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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur News: Village Turns to Biogas as LPG Shortage Hits, Dozens of Homes Cooking Without Cylinders

Jabalpur News: सिलिंडर की किल्लत से बेफिक्र गांव, बायोगैस से बन रहा भोजन, 60 घरों में लगे हैं प्लांट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Tue, 17 Mar 2026 03:55 PM IST
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सार

गैस सिलेंडर की बढ़ती किल्लत के बीच जबलपुर के एक गांव ने आत्मनिर्भर बनने की मिसाल पेश की है। गांव के दर्जनों परिवारों के घरों में बायोगैस प्लांट हैं जिससे बिना किसी परेशानी के उनके ईंधन की व्यवस्था हो रही है।

Jabalpur News: Village Turns to Biogas as LPG Shortage Hits, Dozens of Homes Cooking Without Cylinders
सिलिंडर कि किल्लत से दूर यह गांव, जहां बायोगैस पर बन रहा खाना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

देश में गैस सिलिंडर की किल्लत के चलते जहां कई जगह लोगों को गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है, वहीं जबलपुर के एक गांव में लोगों को इस समस्या से कोई फर्क नहीं पड़ता। गांव के कई परिवारों ने अपने घरों में बायोगैस प्लांट लगा रखा है, जिससे उन्हें आसानी से ईंधन मिल जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि सिलिंडर की झंझट से बेहतर है कि थोड़ी सी मेहनत कर बायोगैस से ही चूल्हा जलाया जाए।

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जबलपुर से करीब 25 किलोमीटर दूर ग्राम बंदरकोला में लगभग 400 परिवार रहते हैं। इनमें से करीब 60 से अधिक परिवारों के घरों में बायोगैस प्लांट लगा हुआ है। गांव के उपसचिव घूरसेन लोधी ने बताया कि करीब सात साल पहले एक एनजीओ की मदद से गांव में तीन घन मीटर क्षमता के बायोगैस प्लांट लगाए गए थे। हितग्राहियों को केवल मजदूरी का खर्च देना पड़ा था। बायोगैस प्लांट में 10 से 15 किलो गोबर डालने पर इतना गैस तैयार हो जाता है कि कई परिवारों का खाना बन सके।
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गांव के कृष्णा पटेल ने बताया कि बायोगैस प्लांट से निकलने वाले गोबर का उपयोग खेतों में जैविक खाद के रूप में किया जाता है। इससे किसी प्रकार का धुआं भी नहीं निकलता, जिससे पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होता। उनके घर में पिछले पांच वर्षों से बायोगैस से ही खाना बन रहा है।

वहीं गांव में रहने वाली हेमबाई पटेल का कहना है कि उनका संयुक्त परिवार है और उनके घर के साथ देवरानी के घर में भी बायोगैस से खाना बनाया जाता है। सुबह के समय बायोगैस प्लांट में गोबर डालने में थोड़ी मेहनत लगती है लेकिन इसके बाद दिनभर चूल्हा आसानी से जलता रहता है।

सुनीता पटेल का कहना है कि बायोगैस प्लांट होने से उन्हें गैस सिलिंडर पर खर्च नहीं करना पड़ता। हालांकि बारिश के मौसम में गैस थोड़ा कम बनती है और कभी-कभी प्लांट में तकनीकी दिक्कत भी आ जाती है लेकिन कुल मिलाकर बायोगैस प्लांट आर्थिक रूप से भी मददगार है और सिलिंडर की किल्लत से भी राहत देता है।

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