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लोकमाता अहिल्याबाई की 300वीं जयंती: महेश्वर की ऐतिहासिक छत्रियों के संरक्षण का शुभारंभ, धरोहर सहेजने की पहल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महेश्वर
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Sat, 31 Jan 2026 05:44 PM IST
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सार
लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती पर महेश्वर की ऐतिहासिक छत्रियों के संरक्षण का दूसरा चरण शुरू हुआ। खासगी ट्रस्ट और डब्ल्यूएमएफ की पहल से पारंपरिक व वैज्ञानिक तकनीकों द्वारा धरोहरों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है।
महेश्वर में छत्रियों के जीर्णोद्धार की ऐतिहासिक शुरुआत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जन्म जयंती वर्ष के पावन अवसर पर महेश्वर की अनुपम ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल का शुभारंभ किया गया है। खासगी ट्रस्ट एवं विश्व स्मारक कोष (डब्ल्यूएमएफ) के संयुक्त तत्वावधान में महेश्वर स्थित प्राचीन छत्रियों के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार कार्य का विधिवत आरंभ किया गया।
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इस बहुप्रतीक्षित संरक्षण परियोजना के प्रथम चरण में अहिल्येश्वर छत्री एवं विठोजीराव छत्री के मरम्मत एवं संरक्षण कार्य को सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है। इसके पश्चात द्वितीय चरण के अंतर्गत शेष छत्रियों के संरक्षण कार्य का शुभारंभ आज विधि-विधानपूर्वक पूजन-अर्चन के साथ किया गया।
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माँ रेवा के पावन तट पर मतंगेश्वर घाट के समीप स्थित सरदार फणसे छत्री के जीर्णोद्धार कार्य का प्रारंभ आज से किया गया, जिसमें सरदार फणसे परिवार, इंदौर का पूर्ण सहयोग प्राप्त हो रहा है। उल्लेखनीय है कि सरदार यशवंतराव फणसे, लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के जामाता तथा श्रीमंत मुक्ताबाई के पति थे। इस ऐतिहासिक परिसर में दोनों की प्राचीन छत्री-मंदिर आज भी विद्यमान है, जो महेश्वर की गौरवशाली परंपरा का सजीव प्रमाण है।
ऐतिहासिक स्वरूप अक्षुण्ण बना रह सके
इस अवसर पर महाराज यशवंतराव जी होलकर (अध्यक्ष, खासगी ट्रस्ट), विधायक श्री राजकुमारजी मेव, मंडल अध्यक्ष श्री विक्रम पटेल, रणदीप डडवाल (सचिव, खासगी ट्रस्ट), विरासत संरक्षण सलाहकार स्टूडियो गेस्टाल्ट तथा अहिल्या फोर्ट, खासगी ट्रस्ट का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। संरक्षण कार्य पारंपरिक स्थापत्य शैली, मूल निर्माण सामग्री तथा आधुनिक वैज्ञानिक संरक्षण तकनीकों के समन्वय से किया जा रहा है, जिससे स्मारकों की मौलिकता, संरचनात्मक स्थायित्व एवं ऐतिहासिक स्वरूप अक्षुण्ण बना रह सके।
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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिथियों ने कहा कि महेश्वर केवल मालवा की सांस्कृतिक राजधानी ही नहीं, बल्कि लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के सुशासन, स्थापत्य सौंदर्य एवं धार्मिक सहिष्णुता की जीवंत प्रतीक नगरी भी है। यहाँ की ऐतिहासिक छत्रियाँ उस गौरवशाली विरासत की मूक साक्षी हैं, जिनका संरक्षण भावी पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
सहभागिता निभाने का आह्वान
महाराज यशवंतराव जी होलकर ने इस पहल को महेश्वर के इतिहास, सांस्कृतिक पहचान एवं पर्यटन विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया तथा भविष्य में अन्य ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण हेतु भी इसी प्रकार के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने नागरिकों, श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों से ‘विरासत मित्र’ बनकर संरक्षण कार्यों में सहभागिता निभाने का आह्वान किया।
माननीय विधायक श्री राजकुमारजी मेव ने इस योजना की सराहना करते हुए कहा कि अहिल्या माँ साहेब की महान विरासत एवं महेश्वर की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में समस्त महेश्वरवासियों को एकजुट होकर सहयोग करना चाहिए, जिससे यह अमूल्य धरोहरें सदैव सुरक्षित रह सकें।

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