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गजब की गांधीगिरी: न चैंबर, न टेबल-कुर्सी और न बैठने की जगह...महिला इंजीनियर ने पेड़ के नीचे जमाया दफ्तर

न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सतना Published by: अरविंद कुमार Updated Wed, 23 Oct 2024 04:37 PM IST
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सार

मध्यप्रदेश के सतना जिले से अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। कोटर नगर परिषद की कुर्सी पर बवाल मचा हुआ है। नाराज होकर एक महिला सिविल इंजीनियर सड़क पर बैठने की बात कही है।

Kotar Nagar Parishad of Satna female civil engineer is forced to work under tree
पेड़ के नीचे बैठी इंजीनियर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

सतना के कोटर नगर परिषद में महिला सिविल इंजीनियर एक पेड़ के नीचे अपना कामकाज करने को मजबूर है। सब इंजीनियर का आरोप है कि अध्यक्ष और सीएमओ महिला सिविल इंजीनियर को बैठने की जगह तक नहीं दे रहे हैं। भवन में दो कमरे हैं, जिन पर आए दिन अध्यक्ष और सीएमओ ताला लगाकर चले जाते हैं। यही नहीं महिला सिविल इंजीनियर ने कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं, जो महिलाओं को लेकर तमाम सरकारी दावों की पोल खोल रहे हैं।

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दरअसल, मामला मध्यप्रदेश के सतना जिला अंतर्गत कोटर नगर परिषद का है। जहां खुली जगह पर एक पेड़ के नीचे बैठी यह महिला कोटर नगर परिषद की सिविल इंजीनियर है। इनका नाम प्रियंवदा सिंह है। प्रियंवदा कुछ महीने से यहां पदस्थ हैं। हैरानी की बात तो यह है कि कोटर नगर परिषद में कुर्सी के लिए बवाल मचा हुआ है। भवन में जो भी कमरे हैं। एक पर अध्यक्ष तो एक पर सीएमओ ने अपना चैंबर बना रखा है। बाकी का जो कमरा है, उस पर नगर परिषद के अन्य कर्मचारी और स्टोर रूम बनाया गया है।
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एक पेड़ के नीचे कुर्सी लगाकर कर रही काम
वहीं प्रियंवदा सिंह ने पेड़ के नीचे अपनी टेबल कुर्सी लगाकर काम करने की वजह जो बताई है, वह बेहद शर्मनाक है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि बीते कुछ दिनों तक वह अध्यक्ष के चैंबर पर ही बैठकर अपना कामकाज करती थी। लेकिन अध्यक्ष राजमणि सिंह पटेल ने उन्हें अपने चैंबर से बाहर निकाल दिया है। परेशान करने के लिए चैंबर में ताला लगा दिया जाता है। परेशान होकर भवन के बाहर ही महिला सिविल इंजीनियर ने अपनी टेबल लगा ली है और सरकारी कामकाज यहीं पेड़ के नीचे बैठकर कर रही हैं।

नहीं मिला चैंबर तो बैठ जाऊंगी सड़क पर
वहीं, सिविल इंजीनियर प्रियंवदा सिंह ने कहा कि दस महीने से यहां मैं काम कर रही हूं। न तो मेरे पास टेबल है और न ही चैंबर है। अध्यक्ष और परिषद की मंजूरी से मैं मीटिंग में काम किया करती थी। लेकिन एक सप्ताह से हमें वह बंद मिला। बैठने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। महिला टॉयलेट नहीं है। मैं एक सिविल इंजीनियर हूं, मुझे एक टॉयलेट बनाने की आजादी नहीं है। मैं एक गार्डन में बैठी हुई हूं, मुझे अगर कुछ दिनों में चैंबर नहीं मिला तो मैं रोड पर बैठ जाऊंगी। 

महिला सशक्तिकरण पर उठाए सवाल
वहीं, महिला सशक्तिकरण पर भी उन्होंने सवाल खड़े किए हैं और कहा कि छोटी जगहों पर आज भी महिलाओं को कमतर देखा जाता है। उनके लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं होती है। आज भी दोयम दर्जे का व्यवहार होता है। चाहे वो ऑफिस हो, घर हो या पॉलिटिकल फील्ड हो। वहीं, राजमणि सिंह पटेल ने कहा कि शासन से भवन बनाने के लिए मांग की गई है। लेकिन भवन अभी मिला नहीं है। इसी में हमारा कार्यालय लग रहा है, जिस प्रकार से व्यवस्था है उस प्रकार से हम व्यवस्था कर रहे हैं।समस्या तो हमारे हिसाब से कोई नहीं है। व्यक्तिगत किसी को हो तो उसका क्या कर सकते हैं। कुर्सी वो खुद उठाकर ले गई और पेड़ के नीचे अपनी स्वेच्छा से बैठ गई है। नगर परिषद कोटर की प्रभारी सीएमओ पूजा ने द्विवेदी ने बताया ये मामला हमारे सज्ञान में आया है। इसमें सब इंजीनियर का आपसी मतभेद हुआ है, ऑफिस में मैंने समझा दिया है।

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