MP: ओंकारेश्वर में बड़ा हादसा टला, नाविकों ने 9 श्रद्धालुओं को डूबने से बचाया; अधिक मास की भीड़ से बढ़ा खतरा
अधिक मास के दौरान ओंकारेश्वर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। नर्मदा नदी के विभिन्न घाटों पर डूबने की घटनाओं के बीच नाविकों और गोताखोरों ने नौ लोगों की जान बचाई। बढ़ती भीड़ के कारण घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठी।
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अधिक मास के दौरान भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग और मां नर्मदा के दर्शन के लिए देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु ओंकारेश्वर पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ के बीच गुरुवार को नाविकों और गोताखोरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर नौ लोगों को नर्मदा नदी में डूबने से बचाया।
जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र के नंदुरबार सहित विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालु रामघाट और अन्य घाटों पर स्नान कर रहे थे। इसी दौरान एक युवती गहरे पानी में चली गई और डूबने लगी। उसे बचाने के लिए उसके पिता भी पानी में उतर गए, जिससे दोनों की जान खतरे में पड़ गई। घाट पर मौजूद नाविकों ने तत्काल अपनी नाव छोड़कर नदी में छलांग लगाई और दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवती काफी गहरे पानी में चली गई थी और उसके पेट में पानी भर गया था। नाविकों ने उसे घाट पर लाकर प्राथमिक सहायता दी, जिसके बाद उसकी स्थिति सामान्य हो गई और उसकी जान बच गई।
महाराष्ट्र के नंदुरबार से दर्शन करने आए वगेराव पाटिल ने बताया कि पूरा परिवार नर्मदा स्नान कर रहा था। उनकी बेटी अचानक गहरे पानी में चली गई। उसे बचाने के प्रयास में वे स्वयं भी डूबने लगे। समय रहते नाविकों ने पहुंचकर दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। उन्होंने कहा कि यदि नाविक तत्काल सहायता नहीं करते, तो बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। उन्होंने प्रशासन से घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग की।
नाविक संघ के अध्यक्ष कैलाश भंवरिया ने बताया कि गुरुवार को नर्मदा नदी के विभिन्न घाटों पर नाविकों ने नौ लोगों को डूबने से बचाया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए नाविक लगातार सतर्क रहते हैं और कई बार अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों को बचाते हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व में कई नाविक ऐसे बचाव कार्यों के दौरान अपनी जान भी गंवा चुके हैं, फिर भी वे मानवता के नाते यह जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
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घटना को लेकर ओंकारेश्वर नगर परिषद की मुख्य नगर पालिका अधिकारी मोनिका पार्टी से चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि घाटों पर नगर परिषद के कर्मचारी लगातार श्रद्धालुओं को गहरे पानी में जाने से रोकते हैं। सुरक्षा के लिए घाटों पर जंजीरें और पानी के भीतर बैरिकेडिंग भी की गई है, लेकिन कई श्रद्धालु चेतावनियों की अनदेखी कर प्रतिबंधित क्षेत्र में चले जाते हैं, जिससे हादसों की आशंका बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि नगर परिषद के गोताखोरों ने भी कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अधिक मास और आगामी धार्मिक आयोजनों को देखते हुए सभी प्रमुख घाटों पर एसडीआरएफ, होमगार्ड और अतिरिक्त बचाव दलों की स्थायी तैनाती की जानी चाहिए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।

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