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हर हर महादेव: वाराणसी की तर्ज पर धमतरी के रुद्रेश्वर धाम में महानदी आरती, सावन में बढ़ा भक्तों का उत्साह

Mon, 10 Aug 2026 08:18 AM IST
धमतरी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: धमतरी ब्यूरो Updated Mon, 10 Aug 2026 08:18 AM IST
सार

Sawan 2026: धमतरी के महानदी तट स्थित प्राचीन रुद्रेश्वर महादेव मंदिर में सावन के दौरान हजारों श्रद्धालु दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंच रहे हैं। राम वनगमन परंपरा से जुड़े इस स्वयंभू शिवधाम में पहली बार वाराणसी की तर्ज पर महानदी आरती भी आयोजित की जा रही है।

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Har Har Mahadev: Mahanadi Aarti at Dhamtari's Rudreshwar Dham modeled after Varanasi news in hindi
सावन में आस्था का केंद्र बना रुद्रेश्वर धाम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महानदी के पवित्र तट पर स्थित रुद्री का प्राचीन रुद्रेश्वर महादेव मंदिर छत्तीसगढ़ के प्रमुख शिवधामों में गिना जाता है। धार्मिक मान्यताओं, प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक महत्व के कारण यह धाम वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। सावन मास में यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।

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मान्यता है कि वनवास काल के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने यहां भगवान शिव की आराधना की थी। इसी कारण रुद्रेश्वर धाम को राम वनगमन परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। धमतरी शहर से करीब सात किलोमीटर दूर महानदी के तट पर स्थित इस मंदिर में विराजमान शिवलिंग को स्वयंभू माना जाता है। मंदिर ट्रस्ट और पुजारियों के अनुसार यह शिवलिंग मानव निर्मित नहीं, बल्कि स्वयं प्रकट हुआ है। महानदी का शांत तट, समीप स्थित श्मशान और प्राकृतिक परिवेश इस स्थान को आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष पहचान प्रदान करते हैं।

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श्रीराम ने की थी भगवान शिव की आराधना
रुद्रेश्वर धाम की सबसे बड़ी विशेषता इसका त्रेतायुग से जुड़ा धार्मिक महत्व है। मान्यता के अनुसार वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण यहां पहुंचे थे। उन्होंने भगवान रुद्रेश्वर की पूजा-अर्चना कर अपने आगे के वनगमन का मार्ग तय किया था। इसी कारण यह स्थल राम वनगमन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। सावन माह में यहां पूरे महीने रामायण पाठ का आयोजन होता है। कांवड़िये भी परंपरा के अनुसार सबसे पहले रुद्रेश्वर महादेव का जलाभिषेक करने के बाद ही अन्य शिवालयों में जल अर्पित करने जाते हैं।

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पुराणों में भी मिलता है उल्लेख
स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार रुद्रेश्वर धाम की महिमा का उल्लेख शिवपुराण और स्कंद पुराण में भी मिलता है। सावन शुरू होते ही मंदिर का स्वरूप पूरी तरह बदल जाता है। तड़के सुबह से ही जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग जाती हैं। छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश समेत अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

प्रतिदिन होते हैं विशेष धार्मिक आयोजन
मंदिर ट्रस्ट के अनुसार यहां प्रतिदिन विशेष श्रृंगार, रुद्राभिषेक, महाआरती और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। महाशिवरात्रि, श्रावण सोमवार और अन्य प्रमुख पर्वों पर विशाल धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। सावन के दौरान बाहर से आने वाले कांवड़ियों और श्रद्धालुओं के लिए भोजन तथा विश्राम की भी व्यवस्था की जाती है।

वाराणसी की तर्ज पर हो रही महानदी आरती
इस वर्ष पहली बार सावन के प्रत्येक सोमवार की शाम रुद्रेश्वर महादेव मंदिर के घाट पर वाराणसी की गंगा आरती की तर्ज पर महानदी आरती का आयोजन किया जा रहा है। युवा ब्रिगेड की पहल पर शुरू हुई यह आरती सावन के पहले सोमवार से प्रारंभ हुई, जिसे पूरे सावन माह के प्रत्येक सोमवार को आयोजित किया जाएगा। इस अलौकिक आयोजन को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु
भिलाई से पहुंचे श्रद्धालु सारांश साहू बताते हैं कि वे वर्षों से यहां दर्शन के लिए आते रहे हैं। पहले वे साइकिल और पैदल यात्रा कर मंदिर पहुंचते थे। उनका कहना है कि रुद्रेश्वर महादेव के दर्शन करते ही मन में शांति और श्रद्धा का भाव जाग उठता है।

श्रद्धालु सोनल ध्रुव, निकिता जैन और एकता साहू बताती हैं कि वे कई वर्षों से नियमित रूप से यहां दर्शन करने आती हैं। पहले तीजा पर्व से पहले मोहल्ले के लोग साइकिल से यहां पहुंचते थे, महानदी में स्नान कर भगवान शिव की पूजा करते थे और घर ले जाकर नदी की बालू से शिवलिंग बनाकर आराधना करते थे। आज भी यह परंपरा लोगों की आस्था से जुड़ी हुई है।

स्थानीय श्रद्धालु विष्णु संकेत जैन और योगेश साहू का कहना है कि बचपन से उनका इस मंदिर से गहरा जुड़ाव रहा है। पहले मंदिर खुला स्वरूप लिए हुए था, लेकिन अब इसका भव्य विस्तार हो चुका है। इसके बावजूद यहां की आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा आज भी वैसी ही बनी हुई है। धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी रुद्रेश्वर धाम का महत्व लगातार बढ़ रहा है। महानदी तट, रुद्री बैराज और प्राचीन शिवालय का संगम इसे धमतरी जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल करता है।

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