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Jabalpur News: हाईकोर्ट के निर्देशों की अवहेलना, आदेश के बावजूद ट्रायल कोर्ट ने सुनवाई टाली, केस ट्रांसफर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Sat, 17 Jan 2026 11:44 PM IST
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सार

बरसों से लंबित सिविल प्रकरण के मामले में छह सप्ताह में अंतिम सुनवाई के हाईकोर्ट के निर्देशों के बावजूद ट्रायल कोर्ट द्वारा अगली तारीख तय किए जाने पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने इसे न्यायिक अनुशासन के लिए घातक बताते हुए प्रकरण को स्थानांतरित करने के आदेश दिए हैं।  

Jabalpur News: Trial court defies High Court directions, delays hearing despite order; case transferred
हाईकोर्ट ने दिए थे आदेश, ट्रायल कोर्ट ने कहा 6 सप्ताह में अंतिम सुनवाई मुमकिन नहीं
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विस्तार
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हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद ट्रायल कोर्ट द्वारा समय-सीमा में सुनवाई पूरी न किए जाने पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने इसे न्यायिक अनुशासन और पदानुक्रम के लिए घातक संकेत बताते हुए लंबित सिविल प्रकरण को दूसरे ट्रायल कोर्ट में स्थानांतरित करने के आदेश दिए हैं।

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मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का यह कहना कि छह सप्ताह में अंतिम सुनवाई संभव नहीं है, न्यायिक व्यवस्था के प्रति असम्मान को दर्शाता है और इससे मुकदमा लड़ने वाले पक्षकारों में गलत संदेश जाता है।
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क्या है पूरा मामला
सीधी जिला न्यायालय में वर्ष 2013 में एक सिविल प्रकरण दायर किया गया था। इस मामले में पहली बार नवंबर 2023 में अंतिम बहस के लिए तारीख तय हुई थी, लेकिन ट्रायल कोर्ट द्वारा अंतिम बहस नहीं सुने जाने पर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

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हाईकोर्ट ने नवंबर 2025 में आदेश पारित करते हुए ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिए थे कि वह छह सप्ताह के भीतर प्रकरण की सुनवाई पूरी करे। इसके बावजूद ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित जज को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (इंचार्ज) और जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के मामलों की भी जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है, इसलिए छह सप्ताह में फैसला देना संभव नहीं है।

ट्रायल कोर्ट ने 8 जनवरी 2026 को प्रकरण को आगे की तारीख के लिए पोस्ट कर दिया, जो हाईकोर्ट के आदेश के विपरीत था।

हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी
हाईकोर्ट की एकलपीठ ने ट्रायल जज के इस रवैये पर हैरानी जताते हुए कहा कि जब हाईकोर्ट द्वारा तय समय-सीमा के भीतर किसी मामले को सूचीबद्ध करने से भी मना कर दिया जाता है, तो यह न्यायिक अनुशासन और पदानुक्रम के टूटने का गंभीर संकेत है। 

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि ट्रायल कोर्ट द्वारा मामले को छह सप्ताह के भीतर उठाने का कोई प्रयास नहीं किया गया और जान-बूझकर उससे आगे की तारीख दी गई, जिससे यह संकेत जाता है कि मानो हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना की जा रही हो।

इसके बाद याचिकाकर्ता ने प्रकरण को दूसरे न्यायालय में स्थानांतरित करने की मांग की थी, जिसे पहले प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज ने खारिज कर दिया। इसके विरुद्ध याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज को निर्देश दिए कि प्रकरण को किसी अन्य ट्रायल जज के पास स्थानांतरित किया जाए, ताकि समयबद्ध और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित हो सके।

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