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MP: कांग्रेस कार्यकर्ताओं की अवैध हिरासत मामले में दोषी पुलिसकर्मियों पर विभागीय जांच शुरू, इस दिन अगली सुनवाई

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Thu, 18 Jun 2026 10:23 PM IST
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सार

तीनों युवकों ने अपने बयानों में राजस्थान और मध्य प्रदेश पुलिस के दावों को गलत बताया। इसके बाद हाईकोर्ट ने पीड़ितों के बयानों की प्रतियां पुलिस आयुक्त, भोपाल को भेजने और उन्हें शिकायत मानते हुए कानून के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

Departmental inquiry against police personnel found guilty in the case of illegal detention
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : जबलपुर न्यूज
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विस्तार

भोपाल से गिरफ्तार किए गए कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं की कथित अवैध हिरासत के मामले में दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। यह जानकारी राजस्थान पुलिस ने हाईकोर्ट में हलफनामे के माध्यम से दी। मामले की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ के समक्ष हुई। अदालत ने अगली सुनवाई 7 जुलाई को निर्धारित की है।

उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के नाम से वायरल हुए कथित फर्जी पत्र के मामले में राजस्थान पुलिस ने मध्य प्रदेश पुलिस के सहयोग से कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए खिजर खान सहित अन्य की ओर से हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई थी।

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याचिका में आरोप लगाया गया था कि 20 अप्रैल 2026 की सुबह करीब 3 बजे साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन भोपाल ने तीनों कार्यकर्ताओं को अवैध रूप से हिरासत में लिया और उन्हें दो दिनों तक किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया।

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सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से बताया गया कि राजस्थान पुलिस की मौखिक सूचना पर तीनों को पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया था और बाद में उनके परिजनों को सौंप दिया गया। इसके बाद राजस्थान पुलिस ने सूचित किया कि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। अगले दिन उन्हें फिर साइबर सेल बुलाया गया और राजस्थान पुलिस के आने पर उनके सुपुर्द कर दिया गया।


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मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने तीनों युवकों और संबंधित थाने की सीसीटीवी फुटेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। अदालत के आदेश पर राजस्थान पुलिस ने तीनों युवकों को खंडपीठ के समक्ष पेश किया। इसके बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जबलपुर को उनके अलग-अलग बयान दर्ज करने के निर्देश दिए गए।

तीनों युवकों ने अपने बयानों में राजस्थान और मध्य प्रदेश पुलिस के दावों को गलत बताया। इसके बाद हाईकोर्ट ने पीड़ितों के बयानों की प्रतियां पुलिस आयुक्त, भोपाल को भेजने और उन्हें शिकायत मानते हुए कानून के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान एसीपी बलराम चौधरी (अशोकनगर, जयपुर), एसएचओ संतरा मीणा (ज्योति नगर, जयपुर) और सीएसआई सज्जन सिंह (पुलिस आयुक्त कार्यालय, जयपुर) व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। उनकी ओर से प्रस्तुत हलफनामे में बताया गया कि मामले में दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

अदालत को यह भी बताया गया कि याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता हरजस सिंह छाबड़ा पारिवारिक शोक के कारण सुनवाई में उपस्थित नहीं हो सके। इस पर खंडपीठ ने राजस्थान पुलिस अधिकारियों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहने के निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से तलब किया जा सकता है। राजस्थान पुलिस की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पक्ष रखा।

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