सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   Indore: Uka's toxic waste was incinerated six months ago, now 900 tonnes of it is being buried forever.

Indore News: यूका का जहरीला कचरा छह माह पहले हुआ था भस्म, अब उसकी 900 टन राख हमेशा के लिए दफन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Thu, 29 Jan 2026 09:24 AM IST
विज्ञापन
सार

पीथमपुर में पहले भी 30 टन से ज्यादा विषैला कचरा पीथमपुर में लैंडफिल हुआ था। उस कारण गांव की नदी का पानी काला हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि उस पानी का उपयोग खेतों में नहीं करते, इससे फसल खराब हो जाती है। पशु पानी पीते है तो वे बीमार हो जाते हैं। 

Indore: Uka's toxic waste was incinerated six months ago, now 900 tonnes of it is being buried forever.
इस परिसर में दफन की गई राख। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

42 साल पहले भोपाल में पांच हजार लोगों को मौत की नींद सुलाने वाली यूनियन कार्बाइड फैक्टरी का 337 टन विषैला कचरा तो इंदौर के समीप पीथमपुर में दफन हो गया। अब उसकी बची 900 टन राख को भी हमेशा-हमेशा के लिए दफन कर दिया गया है। फैक्टरी से निकली गैस के कारण हजारों प्रभावित हुए थे। जिन गर्भवतियों की सांसों में यह गैस गई थी, उनकी संतानों पर भी इसका असर देखने को मिला था। इस त्रासदी के अवशेष राख के रूप में जिंदा थे और हाईकोर्ट के निर्देश पर राख को लैंडफिल किया गया है। यह हिस्सा आबादी क्षेत्र से आधा किलोमीटर दूर है।

Trending Videos

 

पीथमपुर में रामकी कंपनी ने अपने प्लांट में 337 टन जहरीला कचरा छह माह में जलाया। उसके बाद बची राख को जुलाई माह से कंपनी के परिसर में एक प्लेटफॉर्म पर रखा गया है। उस राख की भी विशेषज्ञों ने जांच की। राख को दफनाने के लिए एक तालाबनुमा गड्ढा खोदा गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

 

जमीन से चार फीट ऊंचाई पर एक प्लेटफॉर्म बनाया गया है। उस पर एचडीपीई लाइनर बिछाया गया। उसमें राख के विशेष पैकेट को रखा गया है। अब उसे मिट्टी से ढक दिया जाएगा और उस पर पौधारोपण किया जाएगा। बची हुई राख में मरकरी, निकल, जिंक, कोबाल्ट, मैंगनीज सहित अन्य तत्व हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा कि यह राख पानी के संपर्क में नहीं आएगी और भूजल इससे प्रभावित नहीं होगा।

सोलह साल पहले भी 30 टन से ज्यादा राख पीथमपुर में लैंडफिल की गई थी। उस कारण भस्मक के समीप से निकलने वाली नदी का पानी काला हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि उस पानी का उपयोग खेतों में नहीं करते, इससे फसल खराब हो जाती है। अब उसी फैक्टरी की 900 टन राख को भी पीथमपुर में दफन किया गया है। अब इसकी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed