MP: नर्मदा में डूब रहे एक ही परिवार के तीन सदस्यों को बचाया, युवा नाविकों ने दिखाई अद्भुत बहादुरी
ओंकारेश्वर के केवलराम घाट पर नर्मदा स्नान के दौरान एक ही परिवार के तीन सदस्य गहरे पानी में डूबने लगे। युवा नाविक सतीश केवट और मुकेश केवट ने साहस दिखाते हुए नदी में छलांग लगाकर तीनों को सुरक्षित बचा लिया।
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मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में सोमवार शाम एक बड़ा हादसा टल गया। नर्मदा नदी के केवलराम घाट पर स्नान के दौरान एक ही परिवार के तीन सदस्य गहरे पानी में डूबने लगे। घाट पर मौजूद दो युवा नाविकों की सूझबूझ, साहस और तत्परता से तीनों की जान बच गई। घटना के बाद परिवार इतना भयभीत था कि कैमरे के सामने कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं था।
जानकारी के अनुसार, शाम करीब चार बजे एक परिवार नर्मदा स्नान के लिए केवलराम घाट पहुंचा था। पति-पत्नी और उनकी बेटी घाट के किनारे स्नान कर रहे थे। इसी दौरान बेटी का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चली गई। उसे बचाने के प्रयास में उसकी मां भी पानी में उतर गई, लेकिन संतुलन खो बैठी और डूबने लगी। दोनों को संकट में देख पिता भी उन्हें बचाने के लिए नदी में कूद पड़े, किंतु वह भी गहरे पानी में फंस गए।
कुछ ही क्षणों में पूरा परिवार मौत के मुहाने पर पहुंच गया। घाट पर अपनी नाव के साथ मौजूद युवा नाविक सतीश केवट और उनके साथी मुकेश केवट ने बिना समय गंवाए नदी में छलांग लगा दी। सबसे पहले महिला को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके बाद बेटी को बचाया गया और अंत में पिता को भी सकुशल किनारे ले आए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यदि नाविक कुछ मिनट भी देर कर देते तो बड़ा हादसा हो सकता था। डूबने से बचाए गए परिवार ने भावुक होकर कहा कि नाविकों ने केवल उनकी ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार की जिंदगी बचाई है। उन्होंने कहा कि समय पर मदद नहीं मिलती तो उनका परिवार बिखर जाता।
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घाटों पर बढ़ रहा खतरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि ओंकारेश्वर बांध बनने और वर्तमान जल प्रबंधन व्यवस्था के कारण कई घाटों पर पानी का स्तर असमान रहता है। दिन में कई स्थानों पर पानी कम दिखाई देता है, लेकिन कुछ ही दूरी पर गहराई अचानक बढ़ जाती है। इसके अलावा घाटों की सीढ़ियों और पत्थरों पर जमी काई के कारण श्रद्धालुओं के फिसलने की घटनाएं भी लगातार सामने आती रहती हैं। वर्ष 2007 के बाद से बांध में जल भराव और बिजली उत्पादन के लिए पानी छोड़े जाने की प्रक्रिया के कारण नदी के बहाव और गहराई में परिवर्तन आया है। ऐसे में बाहर से आने वाले श्रद्धालु अक्सर वास्तविक गहराई का सही अनुमान नहीं लगा पाते।
साहस और सेवा की मिसाल बने नाविक
नर्मदा तट पर नाविक केवल यात्रियों को पार लगाने का कार्य ही नहीं करते, बल्कि संकट की घड़ी में जीवन रक्षक की भूमिका भी निभाते हैं। सतीश केवट और मुकेश केवट ने अपनी जान जोखिम में डालकर जिस साहस का परिचय दिया, वह प्रशंसनीय है। उनकी तत्परता ने एक परिवार को उजड़ने से बचा लिया।
प्रशासन से मांग
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि घाटों पर चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, फिसलन वाले क्षेत्रों की नियमित सफाई हो तथा श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित गोताखोरों और जीवन रक्षक दल की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। नर्मदा केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि हजारों लोगों की जीवनरेखा है। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। सोमवार को नाविकों की बहादुरी से एक परिवार बच गया, लेकिन यह घटना घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता की भी याद दिलाती है।

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