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Explainer: रसूखदारों के आलीशान बंगलों से गांवों के आंगन तक सिसकती बेटियां; आखिर कब थमेगा जिंदगी से खिलवाड़?

Sat, 23 May 2026 05:07 PM IST
Priya Verma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Priya Verma Updated Sat, 23 May 2026 05:07 PM IST
सार

भोपाल में त्विषा शर्मा केस ने जहां पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है वहीं दहेज प्रताड़ना और नवविवाहिताओं की मौत के मामलों ने समाज की भयानक सचाई को उजागर कर दिया है। कहीं बुलेट बाइक की मांग ने एक बेटी की जिंदगी छीन ली, कहीं दहेज के आरोपों के बीच विवाहिता फंदे पर मिली, प्रदेश में सामने आए ये मामले अब सिर्फ खबरें नहीं, बल्कि समाज के आईने में दिखती कड़वी तस्वीर बन चुके हैं।

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Twisha Sharma Case to Dowry Deaths Toll: Daughters Continue to Suffer When Will This Cycle of Violence End
आखिर कब तक बलि चढ़ेंगी बेटियां - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शादी का मंडप, शहनाइयों की गूंज, हाथों की गहरी लाल मेहंदी और आंखों में एक नए संसार के सुनहरे सपने..... एक आम भारतीय परिवार अपनी पूरी जिंदगी की जमा-पूंजी और भावनाएं दांव पर लगा देता है ताकि उसकी बेटी एक नए घर में खुशियों का महल बसा सके लेकिन जब यही खुशियां महज चंद दिनों या महीनों में 'सफेद कफन' में तब्दील हो जाएं, तो न सिर्फ कलेजा कांप उठता है बल्कि पूरा समाज कटघरे में खड़ा नजर आता है। 

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राजधानी भोपाल का हाई-प्रोफाइल त्विषा शर्मा हत्याकांड इस समय खासी चर्चा में है। यह मामला इस बात का जीता-जागता और खौफनाक सबूत है कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचार और दहेज का दानव सिर्फ अशिक्षित या ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है बल्कि पढ़े-लिखे समाज, ऊंचे रसूखदार बंद कमरों के पीछे भी दरिंदगी पनपती है।
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बहरहाल त्विषा के परिवार वालों के दबाव और सरकार के हस्तक्षेप के बाद भोपाल पुलिस ने कल एक बड़ी कार्रवाई के तहत मृतका के पति समर्थ सिंह को गिरफ्तार कर लिया है और आज कोर्ट में पेशी के बाद रिमांड मांगने की तैयारी है ताकि पूछताछ में असलियत सामने लाई जा सके। त्विषा शर्मा का यह मामला कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि ये बरसों से हमारे समाज में पल रही एक ऐसी मानसिकता का आईना है, जिसके सामने आते ही कई बार हम उस पर परदा डाल देते हैं।
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Twisha Sharma Case to Dowry Deaths Toll: Daughters Continue to Suffer When Will This Cycle of Violence End
ग्वालियर में नवदंपती की संदिग्ध मौत - फोटो : अमर उजाला
त्विषा की मौत पर अनुसंधान अभी जारी है। इसी बीच बीते 72 घंटों के भीतर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आईं दहेज हत्या की खबरों ने समाज की हकीकत उजागर कर दी है। शहडोल और दमोह में दहेज की भेंट चढ़ीं दो बेटियों के साथ ही ग्वालियर में एक नवविवाहित जोड़े की मौत ने हमारी सामाजिक व्यवस्था और उसमें मौजूद चंद लालची लोगों की तरफ सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।

इन मामलों में सबसे उलझी हुई दास्तान ग्वालियर के हुरावली लिंक रोड और पिंटो पार्क इलाके से सामने आई है, क्योंकि इस मामले में पति और पत्नी दोनों ने ही शादी के महज 25 दिनों में आत्महत्या कर ली। सिद्धार्थ कांदिल और मेघा (ज्योति) की शादी बीती 25 अप्रैल को पूरे धूमधाम और सामाजिक रीति-रिवाजों के साथ हुई थी। परिजनों के मुताबिक शादी के वक्त दोनों ही बेहद खुश नजर आ रहे थे। मेघा 26 अप्रैल को अपनी ससुराल पहुंची और पांच दिन साथ बिताने के बाद 1 मई को वह अपने मायके लौट आई। 20 मई की सुबह अपने मायके में घर की दूसरी मंजिल पर मेघा ने दुपट्टे का फंदा बनाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। बेटी की इस अचानक मौत से मायके वाले अभी सदमे में ही थे कि इसके ठीक दो दिन बाद 22 मई की सुबह पत्नी के वियोग और मानसिक तनाव में घिरे पति सिद्धार्थ की लाश भी उसके घर के बाथरूम में फंदे से लटकी मिली।

शादी के महज 25 दिन के भीतर दंपति की मौत के मामले में जांच कर रही पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, जिसके बाद गोला का मंदिर थाना प्रभारी धर्मेंद्र सिंह यादव के निर्देश पर साइबर सेल की एंट्री हुई है। दोनों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं और अब पुलिस व्हाट्सएप चैट, कॉल डिटेल्स और डिलीट किए गए डिजिटल रिकॉर्ड्स के जरिए मामले की जांच कर रही है।

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Twisha Sharma Case to Dowry Deaths Toll: Daughters Continue to Suffer When Will This Cycle of Violence End
दहेज की बलि चढ़ी शुभी यादव - फोटो : अमर उजाला
दूसरी तरफ शहडोल के सिंहपुर थाना क्षेत्र के उधीया गांव में एक साल पहले शुभी यादव की शादी धर्मेंद्र यादव से हुई थी। पिता और भाइयों ने अपनी हैसियत से बढ़कर बेटी को विदा किया था लेकिन शादी के कुछ महीनों बाद ही ससुराल में 'बुलेट बाइक' की मांग को लेकर शुभी को प्रताड़ित किया जाने लगा। शुभी के चाचा रामप्रताप यादव का आरोप है कि कुछ दिनों पहले ही ससुराल पक्ष की तरफ से धमकी दी गई थी कि अगर जल्द ही बुलेट नहीं मिली तो कोई बड़ी घटना हो जाएगी और आखिरकार शुक्रवार को शुभी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। ससुराल वालों ने इसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की और पुलिस के पहुंचने से पहले ही शव को फंदे से नीचे उतार दिया। 

जब मृतका के पिता रामशरण यादव और भाई अस्पताल पहुंचे, तो शुभी के नाक और मुंह से खून बह रहा था, जो साफ गवाही दे रहा था कि मरने से पहले उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई थी। सिंहपुर थाना प्रभारी आशीष झरिया के मुताबिक मामला नवविवाहिता की संदिग्ध मौत का होने के कारण इसकी जांच राजपत्रित अधिकारियों को सौंपी गई है और एफएसएल की टीम पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर हत्या या दहेज हत्या की धाराओं में केस दर्ज करने की तैयारी कर रही है।

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Twisha Sharma Case to Dowry Deaths Toll: Daughters Continue to Suffer When Will This Cycle of Violence End
बेटियों की हत्या के बाद रोते-बिलखते परिजन - फोटो : अमर उजाला
दहेज हत्या की ही एक और घटना दमोह जिले के हिनौती गांव में देखने को मिली, जहां 24 वर्षीय मंजू यादव की संदिग्ध मौत ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। तीन साल पहले बाबू यादव के साथ ब्याही गई मंजू अपने पीछे एक मासूम दूधमुंही बच्ची को छोड़ गई है। बुधवार की रात मंजू का शव घर के भीतर फंदे पर लटका मिला, जिसके बाद मायके पक्ष ने जिला अस्पताल में जमकर हंगामा किया और ससुराल वालों पर दहेज के लिए हत्या करने का संगीन आरोप लगाया। 

मंजू की मां शशि यादव ने रोते हुए मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराया कि वे बेहद गरीब लोग हैं और शादी में सब कुछ देने के बाद भी उनकी बेटी को तड़पाया जाता था। सास रातीबाई और ननद रचना लगातार सोने के जेवरों और पैसों की मांग करती थीं, और प्रताड़ना इस हद तक थी कि मंजू को कई-कई दिनों तक ठीक से खाना भी नहीं दिया जाता था। मां का सीधा आरोप है कि उनकी बेटी को पहले जान से मारा गया और फिर रातभर इस बात को छुपाकर सुबह शव को फंदे पर लटका दिया गया। नायब तहसीलदार आशुतोष गुप्ता की मौजूदगी में पंचनामा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और इमलिया चौकी प्रभारी रमा मिश्रा के अनुसार मायके पक्ष के बयानों के आधार पर मर्ग कायम कर आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

दहेज हत्या की ये घटनाएं हमारे समाज के उस घिनौने चेहरे को उजागर करती हैं जिसकी तरफ हम चाहकर भी देखना नहीं चाहते। दरअसल शादियों में बढ़ता दिखावा, गिफ्ट, सुविधा और सामाजिक रीति-रिवाज के नाम पर दहेज का लेनदेन उस लालच को और बढ़ावा देता है जिसके कारण बेटियां लाल जोड़े से होकर सफेद कफन की राह चल देती हैं।
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