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Indore News: कांग्रेस ने उठाया दूषित जल का मुद्दा तो जागा निगम, अब हाईटेक होगी टेस्टिंग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Fri, 05 Jun 2026 06:36 AM IST
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सार
इस नई मशीन से हर महीने एफएसआई और यूएसईईए के मानकों के तहत 2000 पानी के नमूनों की तेज, सटीक और वैज्ञानिक जांच की जाएगी ताकि शहर की पेयजल व्यवस्था को पूरी तरह शुद्ध और सुरक्षित बनाया जा सके।
इंदौर के कई क्षेत्रों में अभी भी आ रहा गंदा पानी।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
इंदौर नगर निगम ने शहर में पेयजल की गुणवत्ता को सुधारने और दूषित पानी की समस्या से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कांग्रेस द्वारा शहर के विभिन्न हिस्सों में गंदे पानी की आपूर्ति को लेकर जारी की गई रिपोर्ट के बाद अब निगम प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। पेयजल आपूर्ति को सुरक्षित बनाने के लिए नगर निगम अब एक नई और अत्याधुनिक मशीन खरीदने की तैयारी कर रहा है, जिसकी कुल लागत 43 लाख रुपए बताई जा रही है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से शहरवासियों को मिलने वाले पानी की शुद्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।
पुरानी टेस्टिंग पद्धति में बदलाव की तैयारी
अब तक शहर में पानी की शुद्धता जांचने के लिए पुरानी और पारंपरिक प्रणालियों का ही सहारा लिया जा रहा था। नर्मदा प्रोजेक्ट के अंतर्गत मूसाखेड़ी स्थित प्रयोगशाला में पानी के नमूनों का परीक्षण पुरानी पद्धति के आधार पर किया जाता रहा है, जिसमें समय अधिक लगता था। अब इस नई अत्याधुनिक मशीन के आ जाने से हर महीने पानी के लगभग दो हजार नमूनों की जांच की जा सकेगी। इस आधुनिक तकनीक के माध्यम से पानी की गुणवत्ता का परीक्षण न केवल तेज होगा, बल्कि बेहद सटीक और पूरी तरह से वैज्ञानिक तरीके से संपन्न किया जाएगा।
राजनीतिक दबाव के बाद उठे प्रशासनिक कदम
शहर की पानी की टंकियों से सप्लाई होने वाले पेयजल को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार राजनीतिक सरगर्मियां तेज थीं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पानी के असुरक्षित सैंपलों का मामला प्रमुखता से उठाया था। इसके साथ ही कांग्रेस पार्षदों के एक दल ने शहर के विभिन्न इलाकों से लिए गए पानी के नमूनों की एक विस्तृत रिपोर्ट नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल को सौंपी थी। इस विपक्ष के दबाव और जनता की सेहत से जुड़े मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने तुरंत कार्ययोजना तैयार की।
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महापौर और निगमायुक्त ने दिए कड़े निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई तकनीक अपनाने के निर्देश दिए। अफसरों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पानी की टेस्टिंग प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए 43 लाख रुपए की अत्याधुनिक मशीन तुरंत खरीदी जाए। इस योजना के पहले चरण में पानी की बैक्टीरियोलॉजिकल टेस्टिंग यानी जीवाणु परीक्षण के लिए आवश्यक मशीनरी और उसके सहयोगी संसाधन जुटाए जाएंगे।
मानकों के अनुरूप होगी पानी की जांच
नगर निगम के अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस नई मशीन की सहायता से हर महीने अलग-अलग क्षेत्रों से दो हजार सैंपल लिए जाएंगे। इन नमूनों की अलग-अलग चरणों और वैज्ञानिक मानकों पर गहन जांच होगी ताकि पानी में किसी भी तरह की अशुद्धि या गड़बड़ी को तुरंत पकड़ा जा सके। यह पूरी जांच प्रक्रिया एफएसआई और यूएसईईए के अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत संचालित की जाएगी। इस कदम से शहर की पेयजल वितरण व्यवस्था को पूरी तरह से पारदर्शी और सुरक्षित बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
पुरानी टेस्टिंग पद्धति में बदलाव की तैयारी
अब तक शहर में पानी की शुद्धता जांचने के लिए पुरानी और पारंपरिक प्रणालियों का ही सहारा लिया जा रहा था। नर्मदा प्रोजेक्ट के अंतर्गत मूसाखेड़ी स्थित प्रयोगशाला में पानी के नमूनों का परीक्षण पुरानी पद्धति के आधार पर किया जाता रहा है, जिसमें समय अधिक लगता था। अब इस नई अत्याधुनिक मशीन के आ जाने से हर महीने पानी के लगभग दो हजार नमूनों की जांच की जा सकेगी। इस आधुनिक तकनीक के माध्यम से पानी की गुणवत्ता का परीक्षण न केवल तेज होगा, बल्कि बेहद सटीक और पूरी तरह से वैज्ञानिक तरीके से संपन्न किया जाएगा।
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राजनीतिक दबाव के बाद उठे प्रशासनिक कदम
शहर की पानी की टंकियों से सप्लाई होने वाले पेयजल को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार राजनीतिक सरगर्मियां तेज थीं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पानी के असुरक्षित सैंपलों का मामला प्रमुखता से उठाया था। इसके साथ ही कांग्रेस पार्षदों के एक दल ने शहर के विभिन्न इलाकों से लिए गए पानी के नमूनों की एक विस्तृत रिपोर्ट नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल को सौंपी थी। इस विपक्ष के दबाव और जनता की सेहत से जुड़े मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने तुरंत कार्ययोजना तैयार की।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई तकनीक अपनाने के निर्देश दिए। अफसरों को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पानी की टेस्टिंग प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए 43 लाख रुपए की अत्याधुनिक मशीन तुरंत खरीदी जाए। इस योजना के पहले चरण में पानी की बैक्टीरियोलॉजिकल टेस्टिंग यानी जीवाणु परीक्षण के लिए आवश्यक मशीनरी और उसके सहयोगी संसाधन जुटाए जाएंगे।
मानकों के अनुरूप होगी पानी की जांच
नगर निगम के अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस नई मशीन की सहायता से हर महीने अलग-अलग क्षेत्रों से दो हजार सैंपल लिए जाएंगे। इन नमूनों की अलग-अलग चरणों और वैज्ञानिक मानकों पर गहन जांच होगी ताकि पानी में किसी भी तरह की अशुद्धि या गड़बड़ी को तुरंत पकड़ा जा सके। यह पूरी जांच प्रक्रिया एफएसआई और यूएसईईए के अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत संचालित की जाएगी। इस कदम से शहर की पेयजल वितरण व्यवस्था को पूरी तरह से पारदर्शी और सुरक्षित बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

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