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MP News: हाईकोर्ट से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा को झटका, चुनाव याचिका खारिज करने के लिए दायर आवेदन निरस्त
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Sat, 21 Mar 2026 09:23 PM IST
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सार
हाईकोर्ट ने कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा की चुनाव याचिका खारिज करने की मांग ठुकरा दी। कोर्ट ने कहा आरोपों की जांच ट्रायल में साक्ष्यों के आधार पर होगी। भाजपा प्रत्याशी ने हलफनामे में आपराधिक व आर्थिक जानकारी छुपाने का आरोप लगाया है। विधायक को चार सप्ताह में जवाब देने के निर्देश दिए गए।
मप्र हाईकोर्ट
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विस्तार
चुनाव याचिका खारिज किए जाने की मांग करते हुए दायर किए गए कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा के आवेदन को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट जस्टिस विनय सराफ की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि याचिका में लगाए गए आरोपों की ट्रायल के दौरान तथ्यों व साक्ष्यों पर परखा जाना आवश्यक है।
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सेमरिया विधानसभा सीट से साल 2023 में पराजित हुए भाजपा प्रत्याशी के पी. त्रिपाठी की तरफ से ये याचिका दायर की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि निर्वाचित कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने अपने नामांकन के साथ पेश किए गए हलफनामे में गलत जानकारी दी है। उन्होंने अपने हलफनामा में अपराधिक व आर्थिक जानकारी छुपाई है। इसके कारण उनका चुनाव शून्य घोषित किया जाना चाहिए।
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अनावेदक विधायक की तरफ से याचिका को आधारहीन बताते हुए उसे निरस्त किए जाने आवेदन पेश किया गया था। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता का आरोप है कि अनावेदक विधायक ने हलफनामा में आपराधिक प्रकरण को निरंक बताया है। आपराधिक अपराध की जानकारी छुपाने का आरोप लगाते हुए सूचना के अधिकार के तहत अनावेदक विधायक के खिलाफ दर्ज अपराध के जानकारी प्रस्तुत की गई है। इसके अलावा अनावेदक पर आरोप है कि उन्होंने बैंक से लिए गए लोन की जानकारी अपने हलफनामे में छुपाई है। इस संबंध में याचिका की तरफ से बैंक स्टेटमेंट की कॉपी में अनावेदक अभय मिश्रा का नाम बॉरोअर के तौर पर दिखाया गया है। इसके अलावा अनावेदक विधायक ने आय के स्रोत पेंशन तथा सैलरी प्राप्त बताया है। सैलरी किस प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों से प्राप्त हो रही है, इसकी डिटेल्स नहीं दी है।
अनावेदक विधायक का तर्क है कि चुनाव के दौरान पेश किए गए हलफनामे से पूर्व वह सभी आपराधिक प्रकरण में दोषमुक्त हो गए थे। इसके अलावा बैंक लोन मेसर्स अभय मिश्रा कॉन्ट्रैक्टर के नाम पर लिया गया था। वे फर्म पार्टनर के पद से साल 2008 में रिटायर हो गए थे। पेंशन व सैलरी प्राप्त होने वाले प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों के डायरेक्टर पद से उन्होंने इस्तीफा दे दिया है और कंपनी एक्ट के प्रावधान के तहत मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स को इसकी जानकारी दे दी गई थी।
एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि चुनाव याचिका में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो विजयी उम्मीदवार का चुनाव निरस्त किया जा सकता है। ट्रायल के दौरान साक्ष्य व तथ्यों का परीक्षण किए बिना उसे खारिज नहीं किया जा सकता है। उक्त चुनाव याचिका जनवरी 2024 में दायर की गई है। अभी तक अनावेदक की तरफ से लिखित जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है। एकलपीठ ने अनावेदक विधायक को चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश जारी किए हैं।

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