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Indore News: कोविड के बाद हड्डियों में क्यों आ रही कमजोरी? दुनियाभर के डॉक्टरों की बड़ी चेतावनी
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Sun, 25 Jan 2026 11:33 AM IST
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सार
Indore News: इंदौर में आयोजित इंडोकॉन में विशेषज्ञों ने कूल्हे के जोड़ों को बिना रिप्लेसमेंट सुरक्षित रखने वाली हिप प्रिजर्वेशन तकनीक पर चर्चा की। कोविड के बाद युवाओं में बढ़ते आर्थराइटिस के मामलों और गलत जीवनशैली के प्रभावों पर भी प्रकाश डाला गया।
इंडोकॉन में आए दुनियाभर के डॉक्टर
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित नेशनल हिप कोर्स और इंडोकॉन 2026 के दूसरे दिन वैज्ञानिक सत्रों का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र हिप प्रिजर्वेशन और कूल्हे से जुड़े जटिल मामलों के आधुनिक उपचार रहे। कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. हेमंत मंडोवरा और उनकी टीम के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने हिप फ्रैक्चर और ट्रोकेन्टर एरिया की समस्याओं पर अपने महत्वपूर्ण शोध प्रस्तुत किए। इसमें बताया गया कि कोविड के बाद हिप आर्थराइटिस के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बच्चों और युवाओं की हड्डियां भी गलत जीवनशैली और तकनीक पर अधिक निर्भरता की वजह से कमजोर होती जा रही हैं।
संक्रमण और तकनीकी सत्रों का आयोजन
दिन की शुरुआत हड्डी के संक्रमण से जुड़े मॉड्यूल के साथ हुई जिसमें विशेषज्ञों ने माइक्रोब्स की दुनिया और सर्जरी के बाद होने वाले संक्रमणों पर विस्तार से बात की। सत्र के दौरान कृत्रिम जोड़ संक्रमण और फ्रैक्चर से जुड़े संक्रमण के बीच का अंतर समझाते हुए उनके प्रबंधन के सटीक तरीके बताए गए। इसके साथ ही फीमरल नेक और ओस्टियोनेक्रोसिस जैसे विषयों पर लाइव वीडियो और केस स्टडी के माध्यम से नई तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।
युवा मरीजों में बढ़ती कूल्हे की समस्या
इंग्लैंड से आए विशेषज्ञ डॉ. अजय मालवीया ने बताया कि कई युवा मरीज हिप जॉइंट में संरचनात्मक असमानता की शिकायत लेकर आ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब कूल्हे के जोड़ में बॉल और सॉकेट का तालमेल ठीक नहीं होता है, तो टकराने के कारण आर्थराइटिस का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में हिप प्रिजर्वेशन तकनीक काफी कारगर साबित हो रही है क्योंकि यह रिप्लेसमेंट की जरूरत को भविष्य के लिए टाल देती है, जिससे सक्रिय जीवनशैली वाले युवाओं को काफी लाभ मिलता है।
पोस्ट-कोविड प्रभावों और जीवनशैली पर चिंता
नागपुर के वरिष्ठ सर्जन डॉ. सुश्रुत बाभुलकर ने साझा किया कि कोविड के बाद हिप आर्थराइटिस के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वहीं गुजरात के डॉ. कश्यप ने दवाइयों के अनियंत्रित उपयोग और अल्कोहल के सेवन से कूल्हे के जोड़ की रक्त-आपूर्ति पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों की जानकारी दी। दिन के अंत में स्किल लैब में चिकित्सकों को 3-डी आधारित हिप तकनीकों का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया।
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संक्रमण और तकनीकी सत्रों का आयोजन
दिन की शुरुआत हड्डी के संक्रमण से जुड़े मॉड्यूल के साथ हुई जिसमें विशेषज्ञों ने माइक्रोब्स की दुनिया और सर्जरी के बाद होने वाले संक्रमणों पर विस्तार से बात की। सत्र के दौरान कृत्रिम जोड़ संक्रमण और फ्रैक्चर से जुड़े संक्रमण के बीच का अंतर समझाते हुए उनके प्रबंधन के सटीक तरीके बताए गए। इसके साथ ही फीमरल नेक और ओस्टियोनेक्रोसिस जैसे विषयों पर लाइव वीडियो और केस स्टडी के माध्यम से नई तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।
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युवा मरीजों में बढ़ती कूल्हे की समस्या
इंग्लैंड से आए विशेषज्ञ डॉ. अजय मालवीया ने बताया कि कई युवा मरीज हिप जॉइंट में संरचनात्मक असमानता की शिकायत लेकर आ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब कूल्हे के जोड़ में बॉल और सॉकेट का तालमेल ठीक नहीं होता है, तो टकराने के कारण आर्थराइटिस का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में हिप प्रिजर्वेशन तकनीक काफी कारगर साबित हो रही है क्योंकि यह रिप्लेसमेंट की जरूरत को भविष्य के लिए टाल देती है, जिससे सक्रिय जीवनशैली वाले युवाओं को काफी लाभ मिलता है।
पोस्ट-कोविड प्रभावों और जीवनशैली पर चिंता
नागपुर के वरिष्ठ सर्जन डॉ. सुश्रुत बाभुलकर ने साझा किया कि कोविड के बाद हिप आर्थराइटिस के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वहीं गुजरात के डॉ. कश्यप ने दवाइयों के अनियंत्रित उपयोग और अल्कोहल के सेवन से कूल्हे के जोड़ की रक्त-आपूर्ति पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों की जानकारी दी। दिन के अंत में स्किल लैब में चिकित्सकों को 3-डी आधारित हिप तकनीकों का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया।

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