MP News: अपात्र होने के बावजूद बोनस अंक प्राप्त करने वालों को करें प्रक्रिया से बाहर, HC के आदेश में और क्या?
हाईकोर्ट ने प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2025 में कथित गड़बड़ी पर सख्त रुख अपनाते हुए अपात्र अभ्यर्थियों को दिए गए 5% बोनस अंक रद्द करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने नई मेरिट सूची बनाने और गैर-आरसीआई डिप्लोमा धारकों को चयन प्रक्रिया से बाहर करने का आदेश दिया। मामले में फर्जी प्रमाणपत्र और गलत घोषणा के आरोप सामने आए।
हाईकोर्ट ने प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2025 में कथित गड़बड़ी पर सख्त रुख अपनाते हुए अपात्र अभ्यर्थियों को दिए गए 5% बोनस अंक रद्द करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने नई मेरिट सूची बनाने और गैर-आरसीआई डिप्लोमा धारकों को चयन प्रक्रिया से बाहर करने का आदेश दिया। मामले में फर्जी प्रमाणपत्र और गलत घोषणा के आरोप सामने आए।
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मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा -2025 के परीक्षा परिणामों में कथित गड़बड़ी और अपात्र उम्मीदवारों को गलत तरीके से पांच प्रतिशत बोनस अंक दिए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि पकड़े जाने के बाद अंकों को कम करने या नहीं करने का विकल्प चुनने की अनुमति दी जाती है, तो यह बेईमानी को बढ़ावा देने और ईमानदार उम्मीदवारों को दंडित करने के समान होगा। एकलपीठ ने नए सिरे से मेरिट सूची बनाने और गैर-आरसीआई डिप्लोमा धारी अपात्र अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया से बाहर करने के आदेश जारी किए हैं।
नरसिंहपुर निवासी सोनम अगरैया एवं अन्य दो उम्मीदवारों के तरफ से प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2025 भर्ती की चयन सूची को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि विज्ञापन की कंडिका 7.7 के तहत केवल सिर्फ उन्हीं उम्मीदवारों को पांच प्रतिशत बोनस अंक दिए जाएंगे, जिसके पास भारतीय पुनर्वास परिषद से मान्यता प्राप्त विशेष शिक्षा में डिप्लोमा होगा। चयन सूची में लगभग 14,964 उम्मीदवारों ने खुद को इस श्रेणी में दिखाकर बोनस अंक प्राप्त किए हैं।
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याचिका में भारतीय पुनर्वास परिषद के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया था कि पूरे मध्य प्रदेश में पोर्टल पर केवल 2,194 कार्मिक और 3,077 पेशेवर ही पंजीकृत हैं। चयन सूची में 15 हजार उम्मीदवारों का विशेष शिक्षा प्रमाणपत्र धारक होना प्रथमदृष्टया फर्जी प्रतीत होता है। लोक शिक्षण संचालनालय ने भी जनवरी 2026 में विभाग को आगाह किया था कि लगभग 18,000 उम्मीदवारों ने हां का विकल्प चुना है, जो अत्यधिक प्रतीत होता है। इसके बावजूद सुधार के लिए पोर्टल खोले जाने के पर मंडल द्वारा उम्मीदवारों से पंजीकरण संख्या या प्रमाणपत्र नहीं मांगा गया। बिना किसी भौतिक सत्यापन के सॉफ्टवेयर के माध्यम से उम्मीदवारों के डिक्लेरेशन के आधार सीधे बोनस अंक प्रदान कर दिए गए। जिससे कारण योग्य उम्मीदवार चयन से बाहर हो गए।
पांच प्रतिशत बोनस अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों भी तरफ से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा गया था कि जल्दबाजी में हुई त्रुटि के कारण उनके द्वारा बोनस अंक का लाभ प्राप्त किया है। उनके पास संबंधित कोई भी प्रमाण पत्र नहीं है। एकलपीठ ने 6 मई को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखने के आदेश जारी किए थे। एकलपीठ द्वारा जारी आदेश में बिना प्रमाण-पत्र पांच प्रतिशत बोनस अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों की याचिका को खारिज करते हुए उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता आलोक बागरेचा और विशाल बघेल ने पैरवी की।

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