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Jabalpur: राजनीतिक रंजिश का बदला लेने पूर्व सरपंच पर दर्ज करवाया पॉस्को एक्ट केस, HC ने रद्द किया सजा का आदेश

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Thu, 17 Jul 2025 07:06 PM IST
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सार

हाईकोर्ट ने राजनीतिक द्वेष के चलते पूर्व सरपंच पर दर्ज पाॅस्को केस को खारिज करते हुए उसे दोषमुक्त किया। अदालत ने पाया कि पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट निगेटिव थी और बयान पूर्व सरपंच के कहने पर दिए गए थे।

To take political revenge, a crime under POCSO Act was registered against the former Sarpanch
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

जबलपुर हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ ने एक अपील की सुनवाई करते हुए पाया कि ग्राम पंचायत पर्व के पूर्व सरपंच के खिलाफ राजनीतिक बदले की भावना से दूसरे पूर्व सरपंच ने पॉक्सो का झूठा केस दर्ज कराया था। पीड़िता और उसकी मां ने भी उसी के कहने पर बयान दिए थे। इसके बाद कोर्ट ने जिला न्यायालय द्वारा पॉक्सों एक्ट समेत अन्य धाराओं के तहत दी गई सजा को निरस्त कर आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।

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अपीलकर्ता बब्लू उर्फ बाबू सिंह लोधी ने अपनी अपील में कहा था कि उस पर 12 वर्षीय बालिका से बलात्कार का आरोप लगाते हुए जिला न्यायालय ने सितंबर 2024 में पास्को एक्ट सहित अन्य धाराओं के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट निगेटिव आई थी और शिकायत भी पूर्व सरपंच राजेंद्र सिंह द्वारा दर्ज कराई गई थी।
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युगलपीठ ने पाया कि अपीलकर्ता और शिकायतकर्ता दोनों दमोह जिले के ग्राम पथरिया के पूर्व सरपंच रह चुके हैं, जिनके बीच राजनीतिक मतभेद थे। पीड़िता की मां के अनुसार, राजेंद्र ही उन्हें पुलिस थाने लेकर गया था। पीड़िता मानसिक रूप से अस्वस्थ है, और उसने घटना की जानकारी पहले राजेंद्र को दी थी, जबकि पुलिस में दर्ज बयान में उसने कहा कि उसने सबसे पहले अपनी मां को बताया।

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बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि राजेंद्र अक्सर उनके घर आता-जाता था और घटना के बाद पीड़िता को स्कूल से वही घर लेकर आया था। इसके बाद पीड़िता ने दो बार स्नान किया और फिर राजेंद्र के साथ थाने जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट दर्ज करने के दौरान पुलिस ने कोई रिकॉर्डिंग नहीं की। साथ ही, पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट नकारात्मक पाई गई। सभी तथ्यों की समीक्षा के बाद हाईकोर्ट की युगलपीठ ने जिला न्यायालय द्वारा दी गई सजा को निरस्त करते हुए अपीलकर्ता को दोषमुक्त कर दिया।

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