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Sehore News: रिश्तों की आड़ में अपराध पर कोर्ट सख्त, नाबालिग पोती से दरिंदगी करने वाले दादा को सात साल की सजा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: सीहोर ब्यूरो
Updated Sat, 31 Jan 2026 02:42 PM IST
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सार
सीहोर की प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश ने नाबालिग पोती से छेड़छाड़ के मामले में आरोपी दादा को पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी ठहराया। कोर्ट ने उसे 7 वर्ष के कठोर कारावास, अर्थदंड और पीड़िता को 50 हजार रुपये प्रतिकर देने की सजा सुनाई।
जिला न्यायालय।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सीहोर जिले की प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश स्मृता सिंह ठाकुर ने एक अत्यंत संवेदनशील और घृणित अपराध से जुड़े मामले में सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी दादा को दोषी करार दिया। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि पारिवारिक रिश्तों की आड़ में नाबालिग के साथ किया गया अपराध समाज के लिए अत्यंत घातक है। कोर्ट ने आरोपी को धारा 9(द) सहपठित धारा 10 पॉक्सो अधिनियम के तहत 7 वर्ष का कठोर कारावास तथा 1500 रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
अभियोजन के अनुसार घटना दिनांक 08 जुलाई 2024 की रात्रि लगभग 11 बजे की है। पीड़िता अपने घर की दूसरी मंजिल पर स्थित कमरे में सो रही थी, जबकि उसकी दादी नीचे के कमरे में थी। इसी दौरान आरोपी दादा ऊपर आया और बुरी नीयत से पीड़िता के शरीर पर हाथ फेरने लगा। नींद खुलने पर पीड़िता ने जब कारण पूछा तो आरोपी ने बहाना बनाते हुए कहा कि वह यह देखने आया था कि वह सोई है या नहीं। पीड़िता के विरोध और चिल्लाने पर आरोपी मौके से भाग गया, लेकिन जाते-जाते उसने पीड़िता को जान से मारने की धमकी दी और किसी को घटना न बताने की चेतावनी दी। यह धमकी पीड़िता के मानसिक आघात को और अधिक गहरा करने वाली थी। इसके बावजूद साहस दिखाते हुए पीड़िता ने तुरंत नीचे जाकर अपनी दादी को पूरी घटना की जानकारी दी और अगले दिन पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का निर्णय लिया।
मामले में 09 जुलाई 2024 को पीड़िता द्वारा महिला थाना सीहोर में लिखित आवेदन प्रस्तुत किया गया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मामला दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की। विवेचना पूर्ण होने के पश्चात अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। शासन की ओर से इस प्रकरण की प्रभावी पैरवी सहायक जिला अभियोजन अधिकारी रेखा यादव द्वारा की गई, जिन्होंने साक्ष्यों और परिस्थितिजन्य तथ्यों को मजबूती से न्यायालय के समक्ष रखा। न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत मौखिक, दस्तावेजी एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया। पीड़िता के बयान को विश्वसनीय, सुसंगत एवं स्वाभाविक पाया गया।
ये भी पढ़ें- पूर्व मुख्यमंत्री के वारिसों को झटका, कोर्ट ने कहा- अपंजीकृत सेल डीड से न मालिकाना हक मिलता है न स्टे
न्यायालय ने माना कि आरोपी ने अपने विश्वास और रिश्ते का घोर दुरुपयोग किया। कोर्ट ने धारा 75(1)(प) के अंतर्गत भी आरोपी को 2 वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया। न्यायालय ने पीड़िता को न्याय दिलाते हुए 50 हजार रुपये का प्रतिकर प्रदान करने का आदेश भी पारित किया। अपने फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि नाबालिगों के विरुद्ध अपराधों में किसी भी प्रकार की सहानुभूति नहीं बरती जाएगी। यह निर्णय समाज को यह स्पष्ट संदेश देता है कि रिश्तों की आड़ में किए गए अपराध भी कानून की नजर में सबसे गंभीर अपराधों की श्रेणी में आते हैं।
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अभियोजन के अनुसार घटना दिनांक 08 जुलाई 2024 की रात्रि लगभग 11 बजे की है। पीड़िता अपने घर की दूसरी मंजिल पर स्थित कमरे में सो रही थी, जबकि उसकी दादी नीचे के कमरे में थी। इसी दौरान आरोपी दादा ऊपर आया और बुरी नीयत से पीड़िता के शरीर पर हाथ फेरने लगा। नींद खुलने पर पीड़िता ने जब कारण पूछा तो आरोपी ने बहाना बनाते हुए कहा कि वह यह देखने आया था कि वह सोई है या नहीं। पीड़िता के विरोध और चिल्लाने पर आरोपी मौके से भाग गया, लेकिन जाते-जाते उसने पीड़िता को जान से मारने की धमकी दी और किसी को घटना न बताने की चेतावनी दी। यह धमकी पीड़िता के मानसिक आघात को और अधिक गहरा करने वाली थी। इसके बावजूद साहस दिखाते हुए पीड़िता ने तुरंत नीचे जाकर अपनी दादी को पूरी घटना की जानकारी दी और अगले दिन पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का निर्णय लिया।
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मामले में 09 जुलाई 2024 को पीड़िता द्वारा महिला थाना सीहोर में लिखित आवेदन प्रस्तुत किया गया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मामला दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की। विवेचना पूर्ण होने के पश्चात अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। शासन की ओर से इस प्रकरण की प्रभावी पैरवी सहायक जिला अभियोजन अधिकारी रेखा यादव द्वारा की गई, जिन्होंने साक्ष्यों और परिस्थितिजन्य तथ्यों को मजबूती से न्यायालय के समक्ष रखा। न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत मौखिक, दस्तावेजी एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया। पीड़िता के बयान को विश्वसनीय, सुसंगत एवं स्वाभाविक पाया गया।
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न्यायालय ने माना कि आरोपी ने अपने विश्वास और रिश्ते का घोर दुरुपयोग किया। कोर्ट ने धारा 75(1)(प) के अंतर्गत भी आरोपी को 2 वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया। न्यायालय ने पीड़िता को न्याय दिलाते हुए 50 हजार रुपये का प्रतिकर प्रदान करने का आदेश भी पारित किया। अपने फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि नाबालिगों के विरुद्ध अपराधों में किसी भी प्रकार की सहानुभूति नहीं बरती जाएगी। यह निर्णय समाज को यह स्पष्ट संदेश देता है कि रिश्तों की आड़ में किए गए अपराध भी कानून की नजर में सबसे गंभीर अपराधों की श्रेणी में आते हैं।

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