MP News: सावन से पहले फिर बैठकों का दौर, क्या इस बार बदलेगी ओंकारेश्वर की तस्वीर?
गुरु पूर्णिमा, श्रावण मास और सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को लेकर ओंकारेश्वर में जिला प्रशासन ने मैराथन समीक्षा बैठक की। बैठक में मंदिर दर्शन व्यवस्था, पार्किंग, ट्रैफिक, सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और फर्जी वीआईपी प्रोटोकॉल जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
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विस्तार
गुरु पूर्णिमा, श्रावण मास और सिंहस्थ-2028 को लेकर तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में तैयारियां तेज हो गई हैं। संभावित लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने मांधाता पुलिस कंट्रोल रूम में मैराथन समीक्षा बैठक आयोजित कर मंदिर दर्शन, यातायात, पार्किंग, सुरक्षा, परिक्रमा मार्ग और भीड़ प्रबंधन सहित विभिन्न व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में अधिकारियों को समय रहते सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए। हालांकि, हर वर्ष होने वाली ऐसी बैठकों के बावजूद जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं को लेकर उठते सवाल इस बार भी चर्चा का विषय बने हुए हैं।
श्रावण और सिंहस्थ की तैयारियों पर प्रशासन की समीक्षा
जिला प्रशासन ने आगामी गुरु पूर्णिमा, श्रावण मास और सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए मांधाता पुलिस कंट्रोल रूम में समीक्षा बैठक आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने की। इस दौरान मंदिर दर्शन व्यवस्था, यातायात, पार्किंग, सुरक्षा, परिक्रमा मार्ग, भीड़ प्रबंधन और सिंहस्थ-2028 से जुड़े विकास कार्यों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई।
श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता
कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रावण मास में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। विशेष रूप से भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग में दर्शन व्यवस्था को सरल, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया गया।
फर्जी वीआईपी प्रोटोकॉल मामले की भी हुई समीक्षा
हाल ही में सामने आए फर्जी वीआईपी प्रोटोकॉल के जरिए श्रद्धालुओं से ठगी के मामले की भी बैठक में समीक्षा की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि वीआईपी प्रोटोकॉल व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी बनाई जाए और केवल अधिकृत प्रक्रिया के माध्यम से ही विशेष दर्शन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में पुलिस अधीक्षक अगम जैन, एडीएम सृष्टि देशमुख, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) गजेंद्र सिंह कवर, एसडीएम पंकज वर्मा, एसडीओपी मनोहर सिंह गवली सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। हालांकि, यह पहला अवसर नहीं है जब श्रावण या बड़े धार्मिक आयोजनों से पहले इस तरह की समीक्षा बैठक आयोजित की गई हो। हर वर्ष गुरु पूर्णिमा, श्रावण सोमवार, महाशिवरात्रि और अन्य पर्वों से पहले प्रशासनिक बैठकों में व्यापक तैयारियों के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर श्रद्धालुओं को अपेक्षित सुविधाएं पूरी तरह नहीं मिल पातीं।
श्रद्धालुओं की ये समस्याएं अब भी बनी चुनौती
ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं की सबसे बड़ी समस्याओं में लंबी कतारें, अव्यवस्थित पार्किंग, ट्रैफिक जाम, पेयजल और शौचालयों की कमी, परिक्रमा मार्ग की बदहाल स्थिति, भीड़ नियंत्रण की कमजोर व्यवस्था और निजी सुरक्षा कर्मियों के व्यवहार को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। हाल ही में वीआईपी दर्शन के नाम पर हुई ठगी की घटना ने भी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
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15 से 20 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान
प्रशासन के अनुसार इस वर्ष गुरु पूर्णिमा से लेकर श्रावण पूर्णिमा तक करीब 15 से 20 लाख श्रद्धालुओं के ओंकारेश्वर पहुंचने की संभावना है। ऐसे में समीक्षा बैठक तभी सार्थक मानी जाएगी जब उसके निर्णय धरातल पर दिखाई देंगे। केवल बैठकों, निर्देशों और कागजी योजनाओं से श्रद्धालुओं को राहत नहीं मिलेगी। जरूरी है कि सभी विभाग समयबद्ध कार्ययोजना के साथ जवाबदेही तय करें और उसकी नियमित निगरानी भी सुनिश्चित करें।
मीडिया को नहीं मिला निमंत्रण
इतनी महत्वपूर्ण बैठक के बावजूद स्थानीय मीडिया को आमंत्रित नहीं किया गया। जनसहभागिता और पारदर्शिता के लिए मीडिया प्रशासन और जनता के बीच महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करता है। यदि व्यवस्थाओं की जानकारी सार्वजनिक होगी तो श्रद्धालुओं को भी लाभ मिलेगा और प्रशासनिक तैयारियों का वास्तविक आकलन भी संभव हो सकेगा।
श्रद्धालुओं की उम्मीदें प्रशासन से
श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों की अपेक्षा है कि इस बार प्रशासन केवल औपचारिक समीक्षा तक सीमित न रहे, बल्कि ऐसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करे जिनका सीधा लाभ लाखों श्रद्धालुओं को मिले। सिंहस्थ-2028 की सफलता भी वर्तमान व्यवस्थाओं की गुणवत्ता पर ही निर्भर करेगी। ऐसे में इस बार प्रशासनिक तैयारियों की वास्तविक परीक्षा श्रावण मास के दौरान ही होगी।
