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Project Cheetah: मंदसौर में चीतों को बसाने की कवायद तेज, केन्या से गांधीसागर अभयारण्य पहुंचा छह सदस्यीय दल
Thu, 23 May 2024 08:08 AM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, राजगढ़
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, राजगढ़
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Thu, 23 May 2024 08:08 AM IST
सार
केन्या से आए दल ने गांधीसागर में प्रचलित एवं पूर्ण हुए कार्यों का अवलोकन किया। साथ ही अभयारण्य में चीता पुनर्स्थापना अंतर्गत 6400 हेक्टेयर में बने बाड़े एवं क्षेत्र को भी देखा।
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मंदसौर के गांधी सागर अभयारण्य में पहुंचा केन्या का दल
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मंदसौर जिले के गांधीसागर अभयारण्य में चीतों को बसाने की कवायद तेज हो गई है। चीतों को बसाने के पूर्व केन्या से आए डेलीगेशन के 6 सदस्यों ने गांधीसागर अभयारण्य का भ्रमण किया। दल ने गांधीसागर अभयारण्य में प्रचलित चीता पुनर्स्थापना योजना अन्तर्गत कार्यों का भी निरीक्षण किया व जानकारी ली। पहले दिन भ्रमण दल को अभयारण्य में चीता पुनर्स्थापना के लिए की गई तैयारियों एवं कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीता प्रोजेक्ट के सफलतम एक वर्ष के संबंध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण द्वारा दिया गया।
दूसरे दिन केन्या से आए दल ने गांधीसागर में प्रचलित एवं पूर्ण हुए कार्यों का अवलोकन किया। साथ ही अभयारण्य में चीता पुनर्स्थापना अंतर्गत 6400 हेक्टेयर में बने बाड़े एवं क्षेत्र को भी देखा। चीतों को भारत सरकार की क्वारंटाइन गाइडलाइन अनुसार गांधीसागर में लाने के उपरांत 30 दिन के प्रारंभिक क्वारंटाइन के लिए बनाए गए बाड़ों का भ्रमण एवं बाड़े अन्तर्गत चीतों की मॉनिटरिंग के लिए लगाए गए हाईमास्ट कैमरा, जलस्रोत का भी केन्या से आए दल ने निरीक्षण किया। दल ने मॉनीटरिंग रूम का भी निरीक्षण किया। बाद में दल चीतों के लिए बनाए जा रहे उपचार केंद्र का निरीक्षण करने पहुंचा। केन्या से आए दल को भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून एवं नेशनल टाइगर कंज़र्वेशन अथॉरिटी के विशेषज्ञों द्वारा भारत में वन्यप्राणियों की मॉनिटरिंग के लिए उपयोग किए जा रहे उपकरणों एवं तकनीकी के संबंध में भी अवगत कराया।
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दूसरे दिन केन्या से आए दल ने गांधीसागर में प्रचलित एवं पूर्ण हुए कार्यों का अवलोकन किया। साथ ही अभयारण्य में चीता पुनर्स्थापना अंतर्गत 6400 हेक्टेयर में बने बाड़े एवं क्षेत्र को भी देखा। चीतों को भारत सरकार की क्वारंटाइन गाइडलाइन अनुसार गांधीसागर में लाने के उपरांत 30 दिन के प्रारंभिक क्वारंटाइन के लिए बनाए गए बाड़ों का भ्रमण एवं बाड़े अन्तर्गत चीतों की मॉनिटरिंग के लिए लगाए गए हाईमास्ट कैमरा, जलस्रोत का भी केन्या से आए दल ने निरीक्षण किया। दल ने मॉनीटरिंग रूम का भी निरीक्षण किया। बाद में दल चीतों के लिए बनाए जा रहे उपचार केंद्र का निरीक्षण करने पहुंचा। केन्या से आए दल को भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून एवं नेशनल टाइगर कंज़र्वेशन अथॉरिटी के विशेषज्ञों द्वारा भारत में वन्यप्राणियों की मॉनिटरिंग के लिए उपयोग किए जा रहे उपकरणों एवं तकनीकी के संबंध में भी अवगत कराया।
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चीतों को बसाने के लिए मंदसौर में कवायद तेज हो गई है।
- फोटो : सोशल मीडिया
नामीबिया के साथ हो चुका है MOU
भारत से विलुप्त हो चुके चीतों को पुनः बसाने के लिए भारत सरकार द्वारा दक्षिण अफ़्रीका के नामीबिया के साथ पूर्व में ही MOU हस्ताक्षरित किया जा चुका है। वर्तमान में केन्या से आए दल द्वारा भी चीता पुनर्स्थापना हेतु चयनित स्थलों का भ्रमण किया गया ताकि निकट भविष्य में केन्या के साथ भी चीता के संबंध में आवश्यक कार्यवाही की जा सके। केन्या से आए दल के साथ नेशनल टाइगर कंज़र्वेशन अथॉरिटी के AIG स्तर के अधिकारी, कूनो नेशनल पार्क डायरेक्टर, वन संरक्षक उज्जैन, वन मंडल अधिकारी मंदसौर एवं गांधीसागर का स्थानीय स्टाफ उपस्थित रहा।
भारत से विलुप्त हो चुके चीतों को पुनः बसाने के लिए भारत सरकार द्वारा दक्षिण अफ़्रीका के नामीबिया के साथ पूर्व में ही MOU हस्ताक्षरित किया जा चुका है। वर्तमान में केन्या से आए दल द्वारा भी चीता पुनर्स्थापना हेतु चयनित स्थलों का भ्रमण किया गया ताकि निकट भविष्य में केन्या के साथ भी चीता के संबंध में आवश्यक कार्यवाही की जा सके। केन्या से आए दल के साथ नेशनल टाइगर कंज़र्वेशन अथॉरिटी के AIG स्तर के अधिकारी, कूनो नेशनल पार्क डायरेक्टर, वन संरक्षक उज्जैन, वन मंडल अधिकारी मंदसौर एवं गांधीसागर का स्थानीय स्टाफ उपस्थित रहा।
