फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Maternal and infant death case: Kalpana’s father seeks euthanasia after failing to get justice

रीवा: जच्चा-बच्चा मौत मामले में इंसाफ नहीं मिला तो पिता ने की इच्छामृत्यु की मांग, जांच के नतीजों का इंतजार

Thu, 29 Oct 2026 07:19 PM IST
रीवा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रीवा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रीवा Published by: रीवा ब्यूरो Updated Thu, 29 Oct 2026 07:19 PM IST
सार

रीवा के संजय गांधी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में न्याय की मांग कर रहे रामशिरोमणि मिश्रा ने इच्छामृत्यु की मांग की है। 15 दिन के आमरण अनशन के बाद शुरू हुई मजिस्ट्रियल जांच की समय-सीमा पूरी हो चुकी है।

 

विज्ञापन
Maternal and infant death case: Kalpana’s father seeks euthanasia after failing to get justice
संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर पीड़ित परिवार का संघर्ष एक बार फिर तेज होता नजर आ रहा है। अपनी बेटी कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे को खोने वाले पिता रामशिरोमणि मिश्रा ने अब इच्छामृत्यु की मांग उठाई है। मजिस्ट्रियल जांच के लिए निर्धारित एक माह की समय-सीमा पूरी होने के बाद वे अपनी फरियाद लेकर कलेक्टर से मिलने रीवा पहुंचे। उन्होंने मामले में आगे की कार्रवाई और न्याय की मांग की।

विज्ञापन

दरअसल, संजय गांधी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत के बाद रामशिरोमणि मिश्रा ने अस्पताल प्रबंधन और संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर लंबा संघर्ष किया था। न्याय की उम्मीद में उन्होंने लगातार 15 दिनों तक आमरण अनशन किया। उनके आंदोलन के बाद प्रशासन ने मामले में मजिस्ट्रियल जांच शुरू कराई थी। जांच के लिए एक माह की समय-सीमा निर्धारित की गई थी। पीड़ित परिवार को उम्मीद थी कि जांच में मामले की सच्चाई सामने आएगी और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

विज्ञापन


पढे़ं: एक बहन ने बेटे के साथ तो दूसरी ने तीन बच्चों संग कुएं में लगाई छलांग, छह मौतों से कांप उठा इलाका; कोहराम
विज्ञापन
विज्ञापन


एक माह की समय-सीमा पूरी, अब जांच के नतीजों का इंतजार
निर्धारित समय-सीमा पूरी होने के बाद भी पीड़ित परिवार को जांच की स्थिति, निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई के संबंध में संतोषजनक जानकारी नहीं मिलने की बात सामने आई है। इसी सिलसिले में रामशिरोमणि मिश्रा एक बार फिर कलेक्टर से मिलने पहुंचे। बेटी और नवजात बच्चे को खोने के दर्द से जूझ रहे पिता की इच्छामृत्यु की मांग इस मामले की गंभीरता को उजागर करती है।

15 दिन का अनशन, फिर जांच की उम्मीद; अब जवाब का इंतजार
यह मामला केवल एक परिवार की पीड़ा तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा, चिकित्सा व्यवस्था की जवाबदेही और कथित लापरवाही के मामलों में समयबद्ध कार्रवाई जैसे महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े करता है।

यदि मजिस्ट्रियल जांच की निर्धारित समय-सीमा पूरी हो चुकी है, तो प्रशासन को जांच की वर्तमान स्थिति, निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई के संबंध में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। इससे पीड़ित परिवार को न्याय की दिशा में हुई प्रगति का पता चल सकेगा।

अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल यह है कि कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत के मामले में जांच का निष्कर्ष कब सामने आएगा? क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाएगा या रामशिरोमणि मिश्रा को अपनी मांगों के लिए एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा?

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed