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Nirmala Sapre: विधायक निर्मला सप्रे के मामले में कांग्रेस को झटका, हाईकोर्ट ने की उमंग सिंघार की याचिका खारिज

Thu, 25 Jun 2026 07:46 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Thu, 25 Jun 2026 07:46 PM IST
सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से कांग्रेस को झटका लगा है। कोर्ट ने कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष मामले की विधिसम्मत जांच कर रहे हैं और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज हो चुके हैं, इसलिए हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

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Setback for Congress in MLA Nirmala Sapre's case
विधायक निर्मला सप्रे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्यवाही किए जाने की मांग करते हुए विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की तरफ से दायर याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि विधानसभा स्पीकर कानून की प्रक्रिया का पालन हुए विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष के आवेदन की जांच कर रहे हैं। उनके द्वारा संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं, इसलिए इस मामले में कोई आदेश जारी करने की आवश्यकता नहीं है।

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बता दें कि सागर जिले की बीना विधानसभा से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे का निर्वाचन शून्य घोषित किए जाने की मांग करते हुए विधानसभा नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि विधायक निर्मला सप्रे पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त थीं। लोकसभा चुनाव के दौरान पांच मई, 2024 को राहतगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम में मंच पर पहुंची थीं। कांग्रेस विधायक सप्रे भाजपा में शामिल हो चुकी हैं, इसके बावजूद उन्होंने विधायक पद से त्यागपत्र नहीं दिया है। दल बदल कानून के प्रकाश में उनका यह रवैया गैर कानूनी है।
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क्या था याचिका में?
याचिका में कहा गया था कि उन्होंने 30 जून 2024 को विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के समक्ष बीना विधायक के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्यवाही किए जाने की मांग करते हुए आवेदन दायर किया था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले की सुनवाई 90 दिन के भीतर सुनिश्चित करना था। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा दो साल से अधिक का समय गुजर जाने के बावजूद भी मामले की सुनवाई पूरी नहीं की गई। जिसके कारण उक्त याचिका दायर की गई है।


निर्मला सप्रे क्या बोलीं?
विधायक निर्मला सप्रे की तरफ से पेश जवाब में कहा गया था कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दिया है। वह भाजपा में शामिल नहीं हुई हैं। उनके खिलाफ लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। उन्हें बिना वजह विधानसभा स्पीकर के सामने चल रही कानूनी कार्यवाही और उक्त याचिका में घसीटा जा रहा है। सरकार की तरफ से बताया गया कि विधानसभा स्पीकर ने संबंधित पक्ष के बयान दर्ज किए हैं। वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल दो साल से अधिक बचा हुआ है। ऐसी कोई विषम परिस्थिति नहीं है कि मामले को जल्द खत्म करने के लिए विधानसभा स्पीकर को आदेश जारी किए जाएं।

युगलपीठ ने सभी पक्षों की सुनवाई के बाद गत 18 जून को फैसला सुरक्षित रखने के आदेश जारी किए थे। युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी करते हुए याचिका को निरस्त कर दिया। याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, विधायक निर्मला सप्रे की तरफ से अधिवक्ता संजय अग्रवाल तथा याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल ने पैरवी की।

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