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गढ़कुंडार महोत्सव: महाराजा खेतसिंह खंगार की जयंती पर विशेष आयोजन, बुंदेलखंड की संस्कृति की दिखेगी झलक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टीकमगढ़/ निवाड़ी Published by: टीकमगढ़ ब्यूरो Updated Thu, 25 Dec 2025 05:27 PM IST
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सार

 मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन के सहयोग से निवाड़ी जिले के गढ़कुंडार में 27 से 29 दिसंबर तक तीन दिवसीय गढ़कुंडार महोत्सव आयोजित किया जाएगा।   

Preparations for the Garhkundar festival in Bundelkhand are in full swing.
गढ़कुंडार किला
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विस्तार

मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन के सहयोग से गढ़कुंडार महोत्सव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। यह तीन दिवसीय ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महोत्सव 27 से 29 दिसंबर 2025 तक आयोजित किया जाएगा। महोत्सव का आयोजन जुझौतिखण्ड (वर्तमान बुंदेलखंड) संस्कृति के जनक, शूरवीर महाराजा खेत सिंह खंगार की जयंती के उपलक्ष्य में किया जा रहा है।
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जिला निवाड़ी स्थित गढ़कुंडार क्षत्रिय खंगार समाज का ऐतिहासिक तीर्थ स्थल एवं सामाजिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। वर्ष 2006 में आयोजित समाज के राष्ट्रीय महाधिवेशन के दौरान मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा यह निर्णय लिया गया था कि महाराजा खेतसिंह की जयंती पर प्रतिवर्ष गढ़कुंडार महोत्सव आयोजित किया जाएगा। तभी से यह आयोजन हर वर्ष 27 से 29 दिसंबर तक संस्कृति संचालनालय एवं जिला प्रशासन के सहयोग से सुनिश्चित रूप से किया जा रहा है।
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महोत्सव के प्रथम दिवस 27 दिसंबर को महाराजा खेत सिंह की जयंती मनाई जाएगी। इस अवसर पर खंगार क्षत्रिय वंश की कुलदेवी गजानन माता के मंदिर तक एक विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा में देश के विभिन्न प्रदेशों से समाज के लाखों श्रद्धालु शामिल होंगे। इसके साथ ही देश-विदेश से आने वाले सैकड़ों पर्यटक भी इस आयोजन में भाग लेकर गढ़कुंडार के गौरवशाली इतिहास और बुंदेलखंड की समृद्ध संस्कृति से परिचित होंगे।

तीन दिवसीय महोत्सव के दौरान खंगार क्षत्रिय समाज की ओर से निशुल्क भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन प्रसाद ग्रहण करेंगे। शाम के समय मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा विभिन्न प्रदेशों की लोक संस्कृति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। 

पृथ्वीराज चौहान के बालसखा और विश्वस्त योद्धा थे
इतिहास के अनुसार, स्वतंत्र खंगार हिन्दू राज्य जुझौतिखण्ड की स्थापना महाराजा खेतसिंह ने सन् 1182 में की थी। उनका जन्म 27 दिसंबर 1140 को जूनागढ़ (गुजरात) में हुआ था। वे पृथ्वीराज चौहान के बालसखा और विश्वस्त योद्धा थे। चंद्रबरदाई कृत पृथ्वीराज रासो में उनके शौर्य का विस्तृत वर्णन मिलता है। पृथ्वीराज चौहान के साथ अनेक युद्धों में विजय प्राप्त करने के बाद उन्हें गढ़कुंडार का स्वतंत्र शासक बनाया गया। उनके द्वारा निर्मित गढ़कुंडार दुर्ग आज भी अपनी भव्य कला और स्थापत्य के कारण पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। प्रशासन के अनुसार, इस वर्ष भी गढ़कुंडार महोत्सव में लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है, जिसे लेकर क्षेत्र में उत्साह और तैयारियां चरम पर हैं।
 

गढ़कुंडार किला

गढ़कुंडार किला

 

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