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MP: याचिका खत्म, फिर भी गिरफ्तारी! महिला रजिस्ट्रार को कोर्ट लाने पर हाईकोर्ट ने चित्रकूट पुलिस को लगाई फटकार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Sat, 09 May 2026 02:33 PM IST
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सार
चित्रकूट पुलिस द्वारा महिला रजिस्ट्रार को जमानती वारंट के आधार पर गिरफ्तार कर हाईकोर्ट में पेश किए जाने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने कहा कि महिला रजिस्ट्रार को जबरन पेश करने का कोई निर्देश नहीं दिया गया था।
मप्र हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चित्रकूट पुलिस द्वारा महिला रजिस्ट्रार को जमानती वारंट के आधार पर गिरफ्तार कर हाईकोर्ट में पेश किए जाने का मामला सामने आया है। हालांकि, महिला रजिस्ट्रार को कोर्ट में पेश करने से पहले ही हाईकोर्ट संबंधित याचिका का निराकरण कर चुका था। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई और कहा कि कोर्ट ने महिला रजिस्ट्रार को जबरदस्ती पेश करने का कोई निर्देश नहीं दिया था।
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हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को किया तलब
हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक मिश्रा ने सुनवाई के दौरान पाया कि पहले महिला रजिस्ट्रार के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया गया था, लेकिन कोर्ट ने उन्हें बलपूर्वक पेश करने के आदेश नहीं दिए थे। इस पर कोर्ट ने चित्रकूट में पदस्थ महिला सब इंस्पेक्टर और एसडीओपी को व्यक्तिगत रूप से तलब किया।
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पुलिस अधिकारियों की ओर से कोर्ट को बताया गया कि महिला रजिस्ट्रार ने बेल बॉन्ड नहीं भरा था। साथ ही अधिकारियों ने मामले में हलफनामा पेश करने के लिए समय देने का आग्रह किया। कोर्ट ने यह मांग स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 13 मई तय की है और दोनों अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
सेवानिवृत्त प्रोफेसर की याचिका से जुड़ा है मामला
यह मामला सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. प्रमिला सिंह द्वारा दायर अवमानना याचिका से जुड़ा हुआ है। याचिका में कहा गया था कि वह महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय चित्रकूट में कार्यरत थीं और उन्हें सेवानिवृत्त हुए सात साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक सेवा देयकों का भुगतान नहीं किया गया। इस मामले में हाईकोर्ट ने दिसंबर 2024 में भुगतान करने के आदेश दिए थे। आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दायर की गई थी।
सुनवाई के दौरान पेश की गई थी भुगतान रिपोर्ट
6 मई को हुई सुनवाई के दौरान महिला रजिस्ट्रार की ओर से अधिवक्ता ने पालन रिपोर्ट और भुगतान की रसीद कोर्ट में पेश की थी। अधिवक्ता ने यह भी बताया था कि संबंधित महिला रजिस्ट्रार का जून 2025 में रीवा विश्वविद्यालय में स्थानांतरण हो चुका है। इसके बाद कोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया था।
याचिका खत्म होने के बाद भी गिरफ्तार कर लाई पुलिस
याचिका का निराकरण होने के बाद भी चित्रकूट पुलिस महिला रजिस्ट्रार को गिरफ्तार कर हाईकोर्ट लेकर पहुंच गई। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि महिला रजिस्ट्रार को जबरदस्ती पेश करने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया था। चित्रकूट पुलिस स्टेशन में पदस्थ सब इंस्पेक्टर नेहा ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने एसडीओपी चित्रकूट के आदेश पर महिला रजिस्ट्रार को कोर्ट में पेश किया है। उन्होंने यह भी कहा कि महिला रजिस्ट्रार ने बेल बॉन्ड नहीं भरा था।
अधिवक्ता ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
महिला रजिस्ट्रार के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने एसडीओपी को व्यक्तिगत रूप से यह जानकारी दे दी थी कि अवमानना याचिका का निराकरण हो चुका है। इसके बावजूद पुलिस अधिकारियों ने महिला रजिस्ट्रार को रिहा करने से इनकार कर दिया और कहा कि उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाएगा। इस पर हाईकोर्ट ने महिला रजिस्ट्रार को तत्काल रिहा करने के आदेश दिए और महिला सब इंस्पेक्टर तथा एसडीओपी राजेश बंजारा को व्यक्तिगत रूप से तलब किया।
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अगली सुनवाई 13 मई को
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान एसडीओपी और महिला सब इंस्पेक्टर व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित हुए। दोनों अधिकारियों की ओर से 6 मई के आदेश के संबंध में हलफनामा पेश करने के लिए समय मांगा गया। हाईकोर्ट ने उनका आग्रह स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 13 मई को तय की है।

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