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Shajapur: 'पा जाते हैं वे अपना लक्ष्य, जिनमें विकार होते नहीं...'; हिंदी जागृति मंच की काव्य गोष्ठी आयोजित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शाजापुर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Thu, 13 Jun 2024 10:18 AM IST
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सार
कालापीपल के द डिजायर इंग्लिश इंस्टीट्यूट में बुधवार शाम हल्दी घाटी की गूंज थीम पर केंद्रित काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ। गोष्ठी में रचनाओं के जरिए तरह तरह के रंग कवियों की कविताओं में दिखाई दिए।
काव्य गोष्ठी का आयोजन।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
'अब तक की उपलब्धियों पर संतुष्ट जो होते नहीं, पिछली गलती देखकर पछतावा कर सोते नहीं। आराम के छलावे में जो मारते गोते नहीं, विपरीत परिस्थितियां होने पर धैर्य जो खोते नहीं। पा जाते हैं वे अपना लक्ष्य, जिनमें विकार होते नहीं...' हिंदी जागृति मंच के हरीश पाटीदार की ही तरह अन्य वरिष्ठ और नोविदित कवियों ने जब गोष्ठी में कविता सुनाई तो तालियां गूंज उठी।
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कालापीपल के द डिजायर इंग्लिश इंस्टीट्यूट में बुधवार शाम हल्दी घाटी की गूंज थीम पर केंद्रित काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ। गोष्ठी में रचनाओं के जरिए तरह तरह के रंग कवियों की कविताओं में दिखाई दिए। इस अवसर पर पिछले महीने सड़क हादसे में दिवंगत हुए शहर के कवि अनिल सक्सेना को श्रद्धांजलि भी दी गई। गोष्ठी की अध्यक्षता कालापीपल के वरिष्ठ साहित्यकार कैलाश नारायण परमार ने की। स्वागत भाषण मीडिया प्रभारी संदीप गेहलोत और आभार अनिल शर्मा ने माना। संचालन मंच के पूर्व अध्यक्ष महेंद्र सिंह तोमर ने किया। उन्होंने हाल ही में की गई श्रीलंका की यात्रा का वृतांत भी सुनाया। कविता पाठ का सिलसिला देर रात तक चलता रहा।
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गोष्ठी में मंच की महिला कवियित्री अंबिका गर्ग ने अपनी रचना 'तू उसका मदिरालय था और वो तेरी मधुशाला थी, प्रेम वेदना का दुख वो जाने, जिसने प्रेम किया होगा...' प्रिया नेमा ने 'रणभूमि में चेतन संग उन्होंने लाखों दुश्मन मारे थे...' और भास्कर परमार ने देशभक्ति पर केंद्रित रचना 'गर आप थानेदार हैं, वर्दी से बड़ा प्यार है, तो अन्याय को मिटाइए, लो देश भक्ति हो गई...' सुनाई। वहीं, सीमा शर्मा ने इस बार पड़ी भीषण गर्मी पर केंद्रित बुंदेली भाषा में लिखी रचना सुनाकर तालियां बटौरी।
इधर, बाबूलाल परमार ने जी-20 पर केंद्रित कविता 'जी-20 सम्मेलन में मोदी जी ने किया आवाहन, देश-देश से नेता आए, भारत देश बना मेजबान सुनाई। वहीं, राकेश गोस्वामी ने कविता 'तुम थे, वक्त था, मैं नहीं। मैं था, वक्त था, तुम नहीं। मैं हूं तुम हो वक्त नहीं। वक्त रहेगा मैं नहीं, तुम नहीं..' सुनाई। रेखा सक्सेना और विनोद परमार ने भी अपनी रचना सुनाकर वाहवाही लूटी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।

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