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जबलपुर: स्वयंसेवकों का व्यवहार समाज के लिए बने अनुकरणीय, मोहन भागवत ने दिया संदेश
Sun, 25 Oct 2026 11:18 AM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Sun, 25 Oct 2026 11:18 AM IST
सार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि संघ की वास्तविक पहचान उसके स्वयंसेवकों के आचरण और व्यवहार से होती है। जबलपुर में आयोजित कार्यकर्ता मिलन कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों का आचरण समाज के लिए अनुकरणीय होना चाहिए।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा है कि संघ की वास्तविक पहचान उसके स्वयंसेवकों के आचरण से ही होती है। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक का आचरण और व्यवहार ऐसा होना चाहिए, जो समाज के लिए पूरी तरह से अनुकरणीय बने।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. भागवत शनिवार को जबलपुर के नरसिंह मंदिर स्थित सरस्वती शिक्षा परिषद एवं विद्या भारती कार्यालय में आयोजित कार्यकर्ता मिलन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। लगभग एक घंटे तक चले इस कार्यक्रम में उन्होंने मुख्य शिक्षक और उससे ऊपर के दायित्वों पर कार्यरत स्वयंसेवकों को संबोधित किया तथा मार्गदर्शन दिया।
स्वयंसेवक ही संगठन का वास्तविक प्रतिनिधि
कार्यक्रम के दौरान डॉ. मोहन भागवत ने स्पष्ट रूप से कहा कि संघ न तो किसी कार्यालय से बनता है, न ही किसी शाखा या किसी समूह से। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक ही संघ का असली प्रतिनिधि होता है। स्वयंसेवक का व्यवहार और उसका आचरण ही समाज को संघ के बारे में सही संदेश और जानकारी देता है। सरसंघचालक ने कहा कि संघ में आने का भाव कभी भी कुछ पाने का नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज को देने का होना चाहिए।
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निस्वार्थ सेवा और समर्पण की भावना
डॉ. भागवत ने कहा कि स्वार्थ के लिए संघ में आने वाला व्यक्ति स्वयंसेवक के वास्तविक भाव को कभी नहीं समझ सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि यहां कुछ हासिल करने की अपेक्षा से नहीं, बल्कि अपना योगदान देने की भावना से काम किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक स्वयंसेवक के लिए समर्पण और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव ही सबसे महत्वपूर्ण होता है।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. भागवत शनिवार को जबलपुर के नरसिंह मंदिर स्थित सरस्वती शिक्षा परिषद एवं विद्या भारती कार्यालय में आयोजित कार्यकर्ता मिलन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। लगभग एक घंटे तक चले इस कार्यक्रम में उन्होंने मुख्य शिक्षक और उससे ऊपर के दायित्वों पर कार्यरत स्वयंसेवकों को संबोधित किया तथा मार्गदर्शन दिया।
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स्वयंसेवक ही संगठन का वास्तविक प्रतिनिधि
कार्यक्रम के दौरान डॉ. मोहन भागवत ने स्पष्ट रूप से कहा कि संघ न तो किसी कार्यालय से बनता है, न ही किसी शाखा या किसी समूह से। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक ही संघ का असली प्रतिनिधि होता है। स्वयंसेवक का व्यवहार और उसका आचरण ही समाज को संघ के बारे में सही संदेश और जानकारी देता है। सरसंघचालक ने कहा कि संघ में आने का भाव कभी भी कुछ पाने का नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज को देने का होना चाहिए।
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निस्वार्थ सेवा और समर्पण की भावना
डॉ. भागवत ने कहा कि स्वार्थ के लिए संघ में आने वाला व्यक्ति स्वयंसेवक के वास्तविक भाव को कभी नहीं समझ सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि यहां कुछ हासिल करने की अपेक्षा से नहीं, बल्कि अपना योगदान देने की भावना से काम किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक स्वयंसेवक के लिए समर्पण और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव ही सबसे महत्वपूर्ण होता है।
