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मध्य प्रदेश: छठे वेतनमान पर हाईकोर्ट सख्त, 497 शिक्षकों को लाभ नहीं मिला तो प्रमुख सचिव को होना पड़ेगा पेश

Sat, 24 Oct 2026 07:26 AM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Sat, 24 Oct 2026 07:26 AM IST
सार

मध्य प्रदेश में अध्यापक संवर्ग के 497 शिक्षकों को वर्ष 2006 से छठे वेतनमान और पुरानी सेवा अवधि का लाभ नहीं दिए जाने पर जबलपुर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति दीपक खोत की एकलपीठ ने राज्य सरकार को आदेश का पालन करने के लिए अंतिम अवसर दिया है।

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mp high court sixth pay scale 497 teachers principal secretary contempt case
छठे वेतनमान का लाभ नहीं देने पर हाईकोर्ट सख्त - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश में अध्यापक संवर्ग के हजारों शिक्षकों को छठे वेतनमान और पुरानी सेवा अवधि का लाभ नहीं दिए जाने पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। पूर्व में पारित आदेश का पालन नहीं होने को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक खोत की एकलपीठ ने अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को आदेश का पालन करने के लिए चेतावनी के साथ अंतिम अवसर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि अगली सुनवाई तक आदेश का पालन नहीं किया गया, तो स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।

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497 शिक्षकों ने दायर की अवमानना याचिका

जबलपुर निवासी राजेश कुमार पांडेय सहित 497 शिक्षकों की ओर से दायर अवमानना याचिका में बताया गया कि उनकी प्रारंभिक नियुक्ति पंचायत विभाग में हुई थी। वर्ष 2006 में उनका संविलियन अध्यापक संवर्ग में किया गया। इसके बाद वर्ष 2018 में उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन किया गया।

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याचिका के अनुसार, राज्य सरकार ने शिक्षकों को छठे वेतनमान का लाभ वर्ष 2016 से देने का निर्णय लिया था। इस निर्णय के खिलाफ शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने शिक्षकों को वर्ष 2006 से छठे वेतनमान का लाभ देने का आदेश जारी किया था।

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सुप्रीम कोर्ट से भी खारिज हो चुकी है सरकार की याचिका

हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 24 अगस्त 2026 को सरकार की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बावजूद हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं किए जाने पर शिक्षकों ने अवमानना याचिका दायर की।

चार सप्ताह का समय देने के बाद भी नहीं हुआ पालन

अवमानना याचिका पर पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर आदेश का पालन करने के निर्देश दिए थे। मौजूदा सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि निर्धारित समय बीतने के बाद भी सरकार ने आदेश का पालन नहीं किया है। शिक्षकों की ओर से रखे गए पक्ष को गंभीरता से लेते हुए एकलपीठ ने राज्य सरकार को आदेश का पालन करने के लिए अंतिम अवसर दिया। साथ ही चेतावनी दी कि यदि आदेश का अनुपालन नहीं हुआ, तो अगली सुनवाई पर स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र आर्य ने पैरवी की।

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