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MP News: सीबीआई जांच में अनसूटेबल कॉलेज मिले नर्सिंग कॉलेज के छात्रों को राहत, परीक्षा में शामिल हो सकेंगे
Fri, 14 Aug 2026 08:32 AM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Fri, 14 Aug 2026 08:32 AM IST
सार
सीबीआई जांच में अनसूटेबल पाए गए नर्सिंग कॉलेजों से सूटेबल कॉलेजों में स्थानांतरित 2,395 छात्रों को हाईकोर्ट ने आगामी परीक्षाओं में शामिल करने और रुके परिणाम जारी करने के निर्देश दिए। हालांकि, ग्वालियर-चंबल संभाग के कॉलेजों को फैकल्टी डुप्लीकेसी की जांच लंबित होने के कारण कोई राहत नहीं मिली।
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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हाईकोर्ट से सीबीआई जांच में अनसूटेबल पाए गए नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों को राहत मिली है। हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद पाठक तथा जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ ने अनसूटेबल कॉलेजों से सूटेबल कॉलेजों में स्थानांतरित किए गए छात्रों को आगामी परीक्षा में शामिल करने तथा उनके परीक्षा परिणाम जारी करने के निर्देश दिए हैं। युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 21 अगस्त को निर्धारित की है।
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गौरतलब है कि लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने प्रदेश में फर्जी नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता देने में निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया गया है। कागजों पर संचालित नर्सिंग कॉलेजों को भी मान्यता प्रदान की गई है।
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हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई करते हुए प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों में परीक्षाओं के आयोजन तथा परीक्षा परिणाम घोषित किए जाने पर रोक लगाते हुए सीबीआई जांच के आदेश जारी किए थे। सीबीआई जांच में प्रदेश में संचालित 695 नर्सिंग कॉलेजों में से 156 कॉलेज सूटेबल पाए गए थे। हाईकोर्ट ने जांच में अनसूटेबल पाए गए कॉलेजों के छात्रों को सूटेबल कॉलेजों में स्थानांतरित करने के आदेश जारी किए थे। सीबीआई जांच में पाई गई कमियों को दूर करने के बाद 89 कॉलेज भी सूटेबल की श्रेणी में आ गए थे।
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युगलपीठ ने पूर्व में सीबीआई जांच में सूटेबल पाए गए नर्सिंग कॉलेजों में जीएनएम तृतीय वर्ष की परीक्षा आयोजित कराने की अनुमति मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल को प्रदान की थी। इसके अलावा युगलपीठ ने शैक्षणिक सत्र 2022-23 के जीएनएम प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम घोषित करने की भी अनुमति प्रदान की थी, जबकि सीबीआई जांच में अनसूटेबल पाए गए कॉलेजों में परीक्षा आयोजित करने पर रोक बरकरार रखी थी।
हाईकोर्ट ने दिए निर्देश
याचिका पर गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल की ओर से युगलपीठ को बताया गया कि अनसूटेबल कॉलेजों से सूटेबल कॉलेजों में स्थानांतरण के लिए पात्र कुल पंजीकृत छात्रों की संख्या 4,475 है। इनमें से शिफ्टिंग के लिए पंजीकृत छात्रों की संख्या 2,813 तथा चॉइस फिलिंग करने वाले छात्रों की संख्या 2,619 है। इनमें से 2,395 छात्रों को सूटेबल कॉलेजों में स्थानांतरित किया जा चुका है। हाईकोर्ट ने उक्त जानकारी को रिकॉर्ड पर लेते हुए इन सभी छात्रों को आगामी परीक्षाओं में शामिल करने तथा रुके हुए परीक्षा परिणाम जारी करने के निर्देश दिए हैं।
ग्वालियर-चंबल संभाग के कॉलेजों को राहत नहीं
ग्वालियर एवं चंबल संभाग के नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों की ओर से पेश किए गए आवेदन में कहा गया था कि उनके कॉलेजों की जांच वर्ष 2021 में ग्वालियर बेंच द्वारा गठित 10 सदस्यीय जांच समिति ने की थी। इसमें उन्हें उपयुक्त पाया गया था। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने उन कॉलेजों की सीबीआई जांच पर अस्थायी रूप से रोक लगाई थी।
कॉलेजों के छात्रों ने हाईकोर्ट से मांग की कि उनके कॉलेजों की जांच पर वर्तमान में रोक होने के कारण उन्हें सूटेबल कॉलेज मानते हुए पूर्व वर्ष की तरह इस वर्ष भी परीक्षाओं में बैठने की अनुमति दी जाए तथा उनके परीक्षा परिणाम जारी किए जाएं। याचिकाकर्ता और सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि समिति द्वारा ग्वालियर-चंबल संभाग के इन कॉलेजों में फैकल्टी डुप्लीकेसी की जांच नहीं की गई थी। जबकि ग्वालियर-चंबल संभाग के कॉलेजों ने संबंधित सत्रों में कई फर्जी एवं डुप्लीकेट फैकल्टी दर्शाकर मान्यता प्राप्त की थी। याचिका की सुनवाई के दौरान यह तथ्य हाईकोर्ट के संज्ञान में लाया गया।
इस कारण इन कॉलेजों को सीबीआई जांच के बिना कोई राहत नहीं दी जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद इन कॉलेजों के संबंध में किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने पैरवी की।
