुनाई गई दो महीने की जेल की सजा के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच द्वारा की गई। पूर्व आईएएस अधिकारी ने एकल पीठ द्वारा दिए गए सजा के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में कंटेम्प्ट अपील दायर की थी।
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सजा के आदेश पर अंतरिम रोक और नोटिस जारी
डिवीजन बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पूर्व आईएएस सुलेमान को अंतरिम राहत प्रदान की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक 16 मार्च 2026 को पारित किए गए सजा के आदेश का क्रियान्वयन स्थगित रहेगा। इसके साथ ही अदालत ने इस मामले में विपक्षी पक्ष अशोक कुमार पाडेयार को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है। अब इस प्रकरण पर अगली सुनवाई चार सप्ताह के पश्चात की जाएगी।
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सुलेमान के वकील ने तर्क दिया, अवमानना का नोटिस नहीं मिला था
अपीलकर्ता मोहम्मद सुलेमान की ओर से अधिवक्ता राज सक्सेना ने न्यायालय के समक्ष तर्क रखा कि उनके मुवक्किल को अवमानना की कार्यवाही के संबंध में कोई औपचारिक नोटिस प्राप्त नहीं हुआ था। इसके अतिरिक्त उन्हें अनुपालन के लिए पारित किए गए मूल आदेश की भी जानकारी नहीं थी। अधिवक्ता ने कोर्ट को यह भी अवगत कराया कि जिस मूल आदेश के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है, उसे पहले ही रिट अपील के माध्यम से चुनौती दी जा चुकी है और उस पर सक्षम न्यायालय से स्टे मिल चुका है।

एकल पीठ ने सुनाई थी दो माह की जेल
उल्लेखनीय है कि 16 मार्च 2026 को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने कंटेम्प्ट पिटीशन पर सुनवाई करते हुए मोहम्मद सुलेमान को अदालत के आदेश की अवहेलना का दोषी करार दिया था। आदेश के गैर-अनुपालन को गंभीर मानते हुए अदालत ने उन्हें दो महीने के कारावास की सजा सुनाई थी। इसी सजा के विरुद्ध सुलेमान ने डिवीजन बेंच का दरवाजा खटखटाया था।

स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के नियमितीकरण का विवाद
पूरा विवाद मंदसौर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के नियमितीकरण से संबंधित है। अधिवक्ता प्रसन्ना भटनागर के अनुसार, हाईकोर्ट ने 6 दिसंबर 2023 को विभाग को निर्देश दिए थे कि कर्मचारियों को वर्ष 2004 से 7 अप्रैल 2016 तक की अवधि के लिए नियमित किया जाए। कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया को संपन्न करने के लिए विभाग को तीन महीने का समय दिया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

अवमानना याचिकाओं का सिलसिला चलता रहा
आदेश का पालन न होने से परेशान होकर कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में कुल नौ अवमानना याचिकाएं दायर की थीं। इन याचिकाओं में विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया था। सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य विभाग की ओर से यह दलील दी जाती रही कि वे आदेश के पालन की प्रक्रिया में हैं, किंतु अदालत ने इसे लापरवाही माना। फरवरी 2026 में अंतिम चेतावनी मिलने के बाद विभाग ने केवल दो याचिकाकर्ताओं को एरियर देने की स्वीकृति दी थी, जिसे कोर्ट ने आदेश का पूर्ण पालन नहीं माना था।
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