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Jabalpur News: PWD प्रमुख सचिव को हाईकोर्ट की चेतावनी, कहा- आदेश को हल्के में न लें; जानें मामला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Tue, 16 Jun 2026 08:27 PM IST
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सार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के आरोपों वाले अधिकारी को प्रभारी चीफ इंजीनियर बनाने पर आपत्ति जताई। कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी प्रमुख सचिव को चेतावनी देते हुए निर्देश दिया कि भविष्य में केवल बेदाग सेवा रिकॉर्ड और पात्रता रखने वाले अधिकारियों को ही उच्च पदों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा जाए।

Additional or temporary charge should not be handed over to individuals with a tainted record
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग में नियमों की अनदेखी कर भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे अधिकारी को प्रभारी मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने को अनुचित ठहराया है। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था विभागीय पदानुक्रम और प्रशासनिक अनुशासन को कमजोर करती है तथा वरिष्ठ एवं योग्य अधिकारियों में असंतोष पैदा करती है।

अदालत ने प्रमुख सचिव, लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिया कि भविष्य में किसी भी उच्च पद का अतिरिक्त या अस्थायी प्रभार केवल ऐसे अधिकारियों को दिया जाए, जिनका सेवा रिकॉर्ड निष्कलंक हो और जो पदोन्नति की पात्रता श्रेणी में आते हों। कोर्ट ने प्रमुख सचिव के खिलाफ कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की, लेकिन स्पष्ट चेतावनी दी कि आदेश को हल्के में न लिया जाए और ऐसा कोई कदम न उठाया जाए जो लोक प्रशासन के हितों के प्रतिकूल हो।

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याचिकाकर्ता पी.सी. वर्मा ने अदालत में चुनौती दी थी कि उनसे भोपाल ब्रिज जोन के मुख्य अभियंता का अतिरिक्त प्रभार वापस लेकर संजय कुमार को सौंप दिया गया। वर्मा को जुलाई 2025 में तत्कालीन मुख्य अभियंता जी.पी. वर्मा के निलंबन के बाद यह जिम्मेदारी दी गई थी। बाद में टेक्निकल बिड मूल्यांकन में कथित गड़बड़ी को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी होने के तीन घंटे के भीतर उनसे अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया गया।

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याचिका में तर्क दिया गया कि जिस अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार दिया गया, उसके खिलाफ 2.41 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितताओं तथा एक पुल ढहने के मामले में सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के आरोप हैं। साथ ही, संबंधित जांच प्रक्रिया की जिम्मेदारी भी उसी अधिकारी के कार्यालय को सौंपी गई थी, जिससे निष्पक्ष जांच प्रभावित होने की आशंका थी।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा था, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में आरोपित अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देने संबंधी विभागीय नीति और प्रक्रिया क्या है। हालांकि, प्रमुख सचिव की ओर से सामान्य जवाब प्रस्तुत किया गया, जिसे अदालत ने आवश्यक नहीं माना। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जवाब में की गई दलीलें संबंधित अधिकारी का बचाव करती प्रतीत होती हैं।

अपने आदेश में एकलपीठ ने कहा कि राज्य सरकार जनहित में अस्थायी व्यवस्थाएं कर सकती है, लेकिन पात्रता संबंधी कानूनी शर्तों को दरकिनार नहीं किया जा सकता। यदि नियमित पदोन्नति के लिए निर्धारित पात्रता मानकों को अस्थायी प्रभार देते समय नजरअंदाज किया जाएगा तो इससे भाई-भतीजावाद, पक्षपात और भ्रष्टाचार की संभावनाएं बढ़ेंगी। अदालत ने निर्देश दिया कि भोपाल ब्रिज जोन के मुख्य अभियंता का अतिरिक्त प्रभार किसी ऐसे योग्य अधिकारी को सौंपा जाए जिसका सेवा रिकॉर्ड पूरी तरह बेदाग हो और जो पदोन्नति की पात्रता श्रेणी में शामिल हो।

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