फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   indore-news-mp-varg-1-teacher-recruitment-court-order-appointment-delay

Indore News: हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नियुक्ति के लिए भटक रहे शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी

Fri, 14 Aug 2026 10:31 AM IST
Arjun Richhariya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Arjun Richhariya Updated Fri, 14 Aug 2026 10:31 AM IST
सार

Indore News: वर्ष 2018-19 की उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती वर्ग 1 के अंतर्गत बायोलॉजी की एलाइड शाखाओं से पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाले अभ्यर्थी परीक्षा उत्तीर्ण करने और हाईकोर्ट का फैसला पक्ष में आने के बाद भी नियुक्ति पत्र के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

विज्ञापन
indore-news-mp-varg-1-teacher-recruitment-court-order-appointment-delay
इंदौर हाईकोर्ट मे लगी याचिका

विस्तार

मध्य प्रदेश में वर्ष 2018-19 में शुरू हुई उच्च माध्यमिक शिक्षक (वर्ग-1) भर्ती प्रक्रिया कई अभ्यर्थियों के लिए मानसिक प्रताड़ना का सबब बनी हुई है। पात्रता परीक्षा और मुख्य भर्ती परीक्षा पास करने के साथ-साथ अदालत से अपने पक्ष में स्पष्ट आदेश होने के बावजूद, विज्ञान (बायोलॉजी) विषय की एलाइड शाखाओं से स्नातकोत्तर करने वाले अभ्यर्थी आज भी नियुक्ति पत्र पाने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
विज्ञापन


क्या है पूरा विवाद?
साल 2019 में जब मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ग-1 के लिए भर्ती निकाली, तब नियम पुस्तिका (रूलबुक) के अनुसार संबंधित विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन (एमएससी) और बीएड डिग्री धारकों को पात्र माना गया था। इसके तहत बायोटेक्नोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, और माइक्रोबायोलॉजी जैसी एलाइड (संबद्ध) शाखाओं से स्नातकोत्तर करने वाले युवाओं ने भी आवेदन किया और कड़े पात्रता व भर्ती इम्तिहान पास किए। लेकिन समस्या तब उत्पन्न हुई जब अंतिम चयन और दस्तावेजों के सत्यापन का समय आया। शिक्षा विभाग ने एक नया नियम आड़े लाते हुए इन अभ्यर्थियों को यह कहकर प्रक्रिया से बाहर कर दिया कि "बायोटेक्नोलॉजी या माइक्रोबायोलॉजी कोर बायोलॉजी (जूलॉजी/बॉटनी) नहीं हैं।" विभाग ने शर्त रख दी कि यदि पोस्ट ग्रेजुएशन एलाइड सब्जेक्ट में है, तो उम्मीदवार के पास स्नातक स्तर पर जूलॉजी या बॉटनी एक विषय के रूप में होना अनिवार्य है। यह शर्त मूल विज्ञापन और परीक्षा संपन्न होने के बाद जोड़ी गई थी।
विज्ञापन


कोर्ट ने कहा- "खेल के बीच में नहीं बदले जा सकते नियम"
अभ्यर्थियों की तरफ से हाईकोर्ट में केस दाखिल करने वाले वकील एलसी पाटनी ने बताया कि विभाग के इस रवैये के खिलाफ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक और सर्वमान्य सिद्धांत को दोहराया कि "खेल शुरू होने के बाद खेल के नियम नहीं बदले जा सकते"। जब मूल विज्ञापन और नियमों में ऐसी कोई शर्त नहीं थी, तो चयन प्रक्रिया के अंतिम चरण में इसे थोपना असंवैधानिक है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें नियुक्ति देने के स्पष्ट आदेश दिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


बड़ा सवाल: क्या मिलेगा हक या फिर जारी रहेगा कानूनी चक्रव्यूह?
अभ्यर्थियों का कहना है कि हमारे पक्ष में हाईकोर्ट ने नए आदेश पारित किए हैं, अब क्या सरकार और शिक्षा विभाग हमें सीधे नियुक्ति पत्र सौंपेगा? या फिर पूर्व के मामलों की तरह इन आदेशों को भी रिव्यू पिटीशन और अपीलों के कानूनी चक्रव्यूह में उलझा दिया जाएगा? वर्षों से भटक रहे अभ्यर्थी मांग कर रहे हैं कि अदालत के स्पष्ट फैसलों और शीर्ष नेतृत्व के बयानों का सम्मान करते हुए विभाग सभी लंबित पुनर्विचार याचिकाओं को वापस ले और पात्र उम्मीदवारों को तत्काल नियुक्ति प्रदान करे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed