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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur News ›   Re-counselling of uneducated parents and victim should be done and report should be submitted in one day

Jabalpur: माता-पिता और दुष्कर्म पीड़िता की दोबारा काउंसलिंग कर एक दिन में पेश करें रिपोर्ट; हाईकोर्ट का आदेश

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Tue, 24 Jun 2025 02:45 PM IST
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सार

दुष्कर्म पीड़िता की 30 सप्ताह की गर्भावस्था को देखते हुए हाईकोर्ट ने किशोरी और उसके माता-पिता की पुनः काउंसलिंग के आदेश दिए हैं। मेडिकल रिपोर्ट में गर्भपात से खतरे की आशंका जताई गई। अब महिला न्यायिक अधिकारी व डॉक्टरों की टीम काउंसलिंग करेगी।

Re-counselling of uneducated parents and victim should be done and report should be submitted in one day
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

बलात्कार पीड़िता किशोरी की गर्भावस्था 30 सप्ताह से अधिक होने को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा ने गर्भपात के संबंध में अशिक्षित माता-पिता और पीड़िता की पुनः काउंसलिंग कराने के आदेश जारी किए हैं। एकलपीठ ने छिंदवाड़ा जिला के प्रधान न्यायाधीश को निर्देशित किया है कि महिला न्यायिक अधिकारी के साथ डॉक्टरों की एक टीम और सीडब्ल्यूसी (बाल कल्याण समिति) के एक सदस्य द्वारा एक ही दिन में काउंसलिंग करवाई जाए। याचिका पर अगली सुनवाई 25 जुलाई को निर्धारित की गई है।

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छिंदवाड़ा जिला न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश ने बलात्कार पीड़िता किशोरी के गर्भपात की अनुमति के लिए हाईकोर्ट को पत्र भेजा था। पत्र के साथ पीड़िता के माता-पिता का सहमति पत्र भी संलग्न था। हाईकोर्ट ने पत्र को याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए थे। रिपोर्ट के अनुसार, गर्भावस्था 30 सप्ताह से अधिक हो चुकी है और भ्रूण के जीवित जन्म लेने की अत्यधिक संभावना है। साथ ही, गर्भपात के दौरान पीड़िता की जान को भी खतरा हो सकता है।
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सरकारी अधिवक्ता ने सुनवाई के दौरान एकलपीठ को बताया कि माता-पिता द्वारा दी गई सहमति में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि क्या वे भ्रूण के जीवन को होने वाले संभावित खतरे से अवगत हैं। माता-पिता दूरस्थ गांव से हैं और अशिक्षित होने के कारण सभी पहलुओं से भलीभांति परिचित नहीं हैं। अतः सक्षम अधिकारियों द्वारा माता-पिता और पीड़िता की पुनः काउंसलिंग करवाई जाए।

एकलपीठ ने, गर्भावस्था लगभग 30 सप्ताह से अधिक होने के कारण, सरकारी अधिवक्ता के सुझाव को उचित मानते हुए प्रधान जिला न्यायाधीश छिंदवाड़ा को निर्देश दिया है कि एक महिला न्यायिक अधिकारी, डॉक्टरों की टीम और सीडब्ल्यूसी सदस्य के साथ मिलकर पीड़िता और उसके माता-पिता की काउंसलिंग करवाई जाए। उन्हें यह जानकारी दी जाए कि यदि बच्चा जीवित जन्म लेता है तो इसके क्या लाभ और हानि हो सकते हैं। साथ ही, अगर वे बच्चे को नहीं रखना चाहते, तो उसकी देखभाल की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। सभी संबंधित सदस्य काउंसलिंग के लिए माता-पिता के साथ प्रधान जिला न्यायाधीश छिंदवाड़ा के समक्ष उपस्थित रहें।

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