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विश्व पर्यावरण दिवस आज: होलकर रियासत काल में साल में दो बार होती थी पेड़ों की गणना, काटने पर थी सख्त रोक

Kamlesh Sen कमलेश सेन
Updated Fri, 05 Jun 2026 07:24 AM IST
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सार

विश्व पर्यावरण दिवस पर इंदौर की घटती हरियाली और बढ़ते प्रदूषण को लेकर चिंता जताई गई। कभी बाग-बगीचों और वृक्षों से समृद्ध शहर में विकास परियोजनाओं के कारण हजारों पेड़ कट चुके हैं।  

World Environment Day 2026 Holkar State’s Remarkable Environmental Legacy environment awareness
पर्यावरण दिवस पर विशेष - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य पृथ्वी पर जीवन के लिए आवश्यक पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना और उसके संरक्षण को बढ़ावा देना है। इंदौर में बिगड़ता पर्यावरण और बढ़ता प्रदूषण चिंता का विषय बन चुका है। लगातार बढ़ता तापमान और बारिश के दिनों में कमी पर्यावरणीय असंतुलन के स्पष्ट संकेत हैं।


होलकर शासनकाल में इंदौर घने वृक्षों और हरियाली से आच्छादित था, लेकिन आज विकास की अंधाधुंध दौड़ में लगातार पेड़ों की कटाई हो रही है। नवलखा क्षेत्र के बारे में कहा जाता है कि यहां कभी नौ लाख पेड़ थे, इसलिए इसका नाम नवलखा पड़ा। लेकिन आज नवलखा हो या इमली बाजार, अधिकांश स्थानों से हरियाली गायब हो चुकी है। सीमेंट और कंक्रीट के जंगल ने शहर को भट्टी की तरह तपता हुआ बना दिया है।
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पैट्रिक गिडीज ने की थी इंदौर की हरियाली की प्रशंसा
होलकर रियासत काल में प्रसिद्ध नगर नियोजक पैट्रिक गिडीज ने वर्ष 1918 में इंदौर दरबार को प्रस्तुत अपनी रिपोर्ट में नगर के बाग-बगीचों और हरियाली की सराहना की थी। मालवा का मौसम और जलवायु इतनी आकर्षक थी कि जो व्यक्ति इंदौर आता था, वह यहीं का होकर रह जाता था।
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मोहल्लों और सड़कों के नामों में झलकता है प्रकृति प्रेम
इंदौर में पेड़-पौधों का सम्मान शुरू से ही रहा है। शहर के कई मोहल्लों और इलाकों के नाम प्रकृति और हरियाली से जुड़े हुए हैं, जैसे—इमली बाजार, सांठा बाजार, शकर बाजार, मोरसली गली, पीपली बाजार, नवलखा, खजूरी बाजार, धान गली, लालबाग, हवा बंगला, हाथीपाला, कैदी बाग, केशर बाग, गोपाल बाग, गुलाब बाग, हल्दी बाजार (वर्तमान मारोठिया) और मोहता बाग आदि।

लगातार घट रही है हरियाली
सड़कों के किनारे और बगीचों की जगह मल्टी-स्टोरी पार्किंग तथा अन्य निर्माण कार्यों ने शहर की हरियाली को नुकसान पहुंचाया है। हाल ही में समाप्त किए गए 11 किलोमीटर लंबे बीआरटीएस कॉरिडोर के लिए लगभग 4,000 पेड़ काटे गए। महू नाका से फूटी कोठी तक सड़क निर्माण में 2,500 पेड़ तथा भंवरकुआं, लवकुश चौराहा और खजराना फ्लाईओवर निर्माण में करीब 3,500 पेड़ों की कटाई हुई।

रानी सराय क्षेत्र के पेड़ों पर तोते और कबूतरों का बसेरा है, लेकिन मेट्रो परियोजना के कारण इन्हें भी काटे जाने की संभावना है। लगभग 40 लाख आबादी वाले इंदौर में वर्तमान में हरित क्षेत्र केवल 9 प्रतिशत रह गया है और पेड़ों की अनुमानित संख्या लगभग 10 लाख है। जून माह में मास्टर प्लान के तहत बनने वाली सड़कों के लिए 1,640 पेड़ों की कटाई तथा लगभग 840 पेड़ों के ट्रांसप्लांटेशन की अनुमति दी गई है।

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होलकर शासन में वृक्ष संरक्षण के थे कड़े नियम
होलकर रियासत द्वारा वर्ष 1862 में जारी एक परिपत्र में निर्देश दिया गया था कि ग्रामीण क्षेत्रों, सड़कों के किनारे, मंदिरों, धर्मशालाओं और कुओं के पास लगे पेड़ों को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचाई जाए। उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी स्थानीय अधिकारियों को सौंपी गई थी। पुलिस थानेदारों और कचहरी के जमादारों को वर्ष में दो बार पेड़ों की गणना कर रिपोर्ट दरबार में प्रस्तुत करने के निर्देश थे।

इसी प्रकार 16 मार्च 1874 को जारी एक आदेश में कहा गया था कि इंदौर शहर की सीमा और प्रमुख मार्गों पर लगे पेड़ों को बिना अनुमति नहीं काटा जा सकता। उनकी शाखाएं काटने के लिए भी नगर समिति से लिखित अनुमति आवश्यक थी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए दंड का प्रावधान था।

पर्यावरणविदों ने जताई चिंता
पर्यावरणविद डॉ. ओ.पी. जोशी का कहना है कि विकास के नाम पर बाग-बगीचों और सड़कों के किनारे लगे हजारों पेड़ों की कटाई की गई है, जिससे शहर का पर्यावरण गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। उनका मानना है कि पर्यावरण के अनुकूल वृक्षों का बड़े पैमाने पर रोपण आवश्यक है। मेट्रो परियोजना के कारण और भी पेड़ों की कटाई होगी, इसलिए व्यापक और सघन पौधारोपण ही भविष्य में पर्यावरण संतुलन बहाल कर सकता है। 
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