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Sehore: 19 मार्च से शुरू होगा हिंदू नववर्ष 2083, इस बार 13 महीनों का संवत्सर, पालकी पर आएंगी मां दुर्गा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: सीहोर ब्यूरो Updated Mon, 16 Mar 2026 07:56 PM IST
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सार

19 मार्च 2026 से हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 की शुरुआत होने जा रही है, जो इस बार अधिक मास के कारण 13 महीनों का होगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस वर्ष का नाम रौद्र संवत्सर रहेगा, जिसमें देवगुरु बृहस्पति राजा और मंगल मंत्री होंगे।

Sehore news: Hindu New Year Vikram Samvat 2083 begins March 19 with 13 months
19 मार्च से शुरू होगा हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

हिंदू नववर्ष के आगमन में अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। 19 मार्च 2026 से विक्रम संवत 2083 की शुरुआत होने जा रही है। यह नववर्ष कई मायनों में खास माना जा रहा है क्योंकि इस बार अधिक मास के कारण पूरा संवत्सर 12 नहीं बल्कि 13 महीनों का होगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह संवत्सर धार्मिक, खगोलीय और सामाजिक दृष्टि से विशेष प्रभाव वाला रहने की संभावना है। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ भी होगा और देवी भक्त नौ दिनों तक शक्ति की आराधना करेंगे।
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ज्योतिषाचार्य पंडित गणेश शर्मा के अनुसार हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। इसी दिन से नए विक्रम संवत का आरंभ माना जाता है। भारत के विभिन्न हिस्सों में इसे अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। महाराष्ट्र में इसे गुड़ी पड़वा, दक्षिण भारत में उगादी और सिंधी समाज में चेटी चंद के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भारतीय परंपरा में सृष्टि के आरंभ का भी प्रतीक माना जाता है।
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रौद्र संवत्सर रहेगा इस वर्ष का नाम

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 2026 में शुरू होने वाले नए संवत्सर को रौद्र संवत्सर कहा जाएगा। इस वर्ष के राजा देवगुरु बृहस्पति होंगे, जबकि मंत्री पद मंगल ग्रह को प्राप्त होगा। वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की स्थिति के आधार पर पूरे वर्ष के प्रभाव का अनुमान लगाया जाता है। बृहस्पति को ज्ञान, धर्म और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है जबकि मंगल साहस, ऊर्जा और पराक्रम का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में इस वर्ष धर्म और कर्म से जुड़े कार्यों में तेजी आने की संभावना बताई जा रही है।

अधिक मास के कारण 13 महीने का होगा वर्ष

पंडित शर्मा बताते हैं कि हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित होता है। चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है जबकि सौर वर्ष लगभग 365 दिनों का माना जाता है। इस प्रकार दोनों के बीच करीब 11 दिनों का अंतर रह जाता है। इसी अंतर को संतुलित करने के लिए लगभग हर तीन वर्ष में एक अतिरिक्त महीना जोड़ दिया जाता है जिसे अधिक मास कहा जाता है। इसी कारण इस बार संवत्सर 12 नहीं बल्कि 13 महीनों का होगा।

पुरुषोत्तम मास का धार्मिक महत्व

अधिक मास को मलमास या पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब यह अतिरिक्त महीना बना तो किसी भी देवता ने इसका स्वामी बनने की इच्छा नहीं जताई। तब भगवान विष्णु ने इसे स्वीकार किया और इसे पुरुषोत्तम मास का नाम दिया। इस कारण इस महीने को भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है और इस दौरान पूजा-पाठ, दान, जप और तप करने का विशेष महत्व बताया गया है।

चैत्र नवरात्रि भी 19 मार्च से शुरू,पालकी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा

इस वर्ष चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ भी 19 मार्च 2026 गुरुवार से होगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. पंडित गणेश शर्मा के अनुसार इस दिन घट स्थापना का पहला शुभ मुहूर्त सुबह 06:52 से 07:43 बजे तक रहेगा जबकि दूसरा मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 बजे तक रहेगा। नवरात्रि का समापन 27 मार्च को नवमी तिथि के साथ होगा। इस बार चैत्र नवरात्रि में माता दुर्गा पालकी पर सवार होकर पृथ्वी पर आ रही हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता की सवारी भविष्य के संकेत भी देती है। देवी पुराण में पालकी पर आगमन को शुभ संकेत नहीं माना जाता। इसे आर्थिक अस्थिरता, प्राकृतिक आपदाओं और महामारी जैसी चुनौतियों का संकेत माना जाता है।

ग्रहों की चाल भी दे रही बदलाव के संकेत

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस संवत्सर में ग्रहों की चाल कई महत्वपूर्ण बदलावों का संकेत दे रही है। वर्ष की शुरुआत में बृहस्पति मिथुन राशि में रहेंगे और आगे चलकर कर्क तथा सिंह राशि में गोचर करेंगे। वहीं शनि पूरे वर्ष मीन राशि में प्रभाव बनाए रखेंगे। राहु और केतु की स्थिति भी सामाजिक और आर्थिक स्तर पर कुछ उतार-चढ़ाव का संकेत दे रही है।

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नवरात्रि में बनेंगे कई शुभ योग

चैत्र नवरात्रि के दौरान इस बार कई शुभ योग बन रहे हैं। इनमें सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, द्विपुष्कर योग और पुष्य नक्षत्र जैसे महत्वपूर्ण योग शामिल हैं। इन योगों में की गई पूजा, साधना और धार्मिक अनुष्ठान विशेष फलदायी माने जाते हैं। भक्त नौ दिनों तक माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करेंगे और मंदिरों में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।

घट स्थापना के समय रखें इन बातों का ध्यान

पंडित गणेश शर्मा के अनुसार नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना से पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ-सफाई करना आवश्यक है। कलश खंडित नहीं होना चाहिए और स्थापना के बाद उसे पूरे नवरात्र तक नहीं हटाना चाहिए। घर में तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए और पूजा स्थल को पवित्र बनाए रखना चाहिए। मान्यता है कि इन नियमों का पालन करने से माता दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

 
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