Jabalpur News: दहेज मांग के लिए क्रूरता साबित करना जरूरी, आरोपी की दोषमुक्ति बरकरार, सरकार की अपील खारिज
हाईकोर्ट ने कहा कि दहेज हत्या के मामलों में दहेज मांग से जुड़ी क्रूरता साबित होना जरूरी है। सबूतों के अभाव में आरोपी को सजा नहीं दी जा सकती। इसी आधार पर कोर्ट ने सरकार की अपील खारिज कर आरोपी की दोषमुक्ति बरकरार रखी।
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दहेज हत्या के एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की युगलपीठ ने स्पष्ट किया है कि दहेज की मांग से जुड़ी क्रूरता को साबित किए बिना आरोपी को सजा नहीं दी जा सकती। न्यायालय ने इसी आधार पर आरोपी को दोषमुक्त किए जाने के खिलाफ राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट की युगलपीठ, जिसमें जस्टिस विवेक अग्रवाल एवं जस्टिस बी.पी. शर्मा शामिल थे, ने कहा कि यदि अभियोजन पक्ष के गवाह दहेज या उससे संबंधित क्रूरता साबित करने में असफल रहते हैं, तो आरोपी को दंडित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने माना कि दहेज हत्या जैसे गंभीर आरोपों में साक्ष्यों का ठोस होना अनिवार्य है।
राज्य सरकार ने डिंडौरी जिला न्यायालय के उस निर्णय को चुनौती दी थी, जिसमें आरोपी पति को भारतीय दंड संहिता की धारा 304-बी एवं 498-ए के तहत दोषमुक्त किया गया था। अभियोजन के अनुसार, सुनीला ने जून 2020 में रणजीत सिंह से प्रेम विवाह किया था। विवाह के एक वर्ष के भीतर पति से कथित विवाद के बाद 29 अप्रैल 2021 को उसने आत्महत्या के प्रयास में स्वयं को आग लगा ली थी। उपचार के दौरान अगले दिन उसकी मृत्यु हो गई थी। पुलिस ने मामले में आरोपी पति के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर चालान प्रस्तुत किया था, लेकिन डिंडौरी जिला न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी को दोषमुक्त कर दिया था।
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हाईकोर्ट ने मामले के पुनः अवलोकन में पाया कि अभियोजन पक्ष की गवाह एवं मृतिका की बहन ने स्वीकार किया कि विवाह प्रेम विवाह था और आरोपी की ओर से किसी प्रकार की दहेज मांग नहीं की गई थी। ससुराल पक्ष द्वारा आरोपी को ऑटो सुधारने के लिए 16 हजार रुपये दिए जाने की बात सामने आई, जिसे दहेज नहीं माना जा सकता।
मृतिका की मां ने भी अपने बयान में बताया कि सुनीला विवाह से पूर्व लगभग नौ माह तक आरोपी के साथ प्रेम संबंध में थी। प्रारंभ में वह विवाह से असहमत थी, लेकिन बाद में उसने सहमति दे दी थी। वहीं मृतिका के भाई ने बयान में कहा कि वह नौकरी के कारण भोपाल में था और विवाह में शामिल नहीं हो सका। उसने यह भी स्वीकार किया कि विवाह के बाद किसी भी विवाद को लेकर न तो समाज की पंचायत बुलाई गई और न ही पुलिस में कोई शिकायत दर्ज कराई गई।
न्यायालय ने मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मृत्यु का कारण हार्ट फेलियर बताया गया है। युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि जब अभियोजन पक्ष दहेज अथवा उससे जुड़ी क्रूरता को प्रमाणित करने में विफल रहा, तो जिला न्यायालय द्वारा दिया गया दोषमुक्ति का निर्णय सही है। इन्हीं कारणों से हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया।
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